फिल्म हो या कोई टीवी सीरियल, उसे बनाने में सैकड़ों लोगों की मेहनत लगती है. इन में पुरुष भी होते हैं, महिलाएं भी. दोनों में ही अच्छेबुरे लोग होते हैं. चूंकि शोबिज की दुनिया में ग्लैमर की डिमांड पहले नंबर पर होती है, इसलिए उस के प्रति सभी का आकर्षण स्वाभाविक ही है. ग्लैमर की इस दुनिया में तरहतरह के लालच दे कर जहां पुरुष लड़कियों व महिलाओं का लाभ उठाते हैं, वहीं लड़कियां या महिलाएं भी अपनी खूबसूरती को ढाल बना कर पुरुषों का लाभ उठाने में पीछे नहीं रहतीं.

यह अलग बात है कि वे अपने मकसद में कामयाब हो पाती हैं या नहीं. लेकिन यह भी सच है कि कामयाबी के लिए खूबसूरती ही नहीं, टैलेंट भी जरूरी है. जबकि कई लड़कियां अपनी खूबसूरती को ही टैलेंट का पैमाना मान बैठती हैं.

फिल्म इंडस्ट्री और टीवी इंडस्ट्री में तमाम ऐसे मामले हुए हैं, जिन में निर्मातानिर्देशक द्वारा रोल न दिए जाने या वाजिब कारणों की वजह से बीच में निकाल दिए जाने पर लड़कियां यौनशोषण का आरोप लगा देती हैं, ताकि निर्मातानिर्देशक पर दबाव बनाया जा सके. कुछ मामलों में तो बात पुलिस और कोर्टकचहरी तक भी पहुंची. जानेमाने फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था. साफसुथरी छवि वाले शादीशुदा मधुर भंडारकर की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान है.

‘चांदनी बार’, ‘पेज थ्री’, ‘कारपोरेट’, ‘ट्रैफिक सिगनल’, ‘फैशन’ और ‘दिल तो बच्चा है जी’ जैसी चर्चित फिल्में बना चुके मधुर सामाजिक विद्रूपता वाली अलग तरह की फिल्में बनाने के लिए मशहूर हैं. ‘ट्रैफिक सिगनल’ के लिए तो उन्हें बतौर निर्देशक, लेखक और स्क्रीनप्ले राइटर नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है.

सन 2001 में आई बहुत कम बजट की फिल्म ‘चांदनी बार’ जब सुपरहिट हो गई तो निर्देशक मधुर भंडारकर का नाम रातोंरात नामचीन हस्तियों में शामिल हो गया. जून, 2004 में मधुर भंडारकर निर्देशित फिल्म ‘आन’ रिलीज हो चुकी थी. यह बड़े बजट की फिल्म थी, जिस में अक्षय कुमार, रवीना टंडन, सुनील शेट्टी, शत्रुघ्न सिन्हा, जैकी श्रौफ, परेश रावल, इरफान खान और लारा दत्ता जैसे बड़े स्टार थे. इस फिल्म के रिलीज होने से पहले ही मधुर भंडारकर ने अपनी अगली फिल्म ‘पेज थ्री’ की शूटिंग शुरू कर दी थी, जो कालांतर में एक नया इतिहास रचने वाली थी.crime news

15/16 जुलाई, 2004 की रात को भंडारकर ने ‘पेज थ्री’ की शूटिंग की थी. सुबह घर आ कर वह सो गए थे. उन्होंने सोचा भी नहीं था कि एक ऐसा विस्फोट होने जा रहा है, जो उन की नींद ही नहीं, चैन तक हराम कर देगा. 16 जुलाई की दोपहर को प्रीति जैन नाम की एक मौडल ने पत्रकारों, खासकर न्यूज चैनलों के रिपोर्टर्स को बुला कर एक प्रैस कौन्फ्रैंस की, जिस में उस ने मधुर भंडारकर पर यौनशोषण, धोखाधड़ी और धमकी देने के आरोप लगाए.

दोपहर के 2 बजे के बुलेटिन में जब यह समाचार चल रहा था, तब मधुर भंडारकर सो रहे थे. टीवी पर समाचार देख कर उन के एक दोस्त ने फोन कर के उन्हें यह बात बताई तो वह हड़बड़ी में उठे. उन्हें यह मामला तब अतिगंभीर लगा, जब उन्होंने अपने मोबाइल पर आई 75 मिस्ड काल्स देखीं.

