सामाजिक

अंधविश्वास ही अंधविश्वास

12 December 2016

चाहे कोई भी हो, यह मानने को कतई तैयार नहीं है कि वह अंधविश्वासी है. किसी को गाली देने से जैसे कोई शख्स दुखी और गुस्सा हो जाता है, वैसे ही किसी को अंधविश्वासी कहने से भी वह गुस्सा हो जाता है. अंधविश्वासी कहलाना कोई भी नहीं चाहता, पर अंधविश्वास हैं क्या क्या, यही उन्हें पता नहीं होता.

हालांकि यह सभी मानने को तैयार हैं कि अंधविश्वास और सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक बुराइयां, परंपरा, रस्मोरिवाज हमारी तरक्की में बहुत बड़ी रुकावट हैं.

देश में ‘अर्जक संघ’ समेत कई ऐसे संगठन हैं, जो अंधविश्वास के साथसाथ समाज में फैली बुराइयों को खत्म करने में जुटे हैं.

हम यहां कुछ अंधविश्वासों, परंपराओं व बुराइयों की ओर आप का ध्यान खींच रहे हैं:

* सुबह उठते ही अपनी दोनों हथेलियां देखना.

* अगर कोई काम नहीं हो सका, तो यह कहना कि न जाने हम किस का मुंह देख कर उठे थे.

* नहाधो कर सुबह एक लोटा पानी सूरज की ओर गिराना और कान ऐंठ कर प्रणाम करना.

* सुबहसवेरे नहाधो कर तुलसी के पौधे में पानी डालना.

* तथाकथित धर्मग्रंथ का पाठ कर के खुद और अपने परिवार का समय बरबाद करना.

* दिन के मुताबिक रंगीन कपड़ों को पहनना, भोजन करना वगैरह.

* घर के दरवाजे पर पुरानी चप्पल या जूता, सूप, नीबू, मिर्च वगैरह टांगना.

* बाहर निकलते समय घर के लोगों को दही, चीनी खाने को कहना और माथे पर टीका करना.

* बाहर निकलते समय अगर तेली जाति का शख्स दिख जाए, तो अशुभ मानना.

* अगर कोई छींक दे, तो अशुभ मान कर रुक जाना.

* रास्ते में अगर आगे से कोई बिल्ली चली जाए, तो वहीं रुक जाना.

* अगर बच्चा या कोई शख्स बीमार पड़ जाए, तो झाड़फूंक कराना.

* किसी को सांपबिच्छू काट ले, तो झाड़फूंक कराना.

* हाथ में गंडातावीज बांधना और काला टीका करना.

* बच्चे के जन्म के बाद उस के पास लोहे की चीज रखना.

* नवजात बच्चे को किसी को इसलिए नहीं दिखाना कि कहीं नजर न लग जाए.

* बच्चे के हाथपैर, कमर में काला धागा बांधना या काला टीका लगाना.

* जन्म के बाद किसी ब्राह्मण को बुला कर पत्री दिखाना और उस के कहने पर कर्मकांड करना.

* नाम रखने के लिए ब्राह्मण पर आश्रित रहना.

* पढ़ने की शुरुआत किसी खास दिन से करना और पुरोहित से पूछ कर स्कूल भेजना.

* कहीं बाहर जाने से पहले ब्राह्मण से पत्री दिखाना और उसी के मुताबिक चलना.

* नए घर जाने से पहले ब्राह्मण से पूछ कर तारीख तय करना.

* शादी के पहले ब्राह्मण से दिन दिखाना और उसी से शादी या श्राद्ध कराना.

* कोई भी कर्मकांड करने या त्योहार के बाद ब्राह्मण को दान देना.

* त्योहार के नाम पर पत्थर, मिट्टी की मूर्ति के सामने गिड़गिड़ाना.

* किसी चमत्कार के बाद उस की वजह को ढूंढ़ने के बजाय ईश्वरीय शक्ति मान बैठना.

* अपनी गरीबी, जोरजुल्म से लड़ने के बजाय तकदीर में लिखा है कह कर चुप बैठ जाना.

* शरीर से ठीकठाक होने के बावजूद घरघर घूमते साधुमहात्मा के नाम पर लोगों को दान देना.

* शादी के समय काला कपड़ा नहीं पहनना.

* शादी के समय किसी विधवा को नहीं रहने देना.

* मरने के बाद कर्मकांड करना, सिर मुंड़वाना, ब्रह्मभोज करना, दान देना.

* सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण लगने पर भोजन नहीं करना और ब्राह्मण को दान देना.

* वास्तुशास्त्र के मुताबिक ही मकान बनवाना.

* ज्योतिष से हाथ दिखाना, भविष्यफल देखना और उस के बताए उपाय करना.

* रविवार को हल नहीं चलाना.

* देवीदेवता की पूजा किए बगैर धान नहीं रोपना.

और भी ऐसी कई बातें हैं, जो अंधविश्वास मानी जाती हैं. लेकिन हैं बिलकुल अधार्मिक बातें.

हमें वैज्ञानिक सोच पैदा करने की जरूरत है, ताकि जिंदगी में तरक्की के रास्ते पर चल सकें. इस से एक फायदा यह भी होगा कि जो बगैर मेहनत किए अपना पेट पाल रहा है, वह मेहनत की अहमियत समझ कर और ज्यादा मेहनत करने लगेगा. देश और समाज तरक्की की ओर बढ़ सकेगा.

इन सब प्रपंचों से धर्म के दुकानदारों को पैसा मिलता है, जो चाहे मंदिरों, चर्चों, मसजिदों में इस्तेमाल हो या दूसरों का सिर फोड़ने के काम आए. अंधविश्वास सीधे पंडों की जेबों से जुड़े हैं.

लेखक : उपेंद्र कुमार       

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