12 अप्रैल, 2017 को जैसेजैसे रात गहराती जा रही थी, जगमोहन की चिंता बढ़ती जा रही थी. कभी वह दरवाजे की ओर ताकते तो कभी टिकटिक करती घड़ी की ओर. इस की वजह यह थी कि उन का जवान बेटा शिवकुमार शाम 4 बजे घर से निकला था तो अभी तक लौट कर नहीं आया था. परेशानी की बात यह थी उस का मोबाइल फोन स्विच औफ आ रहा था. बेटे से संपर्क नहीं हो सका तो जगमोहन ने रिश्तेदारों तथा उस के यारदोस्तों से पूछा, लेकिन कोई भी उस के बारे में कुछ नहीं बता सका. उन्होंने अपनी रिश्तेदार ममता से भी उस के बारे में पूछा था, उस ने भी कुछ नहीं बताया था.

जगमोहन ने वह रात चहलकदमी करते गुजारी. सवेरा होते ही जब उन्होंने पड़ोसियों से बेटे के गायब होने की चर्चा की तो किसी ने बताया कि वेदप्रकाश के बाग में पेड़ से एक युवक की लाश लटक रही है. जगमोहन पड़ोसियों के साथ वहां पहुंचे तो पेड़ से लटक रही लाश देख कर चीख पड़े.

क्योंकि वह लाश उन के बेटे शिवकुमार की थी. थोड़ी ही देर में यह बात पूरे गांव में फैल गई. फिर तो पूरा गांव वेदप्रकाश के बाग में इकट्ठा हो गया. लोगों का यही कहना था कि शिवकुमार ने फांसी लगा कर आत्महत्या की है. लेकिन जगमोहन यह बात कतई मानने को तैयार नहीं था. किसी ने फोन द्वारा इस घटना की सूचना थाना घाटमपुर पुलिस को दे दी थी.

थाना घाटमपुर के थानाप्रभारी अरविंद कुमार सिंह ने मिली सूचना की जानकारी अपने अधिकारियों को दी और खुद पुलिस बल के साथ बडेरा गांव पहुंच गए. उस समय तक बाग में काफी भीड़ लग चुकी थी. घटनास्थल पर मौजूद जगमोहन ने अरविंद कुमार सिंह को बताया कि फांसी के फंदे पर लटक रहा युवक उन का बेटा शिवकुमार है, जो कल शाम 4 बजे से गायब था.

अरविंद कुमार सिंह ने बारीकी से घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र 30 साल के आसपास थी. वह अपनी ही शर्ट के फंदे से लटक रहा था. उस के पैर जमीन को छू रहे थे. उस के शरीर पर भी चोटों के निशान थे. इस सब से यही लग रहा था कि पहले मृतक की जम कर पिटाई की गई थी. उस के बाद उसे फांसी पर लटकाया गया था. देखने में ही मामला पूरी तरह से संदिग्ध लग रहा था.

अरविंद कुमार सिंह लाश और घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे थे कि एसपी (ग्रामीण) सुरेंद्रनाथ तिवारी और सीओ (घाटमपुर) जितेंद्र कुमार भी आ गए. अधिकारियों ने भी लाश और घटनास्थल का निरीक्षण किया. इस के बाद मृतक के पिता जगमोहन से पूछताछ की गई. जगमोहन ने बताया कि उस के बेटे ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की हत्या की गई थी और गुमराह करने के लिए लाश को यहां लटका दिया गया है.

‘‘तुम्हें क्या किसी पर शक है?’’ एसपी सुरेंद्रनाथ तिवारी ने पूछा.

‘‘जी साहब, मुझे गांव की ममता और उस के प्रेमी पप्पू पर शक है.’’ जगमोहन ने कहा.

सुरेंद्रनाथ तिवारी ने थानाप्रभारी को निर्देश दिया कि लाश की पोस्टमार्टम की काररवाई के बाद ममता और उस के प्रेमी पप्पू से पूछताछ की जाए. मौके की काररवाई निपटाने के बाद थानाप्रभारी अरविंद कुमार ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया.Crime thriller love story

ममता बडेरा गांव के ही अमित की पत्नी थी. अरविंद कुमार ने ममता को थाने बुलवा लिया. उस से शिवकुमार की मौत के बारे में पूछताछ की गई तो वह साफ मुकर गई कि उसे कुछ नहीं पता. इस का कहना था कि शिवकुमार उस की जातिबिरादरी का तो था ही और रिश्तेदार भी था. भला वह उस की हत्या क्यों करेगी. उस के घर वाले उसे झूठा फंसा रहे हैं.

