नेपाल के सुदूर पश्चिमांचल में राप्ती क्षेत्र के दांग गांव की नीरमाया. उसे उस का पति प्रेम दूसरे बच्चे के पैदा होने के समय गर्भावस्था में ही छोड़ कर कोरिया में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में ड्राइवर का काम करने चला गया. घर की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण नीरमाया ने विदेश में काम दिलाने वाले एजेंट विष्णु थापा से विदेश में घर का काम करने, बच्चे की देखभाल करने का काम दिलवाने के लिए कहा.

नीरमाया को लगा कि विदेश में काम करने पर अच्छे पैसे मिलेंगे. एजेंट विष्णु थापा ने नीरमाया को नेपाली 25 हजार रुपए में काम दिलाने का वादा किया. बदले में सऊदी अरब जाने का टिकट लेने और 2 लाख रुपए कमीशन के रूप में विदेश भेजने के एवज में नीरमाया से मांगा. नीरमाया ने कर्ज ले कर 1 लाख रुपया विष्णु थापा को दिया, बाकी पैसे के लिए उस ने विदेश से भिजवाने की बात कही.

नीरमाया शेख के 6 साल के बच्चे की देखभाल के लिए सऊदी अरब चली गई. 19 साल की नीरमाया गोरी, सुंदर थी. 2-3 महीने तक वह ठीक से काम करती रही. शेख के यहां से समय पर पैसे मिल जाते. नीरमाया उन पैसों को नेपाल में अपने गांव दांग में वैस्टर्न यूनियन बैंक के मारफत भिजवा देती. नीरमाया ने 1 लाख रुपया एडवांस ले कर विष्णु थापा को भी भिजवा दिया.

एक दिन अरब शेख की पत्नी घर पर नहीं थी. शेख ने नीरमाया के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बना लिया. फिर तो नीरमाया शेख के दोस्तों के साथ रोज ही हमबिस्तर होने लगी. बदले में उसे लगभग रोज ही 5-7 हजार नेपाली रुपए मिल जाते थे. रोजरोज सहवास करतेकरते वह थक जाती. अरेबियन लोग नएनए तरीके से, अप्राकृतिकरूप से नीरमाया के साथ सैक्स करते जो कि नीरमाया को ठीक नहीं लगता. नीरमाया न चाहते हुए भी सैक्स के धंधे में उतर गई. नीरमाया ने धीरेधीरे तकरीबन 10 लाख नेपाली रुपए जोड़ लिए थे. नीरमाया का शेख से 5 साल का अनुबंध था.

नीरमाया बीमार भी रहने लगी. अरब मालकिन को नीरमाया ने भरोसा दिलाया कि उसे कुछ महीनों के लिए नेपाल भेज दिया जाए. वह अपने साथ कम उम्र की लड़की ले कर आएगी. नीरमाया को पता था कि यदि वह उन लोगों को झांसा नहीं देगी तो उसे नेपाल नहीं भेजा जाएगा. उस का पासपोर्ट मालिक के पास ही था. नीरमाया नेपाल में अपने गांव दांग वापस आ गई.

नीरमाया दोबारा सऊदी अरब नहीं गई. सब्जी की दुकान खोल कर नीरमाया अपनी आजीविका चला रही है. अपने दोनों बच्चों को दांग गांव के अच्छे स्कूल में पढ़ा रही है.

वेश्यावृत्ति का जाल

नीरमाया ने बताया कि सऊदी अरब में नेपाली लड़कियां काफी पसंद की जाती हैं. पहले उन्हें घरेलू काम के लिए बुलाया जाता है, फिर उन्हें धीरेधीरे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता है. इन लड़कियों से धंधा शेख अपने ही घर में करवाते हैं.

पिछले साल दिल्ली पुलिस की स्पैशल सैल को आईबी के द्वारा सूचना मिली कि नौकरी की आड़ में नेपाली युवतियों को वेश्यावृत्ति के लिए खाड़ी देशों में भेजा जा रहा है.

पुलिस ने ऐक्शन लिया और वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों की तस्करी कर के उन्हें खाड़ी देशों में भेजने वाले 3 नेपाली नागरिकों के साथ एक असामी युवक को भी गिरफ्तार कर लिया.

स्पैशल सैल के एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल सरकार द्वारा गल्फ देशों में नेपाली महिलाओं को नौकरी करने के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसलिए नेपाली एजेंट भारत के रास्ते नेपाली युवतियों को खाड़ी देशों में घरों में काम कराने के साथसाथ उन्हीं युवतियों से वहां वेश्यावृत्ति करवाते हैं. ये एजेंट नेपाली युवतियों से विदेश में नौकरी दिलवाने के नाम पर तरकीबन ढाई लाख नेपाली रुपए वसूलते हैं. इन एजेंटों को पता होता है कि वहां युवतियों का पासपोर्ट मालिक अपने पास रख लेता है. ऐसे में इन्हें अरब शेखों के साथ जिस्मफरोशी करनी ही होगी.

