34 वर्षीय दीपा वर्मा का भरापूरा गदराया बदन किसी भी मर्द की नीयत बिगाड़ने के लिए काफी था. वजह यह कि दीपा की आंखों में पुरुषों के लिए एक आमंत्रण सा होता था. जो पुरुष इस आमंत्रण को समझ स्वीकार कर लेता था, वह फिर उस के हुस्न और अदाओं से खुद को आजाद नहीं कर पाता था.

ऐसा ही कुछ उस से उम्र में 8-10 साल छोटे धर्मेंद्र गहलोत के साथ हुआ था. धर्मेंद्र प्रसिद्ध धर्मनगरी उज्जैन के देवास रोड पर अपनी पत्नी के साथ रहता था. पेशे से मांस व्यापारी इस युवक की जिंदगी सुकून से गुजर रही थी. अब से कोई 3 साल पहले वह दीपा से मिला था तो पहली नजर में ही उस पर फिदा हो गया था.

दीपा को देख कर धर्मेंद्र को यह तो समझ आ गया था कि वह शादीशुदा है. उस के गले में लटका मंगलसूत्र और मांग का सिंदूर उस के शादीशुदा होने की गवाही दे रहे थे.

उज्जैन का फ्रीगंज इलाका रिहायशी भी है और व्यावसायिक भी, इसलिए जो भी पहली दफा उज्जैन जाता है वह महाकाल और दूसरे मंदिरों के नामों के साथसाथ फ्रीगंज नाम के मोहल्ले से भी वाकिफ हो जाता है. शहर के लगभग बीचोंबीच बसे इस इलाके की रौनक देखते ही बनती है.

इसी इलाके में दीपा की साडि़यों पर फाल लगाने और पीको करने की छोटी सी दुकान थी, जिस से उसे ठीकठाक आमदनी हो जाती थी. करीब 3 साल पहले एक दिन धर्मेंद्र की पत्नी दीपा को अपनी साड़ी में फाल लगाने और पीको करने के लिए दे आई थी. उसे वहां से साड़ी लाने का टाइम नहीं मिल पा रहा था, इसलिए उस ने साड़ी लाने के लिए अपने पति धर्मेंद्र को भेज दिया. जब धर्मेंद्र दीपा की दुकान पर पहुंचा तो बेइंतहा खूबसूरत दीपा को देखता ही रह गया.

दीपा में कुछ बात तो थी, जो उसे देख धर्मेंद्र का दिल जोर से धड़कने लगा था. सामान्यत: बातचीत के बाद साड़ी ले कर जब उस ने दीपा को पैसे दिए तो उस की हथेली एक खास अंदाज में दबाने से वह खुद को रोक नहीं पाया.

धर्मेंद्र ने उस की हथेली दबा तो दी थी, लेकिन उसे इस बात का डर भी था कि कहीं दीपा इस बात का बुरा मान कर उसे झिड़क न दे.

दीपा ने इस हरकत पर कोई ऐतराज तो नहीं जताया बल्कि हंसते हुए यह जरूर कह दिया, ‘‘बड़े हिम्मत वाले हो जो पहली ही मुलाकात में हाथ दबा दिया.’’

इस जवाब से धर्मेंद्र का डर तो दूर हो गया पर दीपा के इस अप्रत्याशित जवाब से वह झेंप सा गया था. उसे यह समझ आ गया था कि अगर थोड़ी सी कोशिश की जाए तो यह खूबसूरत महिला जल्द ही उस के पहलू में आ जाएगी. कहने भर की बात है कि औरतें पहली नजर में मर्द की नीयत ताड़ जाती हैं पर यहां उलटा हुआ था. पहली ही नजर में धर्मेंद्र दीपा की नीयत ताड़ गया था.

धर्मेंद्र आया दीपा की जिंदगी में

दुकान से जातेजाते उस ने दीपा का मोबाइल नंबर ले लिया और उसे भी अपना नंबर दे दिया था. दीपा के हुस्न में खोए धर्मेंद्र को इस वक्त यह समझाने वाला कोई नहीं था कि वह कितनी बड़ी आफत को न्यौता दे रहा है. यही बात दीपा पर भी लागू हो रही थी, जो धर्मेंद्र के आकर्षक चेहरे और गठीले कसरती बदन पर मर मिटी थी.