उधर उसी दिन प्रीति ने थाना वरसोवा जा कर मधुर भंडारकर के खिलाफ बलात्कार, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगा कर रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने यह मामला भादंवि की धारा 376/506 के अंतर्गत दर्ज कर लिया.

प्रीति का कहना था कि मधुर भंडारकर ने सन 1999 से 2004 के बीच उस के साथ 16 बार यौन संबंध बनाए. प्रमाण के रूप में उस ने पुलिस को अपने मोबाइल से मधुर भंडारकर के मोबाइल पर भेजे गए 14 एसएमएस का ब्यौरा भी दिया. उस ने ये एसएमएस 23 दिसंबर, 2003 से 17 अप्रैल, 2004 के बीच भेजे थे. भंडारकर ने 1-2 मैसेज को छोड़ कर उस के किसी मैसेज का जवाब नहीं दिया था. यह देश का शायद पहला ऐसा मामला था, जिस में एसएमएस को प्रमाण के रूप में पेश किया था.

यहां यह स्पष्ट कर दें कि प्रीति जैन द्वारा भंडारकर को भेजे गए एसएमएस में बात करने के लिए कहने और कुछ मजबूरी तो कुछ धमकी भरे अंदाज में उन की फिल्म में काम मांगने के अलावा कोई खास बात नहीं थी. बहरहाल, प्रीति ने मधुर भंडारकर पर जो आरोप लगाए थे, वे काफी गंभीर थे.

इसी के मद्देनजर मधुर भंडारकर अगले ही दिन अपने मित्र फिल्म निर्मातानिर्देशक अशोक पंडित को साथ ले कर अपने वकीलों श्रीकांत शिवड़े और गिरीश कुलकर्णी से मिले. उन के वकीलों ने मधुर के खिलाफ वरसोवा थाने में दर्ज केस का हवाला दे कर तत्काल अग्रिम जमानत के कागजात तैयार किए और मुख्य दंडाधिकारी आर.आर. वाच्छा की अदालत में अपील लगा दी.

दोनों वकीलों ने अदालत के सामने दलील दी कि मधुर भंडारकर जानेमाने निर्देशक हैं, फिल्मों में काम करने की इच्छुक तमाम लड़कियां उन से मिलने आती हैं. प्रीति जैन भी उन से मिली होगी. मधुर उस के लिए कुछ नहीं कर पाए होंगे, इसलिए उस ने उन पर दबाव बनाने के लिए उन के विरुद्ध झूठा केस दर्ज करा दिया, ताकि वह फिल्म में काम देने को मजबूर हो जाएं.crime news

हालांकि अभियोजन पक्ष के वकील ने अपनी अलग दलील दी, लेकिन न्यायाधीश ने 20 हजार के मुचलके पर मधुर भंडारकर को अग्रिम जमानत दे दी, साथ ही आदेश भी दिया कि वह नियमित वरसोवा थाने जाएं और जांच में पुलिस को सहयोग करें. अदालत ने उन के मुंबई से बाहर जाने पर भी पाबंदी लगा दी.

दरअसल, मधुर भंडारकर को इस मामले में अग्रिम जमानत इतनी आसानी से इसलिए मिल गई थी, क्योंकि प्रीति जैन ने मुकदमा दर्ज कराने और गंभीर आरोप लगाने से पहले मधुर भंडारकर को कानूनी नोटिस भेज कर धमकी दी थी कि अगर वह उसे अपनी फिल्म में नहीं लेते तो वह उन के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराएगी.

इसी को आधार बना कर मधुर के वकीलों ने अदालत के सामने दलील दी थी कि प्रीति जैन और मधुर के बीच शारीरिक संबंध तो हो सकते हैं, पर यह बलात्कार का मामला कतई नहीं है. क्योंकि स्वतंत्र रूप से रहने वाली किसी लड़की को डराधमका कर 5 सालों तक बलात्कार नहीं किया जा सकता.

यहां थोड़ा प्रीति जैन के बारे में बता देना जरूरी है. 25 वर्षीया प्रीति जैन उस समय मुंबई में यारी रोड, वरसोवा स्थित एक सोसायटी के फ्लैट में अपने सेवानिवृत्त पिता के साथ रह रही थी. दिल्ली निवासी उस के पिता भारतीय विदेश सेवा से रिटायर हुए थे. अपने सेवाकाल में वह इजिप्ट, स्विटजरलैंड, बेल्जियम, पाकिस्तान और यूके में रह चुके थे. प्रीति का जन्म इजिप्ट में हुआ था. उस ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी.

