सरिता विशेष

कुछ साल पहले की बात है. जयपुर, राजस्थान के प्रताप नगर हाउसिंग बोर्ड में रहने वाली प्रियंका तुनकमिजाज थी. वह अपने पिता के दोमंजिला मकान की ऊपरी मंजिल में किराए पर रह कर पढ़ाई करने वाली लड़कियों से बेवजह ही अपना मकान खाली करवा लेती थी. एक दिन प्रियंका एमबीए कर रही एक 22 साला नेहा से इतनी ज्यादा नाराज हुई कि उस ने उस के दूसरे दिन ही कमरा खाली करने को कह दिया.

यह सुन कर नेहा गिड़गिड़ाते हुए उस से बोली, ‘‘दीदी, इन दिनों मेरे इम्तिहान चल रहे हैं. इतनी जल्दी मैं कमरा कैसे खाली कर सकती हूं ’’ यह सुनते ही प्रियंका आगबबूला हो गई. वह तुनकते हुए बोली, ‘‘नेहा, मेरा नेचर  सलमान खान की तरह है. एक बार मैं ने जो कह दिया, उस के बाद मैं अपने दिल की भी नहीं सुनती.’’

झल्लाई नेहा प्रियंका से बोली,  ‘‘कल आप को भी अगर किसी के मकान में किराए पर रहना पड़ जाए, तब समझ में आएगा.’’ प्रियंका ने नेहा की किसी बात पर ध्यान नहीं दे कर दूसरे दिन ही उस से अपना कमरा खाली करवा लिया. कुछ महीने बाद प्रियंका के बड़े भाई की शादी हुई. ससुर ने शादी के कुछ दिनों बाद ही अपनी बेटी को दहेज के लिए परेशान करने का आरोप लगा कर उन के खिलाफ मामला दर्ज कराने की धमकी देना शुरू कर दिया.

इन धमकियों से परेशान हो कर प्रियंका के परिवार वालों ने ऊपरी मंजिल का मकान बेच कर उन्हें रकम दे कर उन से अपना पीछा छुड़ाया. अब प्रियंका और उस का परिवार किराए के मकान में रहता है. अब वह नेहा की उस बात को समझ चुकी है कि भविष्य का कुछ पता नहीं है कि वह कब किस से क्या करवा दे. 50 साला वीरेंद्र सिंह का एक स्कूल था. वे खूबसूरत लड़कियों को ही अपने यहां नौकरी पर रखते थे और जब चाहे तब उन्हें अपने यहां पर बुलवा कर

उन का यौन शोषण करते रहते थे. जो लड़की ऐसा करने से इनकार करती थी, वे उसे नौकरी से हटाने की धमकी दे देते थे. एक दिन एक लड़की ने उन से कहा, ‘‘अगर कभी कोई आप की बेटी के साथ यह सब करने की धमकी दे तो… ’’

‘‘मुझे ऐसी धमकी कोई नहीं दे सकता,’’ कह कर उन्होंने उस लड़की का मुंह बंद कर दिया.

कुछ सालों के बाद वीरेंद्र सिंह के स्कूल में एक ऐसा घोटाला पकड़ा गया कि उसे रफादफा कराने के लिए उन्हें न सिर्फ लाखों रुपए देने पड़े, बल्कि अपनी बेटियों को भी सरकारी अफसरों के साथ भेजना पड़ा.

एक तहसीलदार दिनरात शराब पी कर ऐयाशी करता था. वह अपने चपरासियों को बरखास्त कराने की धमकी दे कर उन की बहनबेटियों और बीवियों को भी आएदिन अपनी हवस का शिकार बनाता था. एक बार वह तहसीलदार विभागीय जांच में इतनी बुरी तरह फंस गया कि उस की नौकरी भी खतरे में पड़ गई. उस जांच से बचने के लिए उस तहसीलदार ने लाखों रुपए दे कर जैसेतैसे अपनी नौकरी बचाई थी. बाद में उसे एड्स की बीमारी हो गई थी. काफी इलाज के बाद भी वह तड़पतड़प कर मर गया.

कहने का मतलब यह है कि कभी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिस से किसी को कोई परेशानी हो, क्योंकि जिंदगी का कुछ पता नहीं है कि वह हम से कब क्या करवा दे.