नेपाल के झापा की 13 साल की तोमागिरी, मातापिता की ऐक्सिडैंट में मृत्यु होने से, अनाथ हो गई. मामा ने कुछ दिनों तक कुछ नहीं कहा, बाद में तोमा लोगों के घरों में काम करने लगी. कम पैसे होने से मामा तोमागिरी के साथ मारपीट करने लगा.

मामा ने एजेंट से बात कर तोमा को बैंकौक भेज दिया. कुछ दिनों तक बैंकौक के होटल में तोमा वेटर का काम करती रही. बाद में उसी होटल में मैनेजर ने तोमा को धीरेधीरे वेश्यावृत्ति के धंधे में यह कह कर लगा दिया कि यह काम का हिस्सा ही है. तोमा को वेश्यावृत्ति में मजा आने लगा था. 7-8 सालों में तोमा ने इतना पैसा बना लिया था कि उस ने वापस नेपाल आ कर घर बनाया और आराम से रहने लगी. तोमा चुप बैठने वाली कहां थी. नेपाल में ही वह लड़कियों से धंधा कराने लगी. आखिर एक दिन वह पुलिस द्वारा पकड़ी गई. खुलासे में उस ने यह आपबीती नेपाल पुलिस को बताई.

हिमालय की गोद में बसे नेपाल एवं नेपाली महिलाओं का सौंदर्य अतुलनीय है. आदिकाल से ही वेश्यावृत्ति एक सुलभ व्यापार माना जाता रहा है. जिसे खुशी या नाखुशी से युवतियां अपनाती हैं. इस में पैसे खर्च नहीं करने पड़ते हैं, बल्कि उन्हें पैसे मिलते हैं.

दिल्ली स्थित नेपाली राजदूतावास में कार्यरत एक अधिकारी के मुताबिक, ‘‘नेपाल सरकार ने नेपाली कानून की एक विशेष धारा के अंतर्गत गरीब, अशिक्षित, पढ़ीलिखी, 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को खाड़ी देशों के घरों में काम करने के लिए यानी हाउसमेड के तौर पर प्रतिबंधित कर दिया है.

श्रम मंत्रालय, महिला तथा बालबालिका मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय सऊदी अरब, दुबई, ओमान, बहरीन, कतर, कुवैत, इराक, लेबनान आदि देशों में नेपाली महिलाओंयुवतियों को नहीं भेजने का निर्णय किया है.’’

औरतों की तस्करी

हौंगकौंग दुनिया का सब से बड़ा ‘नेपाली महिलाओं के देहव्यापार’ का बाजार माना जाता है. वहां नेपाली औरतों को नौकरी के बहाने तस्करी कर के ले जाया जाता है. उन की उम्र 11 से 16 वर्ष तक की होती है. एक आंकड़े के मुताबिक, इंडियन सैक्स ट्रेड में 3 लाख से ज्यादा नेपाली लड़कियां शामिल हैं. नेपाल से औरतों की तस्करी कर के वेश्यावृत्ति में झोंकना एक बड़ा फायदे वाला बिजनैस बन गया है.

एक नेपाली डिप्लोमैट के मुताबिक, ‘‘हमारी नेपाली युवतियों को वेश्यावृत्ति में लगाने के कई कारण हैं जो किसी से भी नहीं छिपे हैं. हिमालय की गोद में बसे नेपाल का सौंदर्य पूरे विश्व में प्राकृतिक छटा के लिए मशहूर है. तो वहीं, नेपाली लड़कियों की खूबसूरती भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें नेपाल सरकार देख रही है. हालांकि उन्हें सुलझाना बेहद मुश्किल है.’’

दिल्ली के जीबी रोड पर छापों के दौरान अकसर तहखानों से कई नेपाली लड़कियों, आंध्रप्रदेश की नाबालिग लड़कियों को बरामद किया जाता है. उन्हें नारी निकेतन भेज दिया जाता है. छूटने पर उन्हें वहीं जीबी रोड पर आना पड़ता है क्योंकि उन के लिए कोई और ठौर नहीं बचता.

