प्यार में अकसर दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं, सांसें महकने लगती हैं, खयालों में कोई बस जाता है. पर प्यार का यह आलम तब आफत बन कर टूट पड़ता है जब दिल किसी और पर आ जाए.

पिछले दिनों एक पति दिल्ली के एक कोर्ट में जा पहुंचा और कोर्ट से गुहार लगाई कि वह अपनी पत्नी से परेशान है पुलिस उस की मदद नहीं कर रही.

दरअसल, दिल्ली के उत्तम नगर निवासी रवि की शादी सरिता (बदला नाम) से हुई तो उस की खुशी का ठिकाना नहीं था. पत्नी सरिता खूबसूरत थी, जिस के प्रेम में वह खूब डूबताइतराता रहता था. पत्नी की खूबसूरती की तारीफ दोस्तों, रिश्तेदारों से सुनता तो बल्लियों उछलता.

मगर उस की यह खुशी चंद ही दिनों में तब काफूर हो गई, जब पत्नी की असलियत उपन्यास के पन्नों की तरह खुलने लगी. सरिता एक गैरपुरुष के प्रेम में दीवानी थी. 1-2 बार पति की नजरों में आई तो खुद हावी रहने के लिए पति के साथ ससुराल वालों को भी परेशान करने लगी. परिवार को दहेज व अन्य झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां देने लगी. वह अपने हाथ की नस काटने तक की धमकी देती.

रवि और उस के परिवार के लोगों ने कभी थानाकचहरी नहीं देखे थे. समाज में बदनामी का डर था. लिहाजा सभी ने सरिता को काफी समझानेबुझाने का प्रयास किया, मगर बजाय समझने के वह और उन्मुक्त हो गई. थकहार कर पति कोर्ट जा पहुंचा और न्याय की गुहार लगाई.

क्या कहता है कानून

ऐडवोकेट दीप्ति कहती हैं, ‘‘इस तरह के मामले कोर्ट में आएदिन आते रहते हैं. अवैध संबंध का राज जब खुलता है तो एकसाथ कई लोगों की जिंदगी दांव पर लग जाती है. रिश्ते खत्म हो जाते हैं. लिहाजा शादी खत्म करने वे कोर्ट की ओर रुख करते हैं. कानूनन ऐडल्टरी के मामले में पुरुषों के दोषी पाए जाने पर उन्हें सजा दिए जाने का तो प्रावधान है पर महिलाओं को नहीं. यह आईपीसी की धारा-497 के तहत आता है.

‘‘दरअसल, धारा-497 पुराना कानून है, जिस में संशोधन की मांग उठती रही है.’’

धारा 497 की पेचीदगियां

आमतौर पर क्रिमिनल लौ में जैंडर समानता दिखती है पर धारा-497 में नहीं. इस धारा के अंतर्गत सिर्फ पुरुष को ही अपराधी माना जाता है जबकि महिला सिर्फ विक्टिम होती है.

यानी अगर कोई विवाहित पुरुष किसी विवाहित औरत के साथ सहमति से संबंध बनाता है तो संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ तो उस औरत का पति ऐडल्टरी का मुकदमा दर्ज करा सकता है, लेकिन संबंध बनाने वाली औरत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का कोई प्रावधान नहीं है.

आर्थिक जरूरत, रोमांच, कुछ नया करने व शारीरिक भूख को शांत करने की चाह में जब महिलापुरुष एक बार इस दलदल में फंसते हैं, तो फिर फंसते चले जाते हैं. उन के लिए इस दलदल से निकलना असंभव हो जाता है.

दिसंबर, 2011 में विवाहेतर संबंधों पर कराए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए थे. इस अध्ययन के मुताबिक 16% भारतीय महिलाएं विवाहेतर संबंध यानी ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में रहती हैं.

क्रिकेटर शमी की जिंदगी में तूफान

हाल ही में भारतीय क्रिकेटर मो. शमी व उस की पत्नी हसीन जहां में भी विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा. हसीन ने खुलेआम आरोप लगाया है कि शमी दूसरी लड़कियों के संपर्क में रहते हैं और अंतरंग चैट करते हैं.