ममता के साथ उस का 8 साल का बेटा कल्लू भी था. ममता उसे अपने साथ लाई थी. अरविंद कुमार ने उस मासूम को एकांत में ले जा कर उस से प्यार से पूछा तो उस ने सारा भेद खोल दिया. उस ने बताया कि उस की मम्मी और पप्पू चाचा ने मिल कर शिवकुमार चाचा को खूब पीटा था. उस के बाद रात में ही दोनों शिवकुमार चाचा को घर के बाहर ले गए थे.

बच्चे के बयान के बाद थानाप्रभारी ने ममता पर सख्ती की तो वह टूट गई. उस ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उस ने बताया कि हालात ऐसे बन गए कि उसे शिवकुमार की हत्या करनी पड़ी. इस के बाद पुलिस उस के प्रेमी पप्पू को भी हिरासत में ले कर थाने ले आई गई.

दोनों से की गई पूछताछ में शिवकुमार की हत्या के पीछे प्रेमत्रिकोण में की गई हत्या की कहानी सामने आई, जो इस प्रकार थी-

उत्तर प्रदेश के कानपुर (देहात) जनपद के डेरापुर थाने के तहत एक गांव है मटेरा. इसी गांव में जयकुमार अपने परिवार के साथ रहता था. उस के पास खेती की जो थोड़ीबहुत पुश्तैनी जमीन थी, उसी के सहारे वह अपना परिवार पाल रहा था.

उस की 3 बेटियां थीं, जिन में ममता सब से छोटी थी. बड़ी बेटियों की शादी करने के बाद छोटी बेटी ममता भी शादी के लायक हो गई थी. वह उस के हाथ पीले कर के चिंतामुक्त हो जाना चाहता था. इसलिए उस के लिए भी लड़का देखने लगा. उसे किसी से अमित बारे में पता चला तो वह उसे देखने पहुंच गया.

अमित कानपुर जनपद के कस्बा घाटमपुर से 2 किलोमीटर दूर बडेरा गांव का रहने वाला था. उस के पास भी खेती की ठीकठाक जमीन थी. उस के बड़े भाई अमन की शादी हो चुकी थी. अमित का मन न तो पढ़ाई में लगा और न ही खेती में. वह घाटमपुर स्थित कपड़ों के एक शोरूम पर काम करने लगा था जयकुमार को अमित ठीकठाक लगा तो उस ने ममता की शादी उस के साथ कर दी.

अमित ममता को पा कर बेहद खुश था, क्योंकि ममता उस की कल्पना के अनुरूप निकली थी. हंसीखुशी से उन की गृहस्थी की गाड़ी चल निकली थी. उसी दौरान ममता एक बेटे कमल उर्फ कल्लू की मां बनी.

ममता की जेठानी बरखा तेजतर्रार थी. चूंकि ममता उस से ज्यादा खूबसूरत थी, इसलिए वह उस से ईर्ष्या करती थी. जबतब वह उसे महारानी कह कर ताने भी मारती थी. घरेलू कामकाज को ले कर भी दोनों में अकसर झगड़ा होता रहता था.

बरखा पति पर अलग रहने का दबाव बनाने लगी, लेकिन अमन राजी नहीं था. कुछ दिनों बाद बरखा ने त्रियाचरित्र की ऐसी चाल चली कि दोनों भाइयों के बीच खेती की जमीन और मकान का बंटवारा तक हो गया.

अमित अलग रहने लगा तो उस के ऊपर नौकरी के अलावा जमीन की देखरेख की भी जिम्मेदारी आ गई. वह दिनरात काम में व्यस्त रहने लगा, साथ ही वह शराब भी पीने लगा. कुल मिला कर व्यस्तता की वजह से वह पत्नी को समय नहीं दे पाता था.

एक दिन ममता घर में अकेली थी, तभी शिवकुमार आ गया. वह उसी की जाति का था और गांव के पूर्वी छोर पर रहता था. वह गांव के जानेमाने किसान जगमोहन का एकलौता बेटा था. वह पिता के साथ खेती के कामों में हाथ बंटाता था. वह रंगीनमिजाज था और बनसंवर कर रहता था.

शिवकुमार की दोस्ती अमित से थी, इसलिए ममता उसे अच्छी तरह जानती थी. ममता और शिवकुमार का आमनासामना हुआ तो दोनों एकदूसरे को अपलक देखते रह गए. ममता की खूबसूरती ने शिवकुमार के दिल में हलचल मचा दी. कुछ पलो बाद ममता के होंठ फड़के, ‘‘कैसे आना हुआ शिव, कोई काम था क्या?’’

