‘हाय, मेरा नाम रानी है. मैं 19 साल की हूं और इंदौर में अकेली रहती हूं. क्या आप मेरे साथ सैक्स करना चाहेंगे? मेरा मोबाइल नंबर है 975519××××…’

हालांकि यह सब अंगरेजी में लिखा था, लेकिन मध्य प्रदेश के शाजापुर में रहने वाले 26 साला जितेंद्र रघुवंशी (बदला नाम) को पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि वह 12वीं जमात पास था. नजदीक के एक गांव से शाजापुर आ कर बस गए इस नौजवान ने एक साल पहले स्मार्टफोन खरीदा था. मालदार किसान परिवार का होने की वजह से जितेंद्र को पैसों की कमी नहीं थी, इसलिए अपनी खादबीज की दुकान पर बैठाबैठा वह कालगर्ल ढूंढ़ने लगा और ढूंढ़ा तो हैरान रह गया. उसे ऐसा लगा, मानो इस दुनिया में ऐसी लड़कियों के अलावा कुछ है ही नहीं, जो कुछ हजार रुपयों के एवज में अपना जिस्म बेचती हैं और बाकायदा फोटो समेत इश्तिहार भी करती हैं. उन्हें अपना फोन नंबर देने में कोई हिचक नहीं होती और किसी का डर भी नहीं लगता.

आखिरकार हिम्मत कर के जितेंद्र ने दिए गए नंबर पर फोन किया, तो दूसरी तरफ से उम्मीद के मुताबिक एक लड़की की ही आवाज आई.

‘हैलो, कहिए?’ वह लड़की बोली, तो जितेंद्र सकपका गया और हड़बड़ाहट में बोला, ‘‘मैं ने इंटरनैट पर देखा, तो सोचा…’’

‘सोचा क्या, आ ही जाइए. रानी आप की खिदमत में हाजिर है. 2 घंटे के 2 हजार और पूरी रात के 20 हजार रुपए चार्ज है. बताइए, कब और कहां मिलूं? आप जैसे चाहें मेरे साथ सैक्स कर सकते हैं. मैं बहुत ऐक्सपर्ट हूं.’

जितेंद्र अचानक मिली इस दावत से घबरा सा उठा और बोला, ‘‘मैं कल फोन करूंगा…’’

‘ओके स्वीटहार्ट, जब मरजी हो बता देना. रानी हमेशा तुम्हारी खिदमत में हाजिर मिलेगी. जैसे चाहोगे वैसे सैक्स करेगी और जन्नत का मजा देगी.’ फोन काट कर जितेंद्र गटागट 3 गिलास पानी पी गया और कुछ देर बाद रानी की मीठी बातों के जाल से निकला, तो उसे समझ आया कि कहीं कोई फर्जीवाड़ा या खतरा नहीं है, बस एक बार बात कर के इंदौर जाने की देर है, फिर तो मजे ही मजे हैं. जितेंद्र ने जैसेतैसे 3 दिन काटे, फिर उसी नंबर पर फोन किया, तो उसी लड़की की आवाज आई, ‘बड़ी देर कर दी जानेमन, बोलो…’

‘‘कहां मिलोगी?’’ जितेंद्र ने पूछा.

‘जहां तुम कहो…’ वहां से मधुर आवाज आई.

‘‘कल दोपहर 12 बजे मिलो, सरवटे बसस्टैंड पर.’’

‘ओके, मैं… कौफी हाउस में बैठी मिलूंगी, गुलाबी रंग के सूट में रहूंगी.’ अगले दिन जितेंद्र इंदौर जा पहुंचा और रानी के बताए कौफी हाउस में पहुंचा, तो देख कर हैरान रह गया कि सचमुच कोने वाली सीट पर गुलाबी सूट पहने एक खूबसूरत सी लड़की कोल्ड कौफी की चुसकियां ले रही थी. जितेंद्र उस से मुखातिब हो पाता, उस के पहले ही उस ने उंगलियों से इशारा कर उसे बुलाया. जाहिर है कि वह अपने ग्राहक को पहचान गई थी. जितेंद्र उस के सामने जा कर बैठ गया और बातचीत करने लगा.

रानी 2 घंटे के 2 हजार रुपए ही लेगी. जगह उस की रहेगी, पर कौफी हाउस में खिलानेपिलाने, आटोरिकशा वगैरह के सारे खर्च वह खुद उठाएगा.

‘‘ठीक है,’’ जितेंद्र उस के उभारों पर से नजर हटाते हुए थूक निगल कर बोला.