जल्द ही दोनों के बीच मोबाइल पर लंबीलंबी बातें होने लगीं. ये बातें निहायत ही रोमांटिक होती थीं. जिस में यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि कौन किस को बहका और उकसा रहा है. दोनों शादीशुदा और खेलेखाए थे, इसलिए जल्द ही एकदूसरे से इतने खुल गए कि मिलने के लिए बेचैन रहने लगे.

सैक्सी बातें करतेकरते दोनों का सब्र जवाब देने लगा था. लेकिन पहल कौन करे, इस पर दोनों ही संकोच कर रहे थे. धर्मेंद्र ने पहल नहीं की तो एक दिन दीपा ने ही उसे फोन पर आमंत्रण भरा ताना मारा, ‘‘फोन पर ही सब कुछ करते रहोगे या फिर कभी मिलोगे भी.’’

बात अंधा क्या चाहे दो आंखें वाली थी. सो धर्मेंद्र ने मौका न गंवाते हुए कहा, ‘‘आ जाओ, आज ही मिलते हैं महाकाल मंदिर के पास.’’

इस मासूमियत पर दीपा जोर से हंस कर बोली, ‘‘मंदिर में क्या मुझ से भजन करवाना है. एक काम करो, तुम मेरे घर आ जाओ.’’ दीपा ने सिर्फ कहा ही नहीं बल्कि उसे अपने घर का पता भी दे दिया.

अब कहनेसुनने और सोचने को कुछ नहीं बचा था. धर्मेंद्र के तो मानो पर उग आए थे. वह बिना वक्त गंवाए दीपा के घर पहुंच गया, जहां वह सजसंवर कर उस का इंतजार कर रही थी. दरवाजा खुलते ही उस ने दीपा को देखा तो अपने होश खो बैठा. एक निहायत खूबसूरत महिला उस पर अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार थी. वह भी बगैर किसी मांग या खुदगर्जी के. यह खयाल ही धर्मेंद्र को और मर्द बनाए दे रहा था.

दरवाजा बंद होते ही दोनों एकदूसरे से कुछ इस तरह लिपटे कि लंबे वक्त तक अलग नहीं हुए और जब अलग हुए तो एक अलग दुनिया में थे, जहां भलाबुरा, नैतिकअनैतिक, जायजनाजायज कुछ नहीं होता. होती है तो बस एक जरूरत जो रहरह कर सिर उठाती है.

चोरीछिपे बनाए गए नाजायज संबंधों का लुत्फ ही कुछ अलग होता है, यह बात दीपा और धर्मेंद्र की हालत देख कर समझी जा सकती थी. जब भी दीपा का मन होता, वह धर्मेंद्र को फोन कर के बुला लेती थी.

कुछ महीनों बाद धर्मेंद्र ने दीपा की निजी जिंदगी में भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी. उसे हैरानी इस बात की थी कि कोई शादीशुदा औरत कैसे अपने पति के होते हुए उस की आंखों में धूल झोंक कर संबंध बना लेती है. इस दौरान धर्मेंद्र ने दीपा पर काफी पैसा लुटाया था.

दीपा का झूठ आया सामने

अपनी निजी जिंदगी से ताल्लुक रखते सवालों पर दीपा ज्यादा दिन खामोश नहीं रह पाई और उस ने आधी सच्ची और आधी झूठी कहानी धर्मेंद्र को यह बताई कि उस के पति का नाम दिलीप शर्मा है, जो नजदीक के गांव में खेती करते हैं और कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं. जाने क्यों धर्मेंद्र को दीपा झूठ बोलती लगी. अब उस के सामने दिक्कत यह थी कि वह अपनी मरजी या जरूरत के मुताबिक दीपा के पास नहीं जा सकता था क्योंकि उस का पति दिलीप कभी भी आ सकता था.

दीपा का बोला हुआ जो झूठ धर्मेंद्र के दिलोदिमाग में खटक रहा था, वह जल्द ही सामने आ गया. पता चला कि दिलीप शर्मा उस का असली पति नहीं है, बल्कि वह दिलीप की रखैल है, जिसे आजकल की भाषा में लिवइन कहा जाता है. यह खुलासा धर्मेंद्र के लिए एक तरह का झटका ही था, लेकिन जल्द ही इस का भी तोड़ निकल आया.

इस दिलचस्प तोड़ या समाधान को समझने के पहले दीपा की गुजरी जिंदगी जानना जरूरी है, जिसे देख कर कहा जा सकता है कि वह एक बदकिस्मत औरत थी. हालांकि इस बदकिस्मती की एक हद तक जिम्मेदार भी वही खुद थी.