‘‘हां भाभी, अमित के पास आया था. उस ने कुछ पैसे उधार लिए थे?’’ शिवकुमार ने कहा.

‘‘वह तो हैं नहीं, अभी खेतों पर गए हैं?’’ ममता ने कहा.

‘‘तो फिर मैं चलता हूं. कल सुबह आऊंगा.’’ शिवकुमार ने कहा.

‘‘अरे वाह, ऐसे कैसे चले जाओगे. आज इतने दिनों बाद तो आए हो, कम से कम चाय तो पीते जाओ.’’ ममता ने मुसकराते हुए कहा.

शिवकुमार भी यही चाहता था. कुछ देर में ही ममता चाय बना लाई. चाय पीने के दौरान शिवकुमार की नजरें ममता की देह पर ही टिकीं रहीं. जब दोनों की नजरें टकरातीं शिवकुमार कामुक अंदाज से मुसकरा देता. उस की मुसकराहट से ममता के दिल में हलचल मच जाती.

शिवकुमार ममता से मिल कर अपने घर लौटा तो ममता का खूबसूरत चेहरा उस के दिलोदिमाग में ही घूमता रहा. दूसरी ओर ममता का भी यही हाल था. वह शिवकुमार की आंखों की भाषा पढ़ चुकी थी. इस के बाद शिवकुमार ममता के नजदीक आने की तरकीबें सोचने लगा.

ममता का पति अमित शराब पीता था. इसी का उस ने फायदा उठाया. वह देर शाम शराब की बोतल ले कर उस के घर पहुंच जाता और दोनों जाम से जाम टकराने लगते थे. खानेपीने का खर्चा शिवकुमार ही उठाता था. वह ममता पर भी खर्च करने लगा था. उस की इस दरियादिली की ममता अपने पति से खूब तारीफ करती.

एक दिन शिवकुमार दोपहर को ममता के घर पहुंचा. उस समय वह घर में अकेली थी और चारपाई पर लेटी थी. शिवकुमार को देख कर वह उठ कर खड़ी होते हुए मुसकरा कर बोली, ‘‘अरे, तुम इस वक्त कैसे चले आए, तुम्हारी महफिल तो शाम को सजती है?’’

‘‘तुम ठीक कहती हो भाभी, लेकिन आज मैं दोस्त से नहीं, तुम से मिलने आया हूं.’’

‘‘अच्छा,’’ ममता खिलखिला कर हंसी, ‘‘इरादा तो नेक है.’’

‘‘नेक है तभी तो अकेले में मिलने आया हूं. भाभी मैं तुम से बहुत प्यार करने लगा हूं.’’ शिवकुमार ने सीधे ही मन की बात कह दी.

‘‘शिव, यह तुम ने कह तो दिया पर जानते हो प्यार की राह में कितने कांटे हैं?’’ ममता ने गंभीरता से कहा, ‘‘मैं शादीशुदा और एक बच्चे की मां हूं.’’

‘‘जानता हूं, फिर भी जब तुम चाहोगी, मैं सारी बाधाओं को तोड़ दूंगा.’’ शिवकुमार ने ममता के करीब जा कर कहा.

इस के बाद शिवकुमार के गले में बांहें डाल कर ममता ने कहा, ‘‘शिव, मैं भी तुम्हें बहुत चाहती हूं. लेकिन शर्म की वजह से दिल की बात नहीं कह पा रही थी.’’

शिवकुमार ने ममता को पकड़ कर सीने से लगा लिया. फिर तो मर्यादा भंग होते देर नहीं लगी. जिस्मानी रिश्ते की नींव पड़ गई तो वासना का महल खड़ा होने लगा. शिवकुमार को जब भी मौका मिलता, वह ममता के घर आ जाता और इच्छा पूरी कर चला जाता. जब शिवकुमार का  आने का सिलसिला बढ़ने लगा तो आसपड़ोस के लोगों की नजरों में दोनों खटकने लगे. मोहल्ले में इस बारे में चर्चा होेने लगी तो उड़तेउड़ते यह खबर अमित के कानों तक पहुंच गई.

अमित अपनी पत्नी ममता पर बहुत विश्वास करता था. पर इस बात ने उसे विचलित कर दिया. उसे पत्नी और विश्वासघाती दोस्त पर बहुत गुस्सा आया. उस ने शिवकुमार को खूब खरीखोटी सुनाई और ममता की जम कर पिटाई कर दी. ममता की जेठानी बरखा ने इस बात को चटकारे ले कर खूब प्रचार किया.

