वैसे तो देश भर में हजारों लोग डेंगू के डंक का खामियाजा भुगत रहे हैं, पर जब स्वच्छ भारत अभियान की ब्रांड एम्बेसडर विद्या बालन खुद डेंगू का शिकार हो जाती हैं, तो बात सुर्खियों में आ जाती है. इंटरनेशनल लेवल पर इस बात की चर्चा हो रही है जब श्रीलंका जैसे देश मच्छर मुक्त हो सकते हैं, तो भारत क्यों नहीं?

डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी तमाम कई बीमारियां गंदगी से होती हैं, क्योंकि इस गंदगी और जलभराव वाली जगहों पर ही मच्छर पैदा होते हैं. मच्छरों से होने वाली बीमारियां देश में सबसे अधिक रोग का कारण बन रही हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके में दिमागी बुखार से सैकड़ों लोग मरते हैं. केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और कोर्ट तक मामले को संज्ञान में लिये हैं, इसके बाद भी इस दिशा में कोई सुधार नहीं हो रहा. केवल अस्पताल बना देने से बीमारी की समस्या का समाधान नहीं होने वाला.

अस्पतालों में आने वाले मरीजों की बीमारियों को देखें तो पता चलता है कि 80 फीसदी बीमारियों की वजह गंदगी और पीने के लिये साफ पानी का न होने है. विश्व भर में सेहत के लिये काम कर रहे लोग भारत को श्रीलंका जैसे छोटे से देश से सबक सीखने की सीख दे रहे हैं. श्रीलंका जैसे देश मच्छरों को दूर कर मलेरिया मुक्त हो गये है.

दूसरी तरफ भारत जैसे देश में मच्छर खत्म होने के बजाये बढ़ते जा रहे हैं. कुछ साल पहले तक डेंगू से मरने वालों की संख्या काफी कम थी. इस साल यह संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी है. डेंगू एक जानलेवा बीमारी हो गई है. हालात इतने खराब हैं कि सरकारी अस्पतालों में मरीजो को भर्ती करने के लिये बेड खाली नहीं हैं. प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू का इलाज इतना मंहगा हो गया है कि आम जनता इसे सहन नहीं कर पाती.

भारत में साफसफाई, सेहत रोजगार की बातें कभी चुनावी मुद्दा नहीं बनती. इस वजह से सरकारें इस ओर ध्यान नहीं देती. अस्पताल खोलने से काम नहीं चलने वाला. बीमारी फैलाने की वजहे खत्म हो तभी सेहत के मसले सुधरेंगे.