उज्जैन के मशहूर काल भैरव मंदिर से हर कोई वाकिफ है क्योंकि वहां शराब का प्रसाद चढ़ता है. काल भैरव जाने वाला एक रास्ता जेल रोड कहलाता है, जहां जेल बनी हुई है. जेल अफसर भी यहां बनी कालोनी में रहते हैं. दीपा इसी जेल रोड की ज्ञान टेकरी के एक मामूली से परिवार में पैदा हुई थी.

कुदरत ने दीपा पर मेहरबान होते हुए उसे गजब की खूबसूरती बख्शी थी. उसे एक ऐसा रंगरूप मिला था, जिसे पाने के लिए तमाम महिलाएं तरसती हैं.

दीपा ने किशोरावस्था में कदम रखा ही था कि उस के दीवाने भंवरों की तरह ज्ञान टेकरी और जेल रोड पर मंडराने लगे थे. खूबसूरत होने के साथसाथ दीपा अल्हड़ भी थे, इसलिए मांबाप और चिंतित रहने लगे थे. दीपा के 2 छोटे भाई भी घर में थे. लड़की मांबाप की इज्जत समझी जाती है. इस से पहले कि बेटी की वजह से मांबाप की इज्जत पर कोई आंच आए, मांबाप उस की शादी के लिए लड़का ढूंढने लगे.

अभी दीपा की उम्र महज 14 साल थी. मांबाप ने उस की शादी के लिए देवास जिले के गांव जलालखेड़ी में एक लड़का देख लिया, जिस का नाम राकेश वर्मा था. बात पक्की हो जाने पर उन्होंने राकेश वर्मा से दीपा की शादी कर दी. वह दीपा से 5 साल बड़ा था.

शादी के बाद राकेश की रातें गुलजार हो उठीं. वह दिनरात पत्नी के खिलते यौवन में डूबा रहता था. आमतौर पर भले ही शादी कम उम्र में हो जाए, फिर भी युवक जिम्मेदारी उठानी सीख जाते हैं. लेकिन राकेश के साथ उलटा हुआ. वह दिनरात बिस्तर पर पड़ा दीपा के जिस्म से खेला करता था.

शुरूशुरू में तो राकेश के घर वालों ने यह सोच कर कुछ नहीं कहा कि अभी बच्चा है, जब घरगृहस्थी के माने समझने लगेगा तो रास्ते पर आ जाएगा. लेकिन जब 5-6 साल गुजर गए और राकेश ने खुद कमानेखाने की कोई पहल नहीं की तो घर वाले उसे टोकने लगे.

सुधरने के बजाय राकेश और बिगड़ता चला गया और जल्द ही उसे शराब की लत लग गई. वह रोज शराब पीने लगा था. घर वालों ने उसे घर से तो नहीं निकाला लेकिन घर में ही रखते हुए उस का बहिष्कार सा कर दिया.

चारों तरफ से हैरानपरेशान राकेश अपनी नाकामी और निकम्मेपन की खीझ दीपा पर उतारने लगा. दीपा के जिस संगमरमरी जिस्म को सहलातेचूमते वह कभी थकता नहीं था, उस पर अब राकेश की पिटाई के निशान बनने लगे. दीपा भी कम हैरानपरेशान नहीं थी, पर उस के पास रोज की इस मारपिटाई से बचने का एक ही रास्ता था मायका, क्योंकि राकेश अब उस पर चरित्रहीनता का आरोप भी लगाने लगा था.

10 साल यानी 24 साल की उम्र तक दीपा पति के पास रही, फिर एक दिन अपने मायके आ गई. जिस से दीपा के मांबाप के सिर पर बोझ और बढ़ गया था. लेकिन थोड़ा सुकून उन्हें उस वक्त मिला, जब दीपा ने फ्रीगंज में साड़ी पर फाल लगाने और पीको करने की दुकान खोल ली.

दुकान चल निकली तो दीपा खुद के खर्चे उठाने लगी. पर जैसे ही लोगों को यह पता चला कि वह पति को छोड़ कर मायके में रह रही है तो फिर उस के दीवाने दुकान और घर के आसपास मंडराने लगे.

दिलीप बन गया पार्टटाइम पति

शुरुआत में उस ने कोशिश की कि वह किसी के चक्कर में न पड़े, लेकिन शरीर की मांग के आगे वह बेबस थी. कई लोगों ने प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष तरीके से उसे प्रपोज किया, लेकिन अब तक दीपा काफी सयानी और समझदार हो चुकी थी.