अमित की सख्ती के बाद शिवकुमार का उस के घर आनाजाना बंद हो गया. काफी दिनों तक ममता भी घर से बाहर नहीं निकली. इस से अमित ने सोचा कि शायद अब वह सुधर गई है. लेकिन उस की सोच गलत निकली. इस बीच उस ने पड़ोसी गांव मानपुर के रहने वाले पप्पू यादव से संबंध बना लिए थे. वह दबंग किस्म का युवक था और ब्याज पर पैसे देता था.

अमित ने भी उस से कुछ पैसे ब्याज पर ले रखे थे. पैसा व ब्याज वसूली के लिए वह अमित के घर आता रहता था. इसी आनेजाने में ममता ने उस से नाजायज संबंध बना लिए थे.

शिवकुमार कुछ समय तक ममता से नहीं मिल सका था, लेकिन बाद में वह चोरीछिपे उस से मिलने आने लगा था. अब ममता के पप्पू और शिवकुमार दोनों से संबंध बनाए थे. वह दोनों में से किसी को भी नाराज नहीं करना चाहती थी. किसी तरह अमित को पता चल गया कि ममता ने पप्पू यादव से संबंध बना लिए हैं तो वह बहुत दुखी हुआ.

काफी समझाने पर भी जब ममता नहीं मानी तो उस ने कलह करने के बजाय उस से दूर रहना उचित समझा. अत: वह पत्नी से अलग घाटमपुर में रहने लगा. बीचबीच में वह अपने बेटे से मिलने आ जाता था.

एक दिन शिवकुमार ममता से मिल कर घर से निकल रहा था, तभी पप्पू यादव आया. शक होने पर पप्पू ने ममता से पूछा. त्रियाचरित्र करते हुए उस ने कहा, ‘‘शिवकुमार मेरा रिश्तेदार है. इसलिए वह मेरे साथ जबरदस्ती करता है.’’

ममता की बात सुन कर पप्पू गुस्से से बोला, ‘‘अगर ऐसी बात है तो उसे सबक सिखाना पड़ेगा. तुम भी ध्यान रखो कि मेरी हो तो मेरी ही रहो. एक म्यान में 2 तलवारें नहीं रह सकतीं.’’

इस के बाद पप्पू यादव शिवकुमार पर कड़ी नजर रखने लगा. 12 अप्रैल, 2017 की रात 10 बजे शिवकुमार ममता के घर पहुंचा. उस समय पप्पू यादव ममता के घर में ही था. आते ही शिवकुमार ममता के साथ जबरदस्ती करने लगा. उस ने पप्पू को देखा नहीं था.

ममता ने विरोध किया, लेकिन शिवकुमार नहीं माना. तभी पप्पू यादव ने उसे ललकारा. दोनों के बीच मारपीट होने लगी. उसी बीच ममता एक डंडा ले आई और शिवकुमार को पीटने लगी. शिवकुमार चीखने लगा. चीख से ममता के बेटे कल्लू की आंखें खुल गईं. डर की वजह से वह बिस्तर पर ही पड़ा रहा.

कुछ ही देर में शिवकुमार पस्त पड़ गया. इस के बाद ममता ने शिवकुमार के पैर पकड़ लिए और पप्पू यादव ने उस का गला दबा दिया. शिवकुमार की हत्या कर लाश को ठिकाने लगाना जरूरी था. आधी रात बीतने के बाद दोनों ने शिवकुमार की लाश को साइकिल पर रखा और उसे गांव के बाहर वेदप्रकाश के बाग में ले गए.

मामला आत्महत्या का लगे, इस के लिए उन्होंने शिवकुमार की शर्ट निकाल कर एक बांह उस की गरदन में कस दी और दूसरी पेड़ से बांध दी. शिवकुमार की लाश को लटका कर दोनों अपनेअपने घर आ गए.

सुबह के समय गांव के किसी व्यक्ति ने बाग में लटक रही लाश देखी तो उस ने यह बात गांव वालों को बता दी. जानकारी मिली तो जगमोहन बाग में पहुंचा तो बेटे की लाश देख कर दहाड़ें मार कर रोने लगा. इसी बीच किसी ने घाटमपुर पुलिस को सूचना दे दी थी.

पुलिस ने 15 अप्रैल, 2017 को अभियुक्त पप्पू यादव और ममता को रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष माती अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उन की जमानतें स्वीकार नहीं हुई थीं.  ?

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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