फिल्म हो या कोई टीवी सीरियल, उसे बनाने में सैकड़ों लोगों की मेहनत लगती है. इन में पुरुष भी होते हैं, महिलाएं भी. दोनों में ही अच्छेबुरे लोग होते हैं. चूंकि शोबिज की दुनिया में ग्लैमर की डिमांड पहले नंबर पर होती है, इसलिए उस के प्रति सभी का आकर्षण स्वाभाविक ही है. ग्लैमर की इस दुनिया में तरहतरह के लालच दे कर जहां पुरुष लड़कियों व महिलाओं का लाभ उठाते हैं, वहीं लड़कियां या महिलाएं भी अपनी खूबसूरती को ढाल बना कर पुरुषों का लाभ उठाने में पीछे नहीं रहतीं.

यह अलग बात है कि वे अपने मकसद में कामयाब हो पाती हैं या नहीं. लेकिन यह भी सच है कि कामयाबी के लिए खूबसूरती ही नहीं, टैलेंट भी जरूरी है. जबकि कई लड़कियां अपनी खूबसूरती को ही टैलेंट का पैमाना मान बैठती हैं.

फिल्म इंडस्ट्री और टीवी इंडस्ट्री में तमाम ऐसे मामले हुए हैं, जिन में निर्मातानिर्देशक द्वारा रोल न दिए जाने या वाजिब कारणों की वजह से बीच में निकाल दिए जाने पर लड़कियां यौनशोषण का आरोप लगा देती हैं, ताकि निर्मातानिर्देशक पर दबाव बनाया जा सके. कुछ मामलों में तो बात पुलिस और कोर्टकचहरी तक भी पहुंची. जानेमाने फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था. साफसुथरी छवि वाले शादीशुदा मधुर भंडारकर की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान है.

‘चांदनी बार’, ‘पेज थ्री’, ‘कारपोरेट’, ‘ट्रैफिक सिगनल’, ‘फैशन’ और ‘दिल तो बच्चा है जी’ जैसी चर्चित फिल्में बना चुके मधुर सामाजिक विद्रूपता वाली अलग तरह की फिल्में बनाने के लिए मशहूर हैं. ‘ट्रैफिक सिगनल’ के लिए तो उन्हें बतौर निर्देशक, लेखक और स्क्रीनप्ले राइटर नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है.

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