‘‘तभी इतने नर्वस हो रहे हो. चलो, रास्ते में बीयर या ह्विस्की कुछ ले लेते हैं. दोनों साथ बैठ कर पीएंगे, तो ज्यादा मजा आएगा और तुम्हारी यह ख्वाहिश भी पूरी हो जाएगी,’’ रानी बोली.

ऐसा हुआ भी. बसस्टैंड से आटोरिकशा कर के जितेंद्र रानी के साथ वहां से तकरीबन 16 किलोमीटर दूर एक बड़े अपार्टमैंट्स के उस के फ्लैट पर पहुंचा. वहां कोई नहीं था. अंदर दाखिल होते ही रानी ने दरवाजा बंद किया और बोली, ‘‘चलो, हो जाओ शुरू…’’

‘‘पर बीयर तो ले ही नहीं पाए,’’ जितेंद्र ने कहा.

‘‘सब है यहां, बस पैसे तुम देना…’’ फ्रिज से बीयर की बोतलें और गिलास निकालते हुए रानी ने शोख आवाज में जवाब दिया. 2 घंटे बाद जितेंद्र उसे पैसे दे कर उस फ्लैट से बाहर निकला, तो उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे. वाकई रानी ने उसे मजा दिया था. हालांकि शराब के एक हजार रुपए अलग से रखवा लिए थे. जितेंद्र को इस का कोई मलाल नहीं था. 2 घंटे के दौरान किसी ने कोई दखल नहीं दिया था. रानी ने अपना फोन बंद कर लिया था और जितेंद्र का भी बंद करा दिया था, लेकिन जाते समय उस ने जितेंद्र को अपना पर्सनल नंबर दे दिया था कि फिर कभी मूड हो तो इस नंबर पर ही फोन करना. जितेंद्र ने अलगअलग फोन नंबरों के घालमेल से ज्यादा सिर नहीं खपाया और इस के बाद 2 बार और इंदौर गया, तो रानी से उस के पर्सनल नंबर पर बात कर सीधे उस के फ्लैट पर जा पहुंचा और जम कर मौजमस्ती की.

स्मार्टफोन ने बदला चलन

अब तकरीबन हर हाथ में स्मार्टफोन है, जिस में हर तरह की जानकारियां बहुत सस्ते में मिल जाती हैं. कालगर्ल की जानकारी भी इन में से एक है. स्मार्टफोन आने से पहले देह का कारोबार पुराने तरीके से चलता था. इंदौर की ही मिसाल लें, तो वहां का बंबई बाजार कभी देह धंधे के लिए जाना जाता था. वहां कोठे थे. जितेंद्र की तरह लोग आते थे, लेकिन मनपसंद कालगर्ल ढूंढ़ने में उन्हें परेशानी होती थी. 2-4 कोठों पर धक्के खाने के बाद या तो मनपसंद कालगर्ल ग्राहक को मिल जाती थी या थकहार कर ग्राहक ही किसी को अपनी पसंद बना लेता था. लेकिन बंबई बाजार जैसी बदनाम जगहों का माहौल लोगों को रास नहीं आता था. शराब की बदबू होती थी. खिड़की और दरवाजों से झांकती लड़कियां भद्दे इशारे कर के ग्राहकों को बुलाती थीं. कई दफा तो हाथ पकड़ कर अंदर खींच लेती थीं. उन की ज्यादतियों से बचने के लिए ग्राहक दलाल का सहारा लेते थे. स्मार्टफोन ने देह धंधे के इस चलन में भारी बदलाव कर दिए हैं. अब दलाल भी कालगर्लों की तरह हाईफाई हो गए हैं. बंबई बाजार टुकड़ेटुकड़े हो कर पूरे इंदौर में चारों तरफ फैल गया है. हर चौथे अपार्टमैंट्स में एक रानी है. जब किसी जितेंद्र का फोन आता है, तो वह मेकअप कर के तैयार हो जाती है. जानपहचान वाला न हो, तो जगह तय कर लेने भी पहुंच जाती है. लेकिन दलाल किसी को नजर नहीं आता.

पहली दफा जितेंद्र ने जिस नंबर पर फोन किया था, वह एजेंट का था. इस फोन नंबर पर शिफ्ट में लड़कियां बैठती हैं और ग्राहक से सैक्सी बातें करती हैं. ग्राहक का नंबर ले कर वे अपने पास रखी लिस्ट या फोन बुक में से किसी एक कालगर्ल का नंबर देख कर उसे बताती है. वह फ्री होती है, तो बातचीत का ब्योरा ग्राहक को दे दिया जाता है और तगड़ा कमीशन ले लिया जाता है. यह ऐस्कौर्ट सर्विस देश के हर बड़े शहर में मौजूद है. भोपाल में ऐस्कौर्ट सर्विस से जुड़े एक मुलाजिम ने बताया कि स्मार्टफोन वालों के लिए उन की एजेंसी इंटरनैट पर तमाम जानकारियां डालती है. वे कई नामों से वैबसाइट बनाते और चलाते हैं. उन्हें देख कर ग्राहक बातचीत करते हैं, तो अपने आसपास की किसी कालगर्ल को उस का नंबर दे देते हैं.

