इंटर की परीक्षा के टौपर्स घोटाला को लेकर बिहार को एक बार फिर कलंकित होना पड़ा है. इंटर आर्टस टौपर रूबी राय से पूछा गया कि पौलिटिकल साइंस में किस चीज की पढ़ाई होती है, तो उसने कुछ देर सोचने के बाद जबाब दिया कि पौलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है. रूबी के इस बेतुके जबाब ने बिहार के पूरे एजुकेशन सिस्टम को ही कई सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. देश भर में इंटर टौपर्स की कलई खुलने पर बिहार के सिर पर एक बार फिर कलंक लग गया है.

अब सरकार अपनी नाक बचाने के लिए टौपर्स की दुबारा टेस्ट लेने के बाद उनके रिजल्ट को रद्द कर दिया है, पर इस पूरे मामले की अगर गहराई से और सही जांच हो, तो कई बड़ी मछलियां कानून के फंदे में फंस सकती हैं. मुख्यमंत्री फिलहाल गहराई से जांच करने की बात कह रहे हैं, पर शिक्षा माफियाओं से निबटना उनके लिए काफी बड़ी चुनौती होगी.

इंटर साइंस और आर्टर्स के टौपर्स को लेकर बिहार स्कूल एक्जामिनेशन बोर्ड कई दिनों तक असमंजस की हालत में रहा. टौपर्स की योग्यता पर सवालिया निशन लगने के बाद बोर्ड ने टौपर्स का इंटरव्यू लेने का फैसला किया. मामला तब सामने आया जब एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में टौपर्स सब्जेक्ट का सही उच्चारण तक नहीं कर सके.

इंटर आर्टर्स टौपर्स को बिहार बोर्ड ने इंटरव्यू के लिए बुलाया. इंटर आटर्स टौपर रूबी राय को छोड़कर सभी 13 टौपर्स बोर्ड के दफ्तर में पहुंच गए. रूबी राय के पिता ने बोर्ड को पत्र के जरिए सूचित किया किया कि रूबी डिप्रेशन की शिकार हो गई है, इसलिए वह बोर्ड के इंटरव्यू में नहीं पहुंच सकती है. उसके ठीक होने के बाद वह बोर्ड के सामने हाजिर होगी. बोर्ड के पैनल ने सभी टौपर्स से 30-30 सवाल पूछे और सभी ने अधिकतर सवालों के सही जबाब दिए. पैनल में 11 शिक्षकों की टीम मौजूद थी.

बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने टौपर्स के टेस्ट के बाद दावा किया कि सभी टौपर्स ने सारे सवालों के सही जबाब दिए. सभी बच्चे टैलेंटेड और अप टू मार्क हैं. अध्यक्ष के दावे के उलट इंटर साइंस टौपर सौरभ श्रंप्ठ और थर्ड टौपर राहुल कुमार को नौलेज टैस्ट में जीरो नंबर मिले. सौरभ को गणित में 85 नंबर आए थे, पर कमिटी के टेस्ट में उसे 25 में से 3 नंबर मिले. अंग्रेजी के पर्चा में उसे 87 नंबर आए थे, जबकि टेस्ट में उसे जीरो नंबर मिले. भौतिक विज्ञान में 83 नंबर लाने वाले सौरभ को कमिटी में टेस्ट में महज 5 नंबर मिले. र्थड टौपर राहुल को अंग्रेजी में 87 नंबर मिले थे पर टेस्ट में उसे जीरो मिला. 25-25 नंबर के टेस्ट में राहुल को भौतिकी में 2, रासायन विज्ञान में 3, गणित में 2 नंबर मिला.

टेस्ट के बाद दोनों का रिजल्ट रद्द कर दिया गया. बिहार स्कूल एक्जामिनेशन बोर्ड के इतिहास में यह पहला मौका है जब टौपर्स का रिजल्ट रद्द कर दूसरे को टौपर घोषित किया गया हो. दोनों ही टौपर विशन राय कौलेज के स्टूडेट हैं.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष राजमणि प्रसाद का कहना है कि बिहार बोर्ड के रिजल्ट में शिक्षा माफियाओं की जम कर चलती रही है. साल 2014 में जब वह बोर्ड के अध्यक्ष थे, तो रिजल्ट आने के पहले ही सभी टौपर्स की कौपियों की दुबारा जांच की गई थी. 40 टौपर्स को पत्र भेज की बोर्ड के दफ्तर बुलाया गया था, पर केवल 5 छात्र ही पहुंच सके थे. साल 2013 में भी ऐसे मामलों का खुलासा हुआ था. शिक्षा मापिफया मूल्यांकन केंद्र पर ही अपना सारा खेल खेलते हैं. इस खेल में ज्यादातर एफिलिएटेड कौलेजों से जुड़े लोग शमिल होते हैं. कौपी के जांच के दौरन मनमाफिक नंबर बिठा लिए जाते हैं.