हसीन जहां की बातों में कितनी सचाई है, यह तो तहकीकात में ही पता चल सकता है पर इस आरोप से न सिर्फ शमी का कैरियर, बल्कि दांपत्य जीवन भी दांव पर लग गया है.

कभीकभी तो विवाहेतर संबंध शादीशुदा जिंदगी को खत्म कर खतरनाक रूप भी इख्तियार कर लेते हैं. यहां कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिन्होंने सभ्य समाज की चूलें हिला दीं:

अलीपुर, दिल्ली के रहने वाले सुरेंद्र ईश्वर की हत्या उस की पत्नी के प्रेमी ने इसलिए कर दी कि सुरेंद्र को दोनों के रिश्ते का पता चल गया था. अब आरोपी जेल में है.

दिल्ली के गाजीपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जब अवैध संबंधों में बाधा बन रही 4 साल की एक मासूम बच्ची को प्रेमी ने इसलिए मौत के घाट उतार दिया, क्योंकि बच्ची संबंध बनाते समय बाधा बन रही थी. आरोपी कानून की गिरफ्त में है.

मुंबई की एक घटना में पतिपत्नी ने मिल कर बाद में प्रेमी की हत्या कर दी ताकि शादीशुदा जिंदगी बरबाद न हो. दोनों ही पुलिस की गिरफ्त में हैं.

अशोक नगर में पतिपत्नी के बीच ‘वो’ आया तो मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा. पति धर्मेंद्र को पत्नी के रिश्ते की भनक लगी तो धर्मेंद्र की हत्या खुद उस की पत्नी ने प्रेमी के साथ मिल कर कर दी. अब दोनों जेल में हैं.

क्यों बनते हैं ऐसे संबंध

क्लीनिकल साइकोलौजिस्ट डा. अतुल वर्मा ने विवाहेतर संबंध बनने की कई वजहें बताईं:

भावनात्मक वजह: विवाहोपरांत दंपती एकदूसरे से भावनात्मक जुड़ाव चाहते हैं. एकदूसरे से अपेक्षा करते हैं कि जीवनसाथी उसे दिल की गहराइयों से प्रेम करे, उस का पूरा खयाल रखे. पर साथी से उपेक्षा मिलने पर यही सब किसी तीसरे से मिलने की चाहत होने लगती है. परिणाम विवाहेतर संबंध के रूप में सामने आता है.

अकेलापन: पतिपत्नी में से किसी एक का अकेलापन उसे विवाहेतर संबंध की ओर ले जाता है. फिर चाहे यह अकेलापन कामकाज में व्यस्तता की वजह से हो या फिर पारिवारिक वजहों से एकदूसरे के प्रति उदासीनता संबंध की ऊष्मा को खत्म कर देती है.

जीवन में रोमांच लाने के लिए: कुछ लोगों को जीवन में कुछ नयापन लाने की चाहत विवाहेतर संबंध की ओर ले जाती है. आमतौर पर ऐसे लोग पर्सनैलिटी डिसऔर्डर से पीडि़त होते हैं. इन का अधिकतर समय नैट सर्च करने, फ्रैंड बनाने, कामुक संदेश भेजने, सोशल नैटवर्किंग साइटों को खंगालने में बीतता है. ऐसे लोग जीवन को रोमांच समझते हैं और जीवन भर किसी एक व्यक्ति से बंधे रहना पसंद नहीं करते.

ताकि सुखद रहे दांपत्य

डा. अतुल वर्मा मानते हैं कि दांपत्य जीवन में साथी अगर निम्न बातों का ध्यान रखें तो विवाहेतर संबंध बनने और परिवार को टूटने से बचाया जा सकता है:

  • पतिपत्नी भले ही कामकाजी हों पर एकदूसरे के लिए समय निकालें.
  • घर में टीवी, मोबाइल से दूर रहें.
  • साथ छुट्टियां मनाएं, साथ घूमने जाएं.
  • रात को खाना खाने के लिए एकसाथ डिनर टेबल पर बैठें.
  • एकदूसरे की जरूरतों का ध्यान रखें.
  • सैक्स में नएनए तरीके अपनाएं व खूब ऐंजौय करें.
  • सब से अहम साथी को भावनात्मक सहारे की कमी न महसूस होने दें.

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