दीपा को एक ऐसे पुरुष की जरूरत थी, जो शारीरिक के साथसाथ भावनात्मक और आर्थिक सहारा और सुरक्षा भी दे सके. आसपास मंडराते लोगों को देख वह समझ जाती थी कि उन का मकसद क्या है.

इसी ऊहापोह में उलझी दीपा की मुलाकात एक दिन दिलीप शर्मा से हुई तो वह उसे हर तरह उपयुक्त लगा. शादीशुदा दिलीप दीपा की खूबसूरती और अदाओं पर मर मिटा था. उस की पत्नी गांव में रहती थी, इसलिए उज्जैन में किसी महिला से मिलनेजुलने पर उसे कोई अड़ंगा या पाबंदी नहीं थी.

दोनों की मेलमुलाकातें बड़े सधे ढंग से आगे बढ़ीं. दोनों ने एकदूसरे की जरूरतों को समझा और दोनों के बीच मौखिक अनुबंध यह हुआ कि दिलीप दीपा का पूरा खर्च उठाएगा, उसे अलग घर दिलाएगा और ज्यादा से ज्यादा वक्त भी देगा. एवज में दीपा उस के लिए हर तरह से समर्पित रहेगी.

दिलीप ने दीपा को किराए के मकान में शिफ्ट करा कर घरगृहस्थी का सारा सामान जुटा दिया और पार्टटाइम पति की हैसियत से रहने भी लगा. दिलीप के पास पैसों की कमी नहीं थी. वह उन लोगों में से था, जो एक पत्नी गांव में और एक शहर में रखना अफोर्ड कर सकते हैं. दीपा के साथ दूसरा फायदा उसे यह था कि उस से उस की पारिवारिक और सामाजिक जिंदगी और प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आ रही थी.

लिवइन के ये 8 साल अच्छे से कटे, लेकिन जैसा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में होता है, इन दोनों के साथ भी हुआ. दिलीप का दिल दीपा से भरने लगा तो उस ने उस के पास आनाजाना कम कर दिया. पर अपने इस वादे पर वह कायम रहा कि जिंदगी भर दीपा का खर्च उठाएगा.

दीपा समझ रही थी कि प्रेमी का मन उस से भर चला है लेकिन अभी पूरी तरह उचटा नहीं है. पर दिक्क्त यह थी कि 14 साल की उम्र से ही सैक्स की आदी हो जाने के कारण वह अकसर रोजाना ही सैक्स चाहती थी, जो दिलीप के लिए संभव नहीं था.

इसी साल जनवरी में दिलीप ने उसे माधवनगर इलाके के वल्लभनगर में किराए के मकान में शिफ्ट कर दिया. मकान मालिक लक्ष्मणदास पमनानी को उस ने यही बताया कि दीपा उस की पत्नी है और वह खेतीबाड़ी के सिलसिले में गांव जाता रहता है. पर पड़ोसियों का माथा उस वक्त ठनका, जब कई अंजान युवक दीपा के पास दिलीप की गैरमौजूदगी में आनेजाने लगे. आजकल बिना वजह कोई किसी के फटे में टांग नहीं अड़ाना चाहता, इसलिए लोगों ने दीपा से कहा कुछ नहीं, बस देखते रहते.

दिलीप को इस बात की भनक थी, इसलिए उस ने दीपा को समझाया कि वह फालतू लोगों का अपने यहां आनाजाना बंद करे. लेकिन दीपा नहीं मानी. दिलीप ने भी उस से कोई जबरदस्ती नहीं की. दिलीप को अब दीपा से ज्यादा अपनी इज्जत की चिंता होने लगी थी.

ये सारी बातें जब धर्मेंद्र को पता चलीं तो वह बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं तिलमिलाया. दिलीप दीपा का पति नहीं है, यह जान कर उसे खुशी ही हुई. हैरतअंगेज तरीके से जल्द ही धर्मेंद्र और दिलीप में दोस्ती हो गई और दोनों दीपा के साथ बैठ कर दारूचिकन की दावत उड़ाने लगे.