महत्त्वाकांक्षी प्रीति फिल्मों में जाना चाहती थी, इसलिए पिता के साथ मुंबई आ गई थी. मुंबई में एकदो फिल्मों में छोटीमोटी भूमिकाएं करने के साथसाथ उस ने मौडलिंग भी की. फिल्मों में काम करने के सिलसिले में ही वह मधुर भंडारकर से मिली थी.

बहरहाल, प्रीति जैन और मधुर भंडारकर का यह केस जांच के बाद चार्जशीट लग कर अदालत तक पहुंच गया. लंबी सुनवाई के बाद सन 2007 में अदालत ने मधुर भंडारकर को इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया. इस के बावजूद प्रीति चुप नहीं बैठी. उस ने अपने आरोपों के साथ अंधेरी स्थित सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 2 साल की सुनवाई के बाद सन 2009 में सत्र न्यायालय ने मधुर भंडारकर को आरोप मुक्त करने को गलत ठहराया और पुलिस को इस मामले में दोबारा गहनता से जांच करने को कहा, साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि प्रीति जैन ने जो सबूत दिए हैं, उन्हीं के आधार पर मधुर भंडारकर के खिलाफ बलात्कार का केस चलाया जाए.

मधुर भंडारकर ने कोर्ट के आदेश के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट की शरण ली. लेकिन यहां यह मामला उलटा पड़ा. मतलब हाईकोट्र ने सत्र न्यायालय के निर्णय को सही माना. कोई और रास्ता न देख मधुर भंडारकर इस निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय गए. लंबी अवधि के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सन 2012 में इस केस के सभी आरोपों को खारिज कर दिया.

यह तो था मधुर और प्रीति के पहले केस का सच. लेकिन इस बीच प्रीति ने एक और विवाद खड़ा कर लिया था, जिस का अलग से मुकदमा चल रहा था, वह भी प्रीति के खिलाफ. दरअसल, मधुर के खिलाफ दर्ज कराए गए केस में मनचाही सफलता न मिलते देख प्रीति जैन ने सन 2005 में मधुर भंडारकर के खिलाफ एक कुचक्र और रचा. यह कुचक्र था मधुर भंडारकर को मरवाने का. इस के लिए उस ने गैंगस्टर अरुण गवली गैंग के बदमाशों को 75 हजार रुपए की सुपारी दी थी.

उस की यह हकीकत भी बड़े नाटकीय अंदाज में सामने आई. हुआ यह कि 3 अगस्त, 2005 को अखिल भारतीय सेना पार्टी के वकील महेंद्र बागवे ने प्रीति जैन के खिलाफ थाना अग्रीपाड़ा में एक प्रकरण दर्ज कराया.

इस प्रकरण के अनुसार, 2 अगस्त, 2005 को प्रीति जैन दगड़ी चाल स्थित अखिल भारतीय सेना के औफिस में गई और वहां मौजूद कार्यकर्ता अनिल तावड़े से नरेश परदेशी के बारे में पूछा. जब वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने बताया कि वहां कोई नरेश परदेशी नहीं है तो उस ने गुस्से में कहा, ‘‘ऐसा कैसे हो सकता है. मैं ने उसे 75 हजार रुपए दिए हैं.’’

दगड़ी चाल में माफिया सरगना, नेता  और अखिल भारतीय सेना पार्टी के संयोजक अरुण गवली का औफिस है. औफिस में मौजूद कार्यकर्ताओं ने प्रीति जैन को बैठा कर विस्तार से सारी बात बताने को कहा तो प्रीति ने बताया कि उस ने नरेश परदेशी को फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर को मरवाने के लिए 75 हजार रुपए की सुपारी दी थी. लेकिन उस ने अभी तक यह काम नहीं किया है. कार्यकताओं ने प्रीति जैन को समझाबुझा कर वापस भेज दिया और अगले दिन वकील महेंद्र बागवे के माध्यम से थाना अग्रीपाड़ा में रिपोर्ट दर्ज करा दी.

मधुर भंडारकर का नाम जुड़ने से यह मामला हाईप्रोफाइल हो गया. पुलिस ने इस केस को प्रीति जैन के खिलाफ भादंवि की धारा 115 (जान से मरवाने की कोशिश), 120बी (अपराध का षडयंत्र रचना) के तहत दर्ज कर लिया. इस मामले की जांच का काम इंसपेक्टर कृष्णा यमाने को सौंपा गया.