नेपाल की जनसंख्या बहुत ज्यादा है. वहां लोग बेहद गरीबी की हालत में जीवन गुजारते हैं. खेती से गुजारा करना मुश्किल होता है. लोग ज्यादातर जमींदारों, मंत्रियों, अफसर एवं राजशाही परिवारों से संबंधित ठकुरी के यहां काम करते हैं. लड़कियां पढ़ नहीं पाती हैं. मजबूर हो कर मातापिता ही लड़कियों को 11 से 12 साल की उम्र में दलालों के हाथ 10 से 30 हजार रुपए ले कर बेच देते हैं.

रोल्पा जिले की मीना ने बताया कि उस के पिता ने उसे 25 हजार रुपए ले कर एजेंट के हाथों बेच दिया. एजेंट ने 16 साल की मीना को 50 हजार रुपए में मुंबई के रैडलाइट एरिया में बेच दिया. घर के कामकाज के बहाने लाई गई मीना को पहली ही रात को 7 पुरुषों से संबंध बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा. पुलिस द्वारा छापा मारने पर ही मीना को वापस नेपाल भेजा गया. मीना अभी घर पर ही रह कर मजदूरी का काम कर रही है. कुछ दिन पहले 218 नेपाली लड़कियों को मुंबई पुलिस ने छुड़ाया. उन में से 70 फीसदी लड़कियों में एचआईवी पौजिटिव पाया गया. पैसा तो इन को मिला लेकिन ये लड़कियां केवल सैक्स के लिए ही हो कर रह गईं.

लहान की सुनीता थापा ने बताया कि यदि ग्राहक खुश हो कर ज्यादा पैसा दे भी दे, तो भी उसे उतने ही पैसे दिए जाते हैं जितना उस से कहा जाता है.

सोशल एक्टिविस्ट दुर्गा घिमिर के मुताबिक, ‘‘नेपाली लड़कियों, औरतों का शोषण कभी भी कम नहीं होगा, पैसों के लिए, अच्छे रहनहसन के लिए उन के परिवार उन्हें या तो वेश्यावृत्ति में धकेल देते हैं या छोटेछोटे बच्चेबच्चियों को चाय की दुकान पर बरतन साफ करने में लगा दिया जाता है या फिर मातापिता उन्हें बेच देते हैं. ये सब अशिक्षा की वजह से है. नेपाल के अंदरूनी एवं ग्रामीण इलाके में लड़कियां पढ़ाई की सुविधा से वंचित हैं.’’

पहाड़ी इलाके में दूरदूर तक जहां मीलों चल कर गांवों में पहुंचा जाता है, एजेंट वहां अपने धंधे की तलाश में रहते हैं. मासूम, छोटी लड़कियों को काम करवाने के बहाने अपने साथ ले आते हैं. एजेंट मातापिता की गरीबी का फायदा उठाते हुए लालच दे कर लड़कियों को खरीद कर ले आते हैं. वे लड़कियों को बेच देते हैं. कुछ दिनों तक वे लड़की के मातापिता को पैसे भेजते हैं, बाद में पैसा भेजना बंद कर देते हैं.

सिंधुपाल चौक की सृजना राई कहती है कि घर की गरीबी देख कर वह काठमांडू के छोटे से होटल में काम करने आई. कमरे में झाड़ूपोंछे का काम करने लगी. खूबसूरती की वजह से होटल में बराबर आने वाले दिनेश थापा के संपर्क में आई. दिनेश ने उसे एक घर का सपना दिखा दिया. दिनेश के साथ भाग कर वह लखनऊ आ गई.

कुछ दिनों तक धर्मशाला में रहने के बाद मुंबई घुमाने के नाम पर दिनेश थापा ने सृजना को मुंबई के एक कोठे में 40 हजार रुपए में बेच दिया. सृजना 15 से 20 ग्राहकों को रोज हमबिस्तर होने देती. कोठे पर आने वाले एक ग्राहक प्रदीप (बदला हुआ नाम), जो बराबर सृजना के पास आता, को आपबीती सुना कर सृजना ने पहले काम करने वाले होटल में चिट्ठी भिजवाई. नेपाल पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया. कार्यवाही कर के मुंबई के रैडलाइट एरिया से उसे बरामद कर वापस काठमांडू भेज दिया.

इकाम की सुनीता दनुवार जब सो कर उठी तो उसे कुछ पता नहीं चला कि वह कहां है. उस के कपड़े बदले हुए थे, बाल कटे हुए थे. एक आदमी खड़ा हो कर उसे घूर रहा था. वह कह उठा, ‘कच्चा मीट.’ सुनीता यह सुन कर चुप हो गई. फूटफूट कर रोने लगी, चिल्लाने लगी. उस वक्त उस की उम्र 12-13 साल की थी. अब सुनीता 35 साल की हो चुकी है. उसे या तो मामा ने बेचा या मातापिता ने. उसे याद है घर पर 2 जवान आए थे. उसे खाने में मिठाई दी थी. उस के बाद उसे कुछ भी याद नहीं.