अब दीपा 2 आशिकों की हो गई थी, जो उसे ले कर बजाय आपस में झगड़ने के उसे साझा कर रहे थे. पर वह यह नहीं समझ पा रही थी कि दोनों उस के शरीर और जवानी को भोग रहे हैं. दोनों में से कोई उसे प्यार नहीं करता. धर्मेंद्र और दिलीप को सहूलियत यह थी कि दीपा अब किसी एक पर भार नहीं थी.

2 प्रेमियों की रखैल की तरह रह रही दीपा का भी इन से मन भरने लगा तो उस ने और भी आशिकों को घर आने की छूट दे दी. जिस पर दिलीप को तो नहीं पर धर्मेंद्र को जरूर ऐतराज हुआ. यह ऐतराज जायज था या नाजायज, यह तय कर पाना तो मुश्किल है. लेकिन यह एक भयानक हादसे यानी कत्ल की वारदात के रूप में बीती 18 मई को सामने आया तो पूरा उज्जैन दहल सा गया.

दीपा के पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र पवार जब 18 मई, 2018 की सुबह करीब 8 बजे छत पर पहुंचे तो यह देख घबरा गए कि बगल में रहने वाली दीपा के घर से धुआं निकल रहा है. किसी अनहोनी की आशंका से घबराए जितेंद्र ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को फोन कर इस की सूचना दी.

चंद मिनटों बाद ही पुलिस और दमकलकर्मी वल्लभनगर पहुंच गए. दमकलकर्मियों ने जैसेतैसे आग पर काबू पाया. इस के बाद पुलिस अंदर दाखिल हुई.

पुलिस वाले यह देख दहल गए कि रसोई में एक जवान महिला की अर्धनग्न लाश औंधी पड़ी थी. लाश के ऊपर मोटे गद्दों के साथ अधजली दरी भी पड़ी थी. लाश दीपा की ही थी. उस के दोनों हाथों की नसें कटी हुई थीं और गरदन पर धारदार हथियार के निशान भी थे. दीवारों और दरवाजों पर भी खून के निशान थे. साफ दिख रहा था कि मामला बेरहमी से की गई हत्या का है.

बेरहमी से की गई हत्या

माधवनगर थाने के इंचार्ज गगन बादल ने तुरंत इस जघन्य हत्या की खबर एसपी सचिन अतुलकर और एफएसएल अधिकारी डा. प्रीति गायकवाड़ को दी. मामला गंभीर था, इसलिए ये दोनों भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

घटनास्थल के मुआयने में दिखा कि पूरा घर अस्तव्यस्त था और बैडरूम का दरवाजा टूटा पड़ा था. सब से अजीब और चौंका देने वाली बात यह थी कि दीपा की लाश के पैरों के बीच एलपीजी सिलेंडर की नली घुसी हुई थी. हत्या की ऐसी वारदात पुलिस वालों ने पहली बार देखी थी. लाश 90 फीसदी जली हुई थी.

तुरंत लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. 3 डाक्टरों एल.के. तिवारी, अजय दिवाकर और रेखा की टीम ने उस का पोस्टमार्टम कर अपनी रिपोर्ट में कहा कि दीपा को जिंदा जलाया गया है. ऐसा क्यों किया गया, यह हत्यारा ही बता सकता था.

अड़ोसपड़ोस में पूछताछ करने पर पता चला कि मृतका दीपा वर्मा दिलीप की पत्नी थी. सचिन अतुलकर ने जांच के लिए माधवनगर थाने के टीआई गगन बादल के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच के आदेश दे दिए. टीम में एसआई बी.एस. मंडलोई, संजय राजपूत, हैडकांस्टेबल सुरेंद्र सिंह के अलावा साइबर सेल की तेजतर्रार इंसपेक्टर दीपिका शिंदे को शामिल किया गया.

पूछताछ में दिलीप का नाम सामने आया. मकान मालिक ने भी अपने बयान में बताया कि जनवरी में उन्होंने मकान दिलीप को किराए पर दिया था. दीपिका शिंदे ने सब से पहले दिलीप की गरदन पकड़ी तो उस ने अपने और दीपा के संबंधों का सच उगलते हुए खुद के हत्यारे होने या हत्या में लिप्त होने से साफ इनकार कर दिया. दीपा के दोनों भाई बहन की लाश पर आंसू बहाने आए. उन्होंने भी दिलीप पर आरोप लगाया कि वह आए दिन दीपा के साथ मारपीट करता था.