कीरतपुर राजारामपुर के विशन राय कौलेज के डिप्टी डायरेक्टर नंदकिशोर यादव का दावा है कि रूबी पढ़ाई में काफी तेज है, लेकिन वह बोलने में हिचकती है. सब के सामने बोलने से घबराती है. रिजल्ट को लेकर हंगामा मचने पर रूबी डर गई है और मानसिक रूप से परेशन है. उन्होंने कहा कि उनके कौलेज का रिजल्ट सुर्खियों में है और छात्रों को उनकी प्रतिभा के आधर पर ही नंबर मिला है.

वैशाली जिला का विशनराय कौलेज पहले भी विवादों में रह चुका है. इस साल आटर्स की टौपर रूबी राय, इंटर साइंस का टौपर सौरभ श्रेष्ठ और तीसरे नंबर पर रहे राहुल राज इसी कौलेज के छात्रा हैं. साइंस टौपर्स में सातवें नंबर पर रही शिवानी भी इसी कौलेज की है. साल 2005 में इस कौलेज के 374 छात्रों ने परीक्षा दी थी जिसमें सभी छात्रा प्रथम श्रेणी से पास कर गए थे. एक ही कौलेज से इतने फर्स्ट डिवीजन देखकर तब के बोर्ड अध्यक्ष नागेश्वर शर्मा ने रिजल्ट रोक दिया था. दोबारा उनके कौपियों की जांच की गई तो केवल 4 छात्र ही फर्स्ट डिवीजन से पास हो सके.

इस साल राज्य में साइंस का रिजल्ट 67.07 फीसदी रहा, वहीं विशनराय कौलेज के इंटर साइंस का रिजल्ट 97.52 फीसदी रहा. परीक्षा में शमिल 646 छात्रों में से 630 पास हुए और 534 छात्रों ने फर्स्ट डीविजन से पास किया. 96 छात्रों ने सेकेंड क्लास से पास किया और 14 छात्रा फेल हुए.

गौर करने वाल बात यह है कि वैशाली जिला के सभी परीक्षा केंद्रो की कौपियां मूल्यांकन के लिए रोहतास भेजी गई, तो विशनराय कौलेज की कौपियों की मूल्यांकन पटना के राजेंद्र नगर हाई स्कूल में क्यों कराया गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेरिट लिस्ट को बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव मिल कर तैयार करते हैं, उसके बाद भी क्यों और कैसे गड़बड़ी हुई? इसका जबाबदेह यह दोनों क्यों नहीं है? इस घोटाले की जांच खुद बिहार बोर्ड ही कर रहा है, जो खुद ही इसमें शमिल रहा है? किसी दूसरी एजेंसी से जांच क्यों नहीं कराई गई? बोर्ड के एक्ट में इंटरव्यू लेने का अधिकार उसे नहीं है, फिर उसने छात्रों का इंटरव्यू क्यों लिया?

बिहार सरकार ने इस साल कदाचार मुक्त परीक्षा का नारा दिया था और उसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रही. सरकार एक मकसद में कामयाब रही, तो शिक्षा माफियाओं ने मूल्यांकन में सारा खेल करके नया घोटाले में सरकार की गर्दन फंसा दी है. शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी कहते हैं कि यह काफी निराशजनक स्थिति है और पूरे मामले की जांच की जा रही है और इसमे शमिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी काररवाई की जाएगी. बोर्ड के अफसरों के साथ भी कोई रियायत नहीं होगी.

बिहार की शिक्षा व्यवस्था और उसमें गहरी जड़े जमा चुकी भ्रष्टाचार को लेकर पूरी दुनिया में भद्द पिटने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कहना पड़ा कि इंटर टौपर्स घोटाले में शमिल लोगों को बख्श नही जाएगा. इसमें दोषी पाए जाने वालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा. बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद भी पूरे मामले की जांच की बात दोहरा रहे हैं, पर बोर्ड के सूत्रों की मानें तो सारे गड़बड़ियों का सिरा बोर्ड अध्यक्ष के दफ्तर की ओर ही जाता दिख रहा है.