कृष्णा यमाने ने अपनी पुलिस टीम के साथ भायखला के अग्रीपाड़ा इलाके में स्थित बी.जे. मार्ग पर बनी शिवनेरी बिल्डिंग के मकान से नरेश परदेशी को हिरासत में ले लिया. नरेश परदेशी से वहीं पर पूछताछ की गई, साथ ही उस के घर की तलाशी भी ली गई. नतीजतन यह बात साफ हो गई कि वह अखिल भारतीय सेना का सक्रिय सदस्य था. 6 मई, 2005 को उसे अखिल भारतीय सेना की ओर से वर्ली के वार्ड नंबर 58 का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. नरेश परदेशी के घर से एक हथियार भी मिला.

अग्रीपाड़ा थाने में नरेश परदेशी से गहन पूछताछ की गई तो उस ने मान लिया कि प्रीति जैन ने उसे मधुर भंडारकर को मारने के लिए 75 हजार रुपए की सुपारी दी थी. उन पैसों से उस ने कुछ सामान खरीदा था और बाकी खानेपीने में उड़ा दिए थे. उस का बयान दर्ज करने के बाद अग्रीपाड़ा पुलिस ने बिना कोई देर किए उसी दिन शाम को 4 बज कर 45 मिनट पर प्रीति जैन के मोबाइल पर फोन कर के उसे थाने आने को कहा. प्रीति जैन आ गई. उसे हिरासत में ले कर पूछताछ की गई तो उस ने मान लिया कि मधुर भंडारकर को मरवाने के लिए उस ने नरेश परदेशी को 75 हजार रुपए की सुपारी दी थी.crime news

इंसपेक्टर कृष्णा यमाने जानते थे कि यह हाईप्रोफाइल मामला है. इसलिए गहनता से जांच जरूरी है. केस में मुख्य आरोपी प्रीति जैन थी. स्थितियों के हिसाब से उस के फ्लैट की तलाशी जरूरी थी. इसलिए उन्होंने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से बात की. अधिकारियों ने उन्हें प्रीति के फ्लैट की तलाशी लेने की इजाजत दे दी. इस के बाद पुलिस प्रीति को सरकारी जिप्सी में बैठा कर वरसोवा, अंधेरी में यारी रोड स्थित 7 बंगला की गंगाजमुना सोसायटी के उस के फ्लैट पर ले गई.

पुलिस ने उस के फ्लैट की तलाशी ली तो वहां से एक बुरका, कुछ कैसेट्स, निर्मातानिर्देशक अशोक पंडित की तसवीरें, मधुर भंडारकर केस से जुड़े कुछ महत्त्वपूर्ण पेपर और प्रीति के हस्तलिखित कुछ दस्तावेज बरामद हुए. उस के फ्लैट से कुछ आपत्तिजनक चीजें भी बरामद हुई थीं. पुलिस ने प्रीति का मोबाइल भी अपने कब्जे में ले लिया. उस में मधुर भंडारकर सहित इस मामले से जुड़े कई लोगों के फोन नंबर थे.

प्रीति को ले कर पुलिस थाना अग्रीपाड़ा लौट आई. उस के सामने फिर नरेश परदेशी से पूछताछ की गई. नरेश परदेशी पुलिस को उनउन जगहों पर ले गया, जहांजहां वह प्रीति से मिला था और जहांजहां वह उसे साथ ले गई थी.

प्रीति जैन से पूछताछ में वरसोवा के उस साइबर कैफे का भी पता चला, जहां बैठ कर वह चैटिंग किया करती थी. पुलिस उस पौइंट ब्राउजिंग साइबर कैफे में गई और जांच के लिए सीपीयू और एक प्रिंटर अपने साथ ले आई. इन दोनों चीजों को जांच के लिए आंध्र प्रदेश की विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया गया.

सरिता विशेष

पुलिस ने प्रीति और नरेश परदेशी को अदालत पर पेश किया, जहां से प्रीति को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, जबकि नरेश परदेशी को पुलिस ने रिमांड पर ले लिया. रिमांड अवधि में की गई पूछताछ में उस ने बताया कि मधुर भंडारकर की हत्या के लिए हथियार शिवराम दास ने दिलवाया था. शिवराम दास 7 रास्ता स्थित गोपालनगर झोपड़पट्टी में रहता था. पुलिस ने उस के घर जा कर उसे हिरासत में ले लिया. पूछताछ में शिवराम दास ने बताया कि वह हथियार उस ने और नरेश परदेशी ने सतीश मोहिते को दिया था.