दिलीप ने पुलिस को बताया कि उस की गैरमौजूदगी में कई युवक दीपा से मिलने आते रहते थे. उस के इन प्रेमियों में एक नाम धर्मेंद्र का भी था. जांच करतेकरते शाम हो चली थी. पुलिस टीम आधी रात के करीब धर्मेंद्र के घर पहुंची तो वह घबरा उठा. इंसपेक्टर दीपिका शिंदे ने जब धर्मेंद्र पर नजर डाली तो उस के हाथ पर घाव दिखे. वह तुरंत समझ गईं कि दीपा का हत्यारा उन के सामने खड़ा है.

दीपिका शिंदे ने सीधा सवाल यह दागा, ‘तूने दीपा की हत्या क्यों की?’ तो बजाय इधरउधर की बातें करने या खुद का बचाव करने के उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

अपने बयान में हत्या की वजह का खुलासा करते हुए धर्मेंद्र ने बताया कि उसे दिलीप से कोई ऐतराज नहीं था, लेकिन उसे दूसरे लड़कों से उस की दोस्ती और शारीरिक संबंध मंजूर नहीं थे.

आखिर प्रेमी से ही मौत मिली दीपा को

हादसे के हफ्ते भर पहले ही धर्मेंद्र की पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया था, इसलिए उस के साथ वह सो नहीं सकता था. जिस्म की तलब लगी तो उस ने दीपा को फोन किया. पहले तो दीपा ने मना कर दिया लेकिन उस के बारबार कहने पर वह राजी हो गई.

तय यह हुआ कि रात को एंजौय करने के पहले दोनों पार्टी करेंगे. इस बाबत शाम को धर्मेंद्र और दीपा बाजार गए और रात के जश्न के लिए शराब और चिकन खरीदा. बाजार में घूमने के दौरान ही दीपा के पास किसी का फोन आया था, जिसे उस ने कुछ हिचकते हुए रिसीव किया था.

फोन करतेकरते उस ने कहा था कि आज नहीं क्योंकि उस का पति आया हुआ है. दीपा पर शक तो धर्मेंद्र को पहले से ही था, इसलिए उस ने उस से छिप कर दिलीप को फोन किया तो पता चला कि वह तो गांव में है. इस झूठ पर वह तिलमिला उठा. शक पैदा करने वाली दूसरी बात दीपा का जरूरत से ज्यादा शराब और चिकन खरीदना भी था.

शक में मूड खराब होने पर धर्मेंद्र घर चला गया. इसी शक के मारे उस के तनबदन में आग लग रही थी. दीपा उसे अब बेवफा और बदचलन लगने लगी थी. कुछ सोचते हुए वह दीपा की सच्चाई जानने के लिए आधी रात को उस के घर पहुंच गया.

गया तो वह दीपा के साथ मौजमस्ती करने के इरादे से था लेकिन जब उसे यह पता चला कि उस के पैसे से लाई शराब और गोश्त से दीपा 2 दूसरे लड़कों रवि और मनोहर उर्फ कुक्कू के साथ पार्टी कर चुकी है तो उस का खून खौल उठा.

इस बात पर दोनों में खूब झगड़ा हुआ और फिर धर्मेंद्र ने दीपा की हत्या कर दी. जब इन दोनों का झगड़ा शुरू हुआ था तब कुक्कू बाहर ही छिपा था, लेकिन हत्या के पहले भाग गया था. जिसे पुलिस ने सरकारी गवाह बना लिया. चंद घंटों में ही कातिल को पकड़ लेने पर एसपी सचिन अतुलकर ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाई.

दीपा अब इस दुनिया में नहीं है और धर्मेंद्र जेल में है. दिलीप पहले की तरह जिंदगी जी रहा है पर दीपा की मौत कई सवाल छोड़ गई है कि आखिरकार उस की गलती क्या थी? शराबी और निकम्मे पति ने उसे छोड़ दिया था तो दूसरी गलती मांबाप ने कम उम्र में उस की शादी कर के पहले ही कर दी थी.

तनहाई की मारी दीपा एक से दूसरे मर्द की बाहों में झूलती हुई मारी गई तो इस की जिम्मेदार भी वही थी. अगर वह धर्मेंद्र और दूसरे लड़कों के पीछे नहीं भागती तो शायद बच जाती. लेकिन यह चिंता भी उसे सता रही होगी कि दिलीप और धर्मेंद्र कब तक उस का खर्चा उठाएंगे. इसलिए उस ने नए लड़कों से संबंध बनाए, जिन का अंजाम इस तरह सामने आया.