वह मुंबई 3 दिनों के सफर में लाई गई थी. उस ने सोचा था कि वह बरतन, कपड़े साफ करेगी लेकिन कोठे की मालकिन ने उस से कहा कि उसे मर्दों को खुश करना होगा. इनकार करने पर एक आदमी चाकू ले कर आया, और कहा उसे काट कर कुत्ते के आगे फेंक दिया जाएगा. एक दिन में उसे 30-30 मर्दों के साथ सैक्स संबंध बनाने पड़ते. कुछ दिनों के बाद उसे दूसरे कोठे पर बेच दिया गया. सुनीता के अनुसार, 18 हजार से ज्यादा नेपाली लड़कियां मुंबई में देहव्यापार से जुड़ी हैं.

सुनीता 18 वर्ष की उम्र में 1997 में शक्तिसमूह एनजीओ के मदद से छुड़ा ली गई थी. सुनीता अपने गांव लमही में सिलाईकढ़ाई कर के अपना गुजारा कर रही है.

कोठों पर गुंडेबाजी

कोठे पर आने वाले लोग चोरीछिपे आते हैं, या अकेले रहते हुए 3 से 5 सौ रुपए दे कर अपने कमरे में बुलाते हैं.

63 वर्षीय दिलीप चंद्रावत हर उम्र की महिला के साथ सैक्स संबंध बनाते हैं. नेपाली बाला मधु को वे बराबर बुलाते. आखिर एक दिन मधु के गुंडों ने ही दिलीप के साथ मारपीट कर उस को लूट लिया. गुंडे लोग ज्यादा से ज्यादा वसूली मांगते हैं, जो कमजोर होता है, उसे लूटते हैं. गुंडेबाजी हर कोठे पर होती है. दुनिया के हर जिस्मफरोशी अड्डों पर होती है.

झापा की लक्ष्मी विश्वकर्मा 15 साल की थी, तभी पिता के मित्र ने पैसे ले कर लक्ष्मी को वेश्यावृत्ति के धंधे वालों को बेच दिया. लक्ष्मी बताती है कि जब वह सहवास करने से मना करती तो उसे मारा जाता. शुरूशुरू में उसे एक दिन में 30-35 लोगों के साथ सहवास करना पड़ता. कई बार तो ऐसा होता कि सुबह से शामरात तक इस से भी ज्यादा लोगों के साथ सैक्स करना पड़ता. अड्डे की मालकिन मीना उस के पैसे जमा करती. मांगने पर केवल कुछ ही पैसे देती, बाकी उस से छीन लेती. लक्ष्मी ने कहा, ‘‘वह यदि जिस्म बेच रही है तो यह उस का अपना हक है, उस के पैसों को क्यों लूटा जाता है.’’ आगे चल कर लक्ष्मी ने 4-5 लड़कियों को रख कर अपना अलग ही काम करना शुरू कर दिया.

धंधे में बुराई

काठमांडू के कपन की हिमानी सुब्बा, जो कि 25 साल की है, का मानना है, ‘‘नेपाली लड़की गरीब घर में ब्याही जाती है, अशिक्षित है, उस के पास शिक्षा नहीं है, इसलिए ससुराल में थकहार कर जिस्मफरोशी करने लगती है. एक दिन में वह 2-3 हजार रुपए तक कमा लेती है. इस से घर चल रहा है. इस में बुराई क्या है? कभीकभी पुलिस खलनायक बन कर तंग करती है.’’

नेपाली लड़कियों की मांग भारत की सैक्स इंडस्ट्री से ले कर विदेशों की सैक्स इंडस्ट्री तक है. एजेंट पैसों के लालच में डिमांड की पूर्ति के लिए नेपाली लड़कियों को गांवगांव से खरीद कर लाते हैं. 10 साल से ले कर 18 साल तक की लड़कियों को घरों में काम दिलवाने के बहाने उन्हें देहव्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता है. नेपाली लड़कियां बेहद खूबसूरत होने के साथ भोलीभाली होती हैं. आसानी से सैक्स संबंध बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं. एजेंट के बहकावे में आ कर वे इस धंधे में लिप्त हो जाती हैं.