उस मुलाजिम के मुताबिक, अभी उन की लिस्ट में तकरीबन 2 हजार लड़कियों के नाम हैं, जिन में होस्टल में रह रही छात्राएं भी शामिल हैं. कुछ घरेलू औरतें भी हैं, लेकिन ज्यादातर पेशेवर कालगर्ल हैं. उस दलाल के मुताबिक, आजकल लड़कियों के पास खुद की जगह रहती है. इस में खतरा कम रहता है, क्योंकि वे रिहायशी इलाकों में रहती हैं. लेकिन पड़ोसी हल्ला मचाने लगें और पुलिस वालों की नजर उन पर पड़ जाए, तो वे अपना ठिकाना बदल लेती हैं. उस दलाल की मानें, तो ज्यादातर लड़कियां ग्राहक से सीधे बात करने लगती हैं, तो नुकसान दलाल का होता है, क्योंकि उन्हें जमाने में दलाल का बड़ा हाथ रहता है. शुरू में दलाल उन्हें प्यार से ऊंचनीच समझाते हैं. अगर वे नहीं मानतीं, तो एकाध दफा गुंडे या पुलिस वालों के हाथों फंसवा देते हैं. उस के बाद वे कभी झंझट नहीं करती हैं. इस से हर बार दलाल को कमीशन मिलता रहता है. हालफिलहाल तो भोपाल जैसे शहरों में भी ऐस्कौर्ट सर्विस वाले 5-6 लाख रुपए हर महीना कमा रहे हैं, जो 8-10 मुलाजिमों के बीच बंट जाता है. सभी को काम और ओहदे के मुताबिक तनख्वाह मिलती है.

कंप्यूटर पर साइट्स बनाने और लोड करने वाले इंजीनियर को 15-20 हजार रुपए, स्मार्टफोन पर बात करने वाली कालगर्ल को 10-12 हजार और कारोबार को बढ़ाने वाली मुलाजिमों को 20-25 हजार रुपए महीना तनख्वाह मिलती है. सब से बड़ा हिस्सा बौस की जेब में तकरीबन 3 लाख रुपए जाता है.

घाटे में पुलिस वाले

स्मार्टफोन पर देह धंधे के चलन से बड़ा नुकसान पुलिस वालों का हुआ है. अब तो इन के मुखबिर भी नहीं बता पाते हैं कि कौन कहां धंधा कर रहा है. अब तो कालगर्लें भी कहने लगी हैं कि वे बालिग हैं, किसी के साथ हमबिस्तरी करें, यह मरजी की बात है. लिहाजा, पुलिस वाले कसमसा कर रह जाते हैं. जबरदस्ती करें, तो बेवजह हल्ला मचता है. गिरोह बना कर इंटरनैट पर इस कारोबार को बढ़ावा दे रही ऐस्कौर्ट एजेंसियां भी पुलिस की पकड़ और पहुंच से दूर हैं. वे भी अपना पताठिकाना और फोन नंबर बदलती रहती हैं. सीधेसीधे कहा जाए, तो अब हो यह रहा है कि जितेंद्र जैसे ग्राहक स्मार्टफोन पर ऐसी एजेंसी को ढूंढ़ते हैं और बगैर किसी सिरदर्द के अपनी ख्वाहिश और जरूरत पूरी कर लेते हैं. हालांकि इस से उन का खर्च बढ़ा है, लेकिन इज्जत बनी रहती है और हिफाजत की भी गारंटी रहती है. अब कालगर्लों के पास ग्राहक के नामपते और फोन नंबर वाली डायरी नहीं होती. स्मार्टफोन की फोन बुक होती है, जिस में पासवर्ड डाल दो, तो कोई दूसरा इस को नहीं खोल सकता.

ग्राहक भी फायदे में हैं. जितेंद्र जैसे ग्राहकों को ब्लू फिल्में, सीधे कालगर्ल से चैटिंग और अब वीडियो चैटिंग की सहूलियत, जब भी जोश दिलाती है, तो वे भागते हैं किसी रानी की तरफ, जो उन्हें संतुष्ट करने में माहिर होती है.  