बहरहाल, पुलिस ने सतीश मोहिते को हिरासत में ले कर पूछताछ की. उस ने बताया कि वह हथियार दीपक थेऊर के पास रखा है. पुलिस सतीश मोहिते को ले कर दीपक थेऊर के घर जाने के लिए निकली. दीपक जब वर्ली के दमकल विभाग के पास वाली झुग्गी बस्ती की ओर जा रहा था, तभी पुलिस ने सतीश की निशानदेही पर उसे पकड़ लिया. दीपक की निशानदेही पर पुलिस ने एक देशी कट्टा और 4 कारतूस बरामद किए. पुलिस उन दोनों को थाने ले आई. पूछताछ में दीपक ने भी स्वीकार किया कि वह भी इस साजिश में शामिल था. पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों को अदालत पर पेश कर के जेल भेज दिया.

नरेश परदेशी के बताने पर पुलिस ने 1 अक्तूबर, 2005 को गुफरान इब्राहीम शेख उर्फ समीर को पकड़ा. गुफरान ने ही लखनऊ के रहने वाले राममिलन नाई से देशी कट्टा खरीद कर नरेश परदेशी को दिया था. गुफरान से पूछताछ के बाद पुलिस ने लखनऊ जा कर राममिलन को भी गिरफ्तार कर लिया.

इस पूरे प्रकरण पर डीसीपी आशुतोष डुंबरे और डीसीपी प्रदीप सावंत बराबर नजर जमाए हुए थे. आरोपियों से कई बार उन के सामने ही पूछताछ की गई थी. वैसे भी सारा काम उन के ही दिशानिर्देश पर हो रहा था. गुफरान शेख से पूछताछ में पता चला कि वे लोग प्रीति जैन और नरेश परदेशी के कहने पर कई दिनों तक मधुर भंडारकर के खार स्थित घर हरिभवन के आसपास छिप कर नजर रख रहे थे.

प्रीति ने नरेश परदेशी को मधुर की 2 कारों के नंबर दिए थे, जिन में एक कार का नंबर एमएच04सीडी 8027 था और दूसरी का एमएच04सीडी 2213. भंडारकर जिस कार से निकलते थे, ये लोग उस का पीछा कर के पता लगाते थे कि वह कहांकहां जाते हैं, किसकिस से मिलते हैं और अपने औफिस कितने बजे पहुंचते हैं. दरअसल, ये सारी जानकारियां एकत्र कर के नरेश परदेशी के लोग कोई ऐसा सौफ्ट टारगेट ढूंढ रहे थे, जहां मधुर भंडारकर को आसानी से गोली मार कर भागा जा सके. लेकिन वे लोग अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके.

बहरहाल, अग्रीपाड़ा पुलिस ने इस मामले की जांच बड़ी गहराई से की. इस केस में पुलिस ने 51 गवाह बनाए. जांच के बाद इंसपेक्टर कृष्णा यमाने ने चार्जशीट तैयार कर के अदालत में पेश कर दी. मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट की कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद यह केस जिला एवं सत्र न्यायाधीश में न्यायाधीश एस.एस. भोसले की अदालत में पहुंचा. वहां भी इस केस की लंबी सुनवाई हुई.

इस बीच केस के सभी अभियुक्त जमानत पर रहे. अंतत: न्यायाधीश एस.एस. भोसले ने 28 अप्रैल, 2017 को अपना फैसला सुनाया. अपने फैसले में उन्होंने मधुर भंडारकर को जान से मारने का षडयंत्र रचने के आरोप में प्रीति जैन और गैंगस्टर अरुण गवली के गुर्गे नरेश परदेशी को 3 साल की सजा सुनाई, साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपए का जुरमाना भी लगाया गया. जबकि नरेश परदेशी के साथी शिवराम दास को 2 साल की सजा के साथसाथ 10 हजार रुपए जुरमाना भरने की सजा मिली. बाकी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया.

न्यायाधीश ने प्रीति जैन, नरेश परदेशी और शिवराम दास को 15 हजार के मुचलकों पर जमानत दे दी, ताकि वे इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकें. इस के लिए उन्हें 4 सप्ताह का समय दिया गया.

यह अपनी तरह का अलग मामला है, जिस में अपने आप को पीडि़त बताने वाली महिला दोषी पाई गई. भले ही यह उस से जुड़ा दूसरा मामला था. इस पूरे चक्कर में प्रीति जैन का कैरियर भी चौपट हो गया.

(लेखक : रविंद्र शिवाजी दुपारगुड़े/के. रवि)

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