सैक्स रैकेट का जाल

देश की राजधानी दिल्ली का रैडलाइट एरिया यानी जीबी रोड जहां गरीबी और मजबूरी सरेआम नीलाम होती है, जहां लड़कियों के जिस्म का सौदा किया जाता है और मासूम लड़कियां हर रोज कई मौत मरती हैं और जहां लोग शराब पी कर महिलाओं पर टूटने को तैयार रहते हैं, हर दिन वहां किशोरियों को ला कर बेचा जाता है और उन के साथ अत्याचार किया जाता है. इसी जीबी रोड के ‘दाग’ मिटाने की कवायद में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आफाक और उस की पत्नी सायरा समेत 8 लोगों को मकोका के तहत गिरफ्तार कर जीबी रोड के गंदे ‘खेल’ का परदाफाश किया है. यहां के सभी चकलाघरों में तहखाने हैं, जहां युवतियों को छिपा कर रखा जाता है. आने वाले ग्राहकों में कई नामी कालेजों के छात्र भी होते हैं.

सैक्स रैकेट का सिंडिकेट चलाने वाला आफाक हुसैन और उस की पत्नी सायरा के 6 कोठों में 40 कमरे पाए गए जिन में करीब 250 लड़कियां थीं. क्राइम ब्रांच के मुताबिक, 50-60 हजार रुपए में लड़कियों को खरीद कर

2 लाख रुपए तक जीबी रोड में बेच दिया जाता था. आफाक की हर रोज की कमाई 10 लाख रुपए से ऊपर थी. आफाक हुसैन का पूरा गिरोह है, जिस में अधिकतर लड़कियां पश्चिम बंगाल, झारखंड, नेपाल, बिहार से लाई जा रही थीं. कोठों में लड़कियों को कंट्रोल करने के लिए सीनियर महिलाएं तैनात थीं, जिन्हें नायिकाएं कहा जाता है.

5 हजार लड़कियों को सैक्स रैकेट के दलदल में उतारने वाले आफाक और सायरा बेगम का नैटवर्क सिर्फ दिल्ली के जीबी रोड तक ही सीमित नहीं था बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दुबई तक फैला था. वह नेपाल, बंगलादेश के अलावा आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार से लाई गई लड़कियों को दुबई भेजता था और मोटी रकम वसूल करता था.

जीबी रोड के 6 कोठों पर सैक्स रैकेट चलाने वाले आफाक और सायरा अपने नैटवर्क के जरिए लड़कियों को गुमराह कर के दिल्ली लाते थे. इन लड़कियों को जीबी रोड पर अलगअलग कोठों व पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुरादनगर, अलीगढ़ और गाजियाबाद में 2 से 4 लाख रुपए में बेच दिया जाता था. लड़कियों की खरीदफरोख्त के लिए मेरठ का ब्रह्मपुरी स्थित रैडलाइट खासा चर्चित है. समयसमय पर वहां से नाबालिग लड़कियों को बरामद भी किया जा चुका है.

क्या देहव्यापार कभी रुक पाएगा?

सैक्स संबंध बनाने के लिए कुछ देशों में मान्यताप्राप्त स्थान हैं जहां पुरुष जा कर अपनी शारीरिक जरूरत की पूर्ति करते हैं. पुरुषों को ही इस में ज्यादातर आनंद मिलता है. सैक्सपूर्ति हेतु पुरुष पैसा दे कर महिलाओं को घंटे दो घंटे के लिए ले कर आते हैं. अपनी सैक्सुअल इच्छा पूरी करते हैं क्योंकि कई बार पुरुष अपने मुताबिक आनंद नहीं उठा पाते हैं.

63 वर्षीय मुन्ना हवेली के छोटे से कमरे में सुबह के 7 से 9 बजे के बीच, 25 से 40 वर्षीय महिला को बुला कर सैक्स संबंध स्थापित करते हैं. इस के लिए मुन्ना वियाग्रा की गोली खा कर संभोग करते हैं. अपने इस काम को अकसर रामजीलाल जैसे दोस्तों के साथ शेयर करते हैं. दरअसल, देहव्यापार ऐसा व्यापार है जो सदियों से होता आया है. इस को रोकना नामुमकिन है. न नेपाल में ‘सैक्स बाजार’ कम होगा, न ही भारत में नेपाली लड़कियों का क्रेज कम होगा.

देह व्यापार कभी खत्म नहीं होगा. हां, कानून बनते रहेंगे, पुलिस कार्यवाहियां करती रहेगी और सैक्स धंधे के दलाल व जिस्मफरोशी के जरिए पैसे कमाने वाली महिलाएं कानून व पुलिस को धता बताते हुए धंधे को बढ़ावा देते रहेंगे. हकीकत यह है कि यह धंधा सड़क से ले कर फ्लैटों, बंगलों, बड़ीबड़ी पार्टियों, होटलों यानी तकरीबन हर जगह जारी है, जारी रहेगा.