मर्द भी मिलते हैं

स्मार्टफोन अब औरतें भी खूब इस्तेमाल करती हैं. लिहाजा, ‘पुरुष वेश्याओं’ की भी मांग बढ़ रही है. ऐस्कौर्ट सर्विस के कर्ताधर्ता अपनी इंटरनैट साइट पर बिकाऊ मर्दों की जानकारी और फोन नंबर भी डालने लगे हैं, जिस से सैक्स की जरूरतमंद औरतें फोन कर के अपनी जिस्मानी भूख मिटा सकती हैं.

ऐस्कौर्ट सर्विस के एक दलाल के मुताबिक, मर्दों के दाम औरतों से ज्यादा होते हैं. वजह, उन की मांग ऊंचे तबकों की औरतों में ज्यादा है. उम्रदराज कुंआरियां, विधवाएं और पति द्वारा छोड़ दी गई औरतों के अलावा पति से नाखुश औरतें भी ऐसे मर्दों की सर्विस लेती हैं. उन्हें 5 हजार रुपए आसानी से मिल जाते हैं. अगर औरत को उन के मुताबिक खुश कर दें, तो 5 के 50 हजार रुपए भी झटक लेते हैं.

सोशल साइटों पर यह धंधा खूब फलफूल रहा है. विदिशा, मध्य प्रदेश के नजदीक गंजबासौदा कसबे का एक बेरोजगार नौजवान एस. कुमार बताता है कि उस ने फर्जी नाम से फेसबुक पर अकाउंट खोला और यह मैसेज डालना शुरू कर दिया कि जो भाभियां, आंटियां अपने पतियों से संतुष्ट नहीं होतीं, वे उस से बात कर सकती हैं. यह नौजवान फेसबुक में चुनचुन कर उम्रदराज औरतों को फ्रैंड रिक्वैस्ट मैसेज कर अपना फोन नंबर दे देता है.

देखते ही देखते उस की कई फ्रैंड बन गईं और इनबौक्स में जा कर सैक्सी बातें करने लगीं. कुछ ने उसे बुलाया भी. इस नौजवान ने हालांकि अभी 50-60 हजार रुपए ही इस धंधे से कमाए हैं, लेकिन वह स्मार्टफोन का शुक्रगुजार रहता है कि इस की वजह से उसे पैसा मिल रहा है और मजा भी.

अपना एक किस्सा सुनाते हुए वह कहता है कि गुना की एक सरकारी स्कूल की टीचर ने उस से दोस्ती की और बताया कि उस का पति ढीला है. अगर तुम गुना आ कर सैक्स करो, तो मैं आनेजाने का खर्च और 2 हजार रुपए दूंगी. वह नौजवान वहां गया और उसे संतुष्ट कर आया.

ब्लू फिल्मों का खजाना

स्मार्टफोन का इस्तेमाल देह धंधे से ज्यादा ब्लू फिल्में और अश्लील साइटें देखने में हो रहा है. ‘अंतरवासना’ इस में सब से ज्यादा देखी और पढ़ी जाने वाली साइट है. इस साइट पर सैक्सी कहानियां होती हैं, जिन की मस्तराम छाप नीलीपीली किताबें 30 रुपए से सौ रुपए तक में बिका करती थीं, पर ‘अंतरवासना’ की एक और खूबी यह है कि रोज 2-3 कहानियां अपलोड होती हैं. यह साइट दावा करती है कि कहानियां पाठकों की खुद की लिखी होती हैं. इसी में हमबिस्तरी वाले वीडियो भी भरे पड़े हैं. आज से तकरीबन 15 साल पहले तक सिनेमाघर वाले पहले शो में दक्षिण भारत की फिल्में दिखाते थे, तो उन में 15-20 मिनट का एक टुकड़ा ब्लू फिल्म का भी जोड़ देते थे, जिस पर खूब हल्ला मचता था. अकसर आबकारी महकमा छापा मार कर दर्शकों की नाक में दम कर देता था और सिनेमा मालिक को ऐसी फिल्में चलाने पर भारीभरकम घूस देनी पड़ती थी.

अब तो ‘सविता भाभी डौट कौम’ जैसी दर्जनों साइटें ये नजारे आसानी से दिखा रही हैं, वह भी सिर्फ 250 रुपए महीने में. गांवदेहातों में इन साइटों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यहां के लोग मनपसंद गोरी देशीविदेशी कालगर्ल को देख कर सैक्स की अपनी जिस्मानी भूख मिटा रहे हैं. मिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, कन्नड़ वगैरह भाषाओं में भी ऐसी फिल्मों की डबिंग की जाती है.  

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