नेहा पैसा कमाने के लिए देहधंधा कर रही थी, लेकिन उस ने देहधंधे से जिस तरह की कमाई के बारे में सोचा था, उस तरह उस की कमाई हो नहीं रही थी. ज्यादा कमाई के लिए उस ने पूनम आंटी से बात की तो उस ने नेहा को ऐसी जगह पहुंचा दिया, जहां की चमकदमक देख कर उस की आंखें फैल गईं.

पूनम ने नेहा को पूरी बात समझा दी थी. वह पहले तो वहां झिझक रही थी, लेकिन बाद में पूनम की बात मान कर उस के बताए रास्ते पर चल पड़ी थी. आखिर उसे देहधंधा तो करना ही था. पूनम के संपर्क में आने के बाद नेहा ने देखा कि केवल लड़कियां ही नहीं, शादीशुदा औरतें भी इस धंधे में लगी हैं.

नेहा ने कई लड़कियों से बात की तो पता चला कि ज्यादातर लड़कियां या औरतें अपने घरों से नौकरी करने के नाम पर निकलती हैं और वहां आ कर देहधंधा करती थीं. तमाम ऐसी लड़कियां थीं, जिन्हें पहचाना भी नहीं जा सकता था. होटल में आते समय वे अपने चेहरे को कवर किए रहती थीं. बाहर निकलते समय भी वे चेहरा ढके रहती थीं.

पुलिस ने रामपुर के संधू होटल पर छापा मार कर 5 कालगर्ल्स सहित 7 लोगों को पकड़ा था. पकड़े गए लोगों के पास से आपत्तिजनक चीजें और नकदी बरामद की गई थी. पुलिस पहले भी इस होटल से सैक्स के कारोबार में शामिल लोगों को पकड़ कर जेल भेज चुकी थी. वहां पकड़ी गई ज्यादातर लड़कियां उत्तराखंड की थीं.

रामपुर के थाना स्वार पुलिस को सूचना मिली थी कि होटल संधू में सैक्स का कारोबार चल रहा है. पुलिस ने होटल पर छापा मारा तो वहां 5 कालगर्ल्स सहित 7 लोगों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया. पकड़ी गई ज्यादातर लड़कियां उत्तराखंड की रहने वाली थीं. पकड़े गए लोगों में संधू होटल का मैनेजर भी था.

आसपास के लोग कई बार इस होटल के बारे में पुलिस से शिकायत कर चुके थे, लेकिन होटल संचालक और पुलिस की मिलीभगत की वजह से पुलिस ने काररवाई नहीं की थी. इसी साल अप्रैल महीने में होटल से 2 कालगर्ल्स सहित 4 लोगों को पकड़ा गया था. पूछताछ में इन लड़कियों से पता चला था कि काम की तलाश में भटक रही लड़कियों को देहधंधा कराने वाले लोग आसानी से उन्हें अपनी ओर मोड़ लेते थे.

देहधंधे का संचालन करने वाला इस बात का पूरा खयाल रखता था कि एक ग्राहक के पास एक ही लड़की बारबार न जाए. लड़कियों को भी इस बात की खास हिदायत दी जाती थी कि वे ग्राहक से बाहर संबंध न रखें. कई संचालक तो लड़कियों और ग्राहकों के मोबाइल फोन अपने पास रख लेते थे, जिस से किसी तरह के फोटो या वीडियो के बनने की संभावना न रहे.

इस तरह के चलन में लड़कियों के लिए अच्छी बात यह होती है कि ये पुराने दकियानूसी चकलाघर से अलग होते हैं. यहां साफसुथरे कमरों और अच्छे ग्राहकों से संपर्क होता है. किसी तरह के शोषण की संभावना नहीं होती. संचालक इस बात का खयाल रखता है कि किसी लड़की से जबरन कुछ न कराया जाए. इस से किसी तरह के विवाद की संभावना नहीं रहती.

इस तरह के ज्यादातर मामले दूसरे लोगों के विवादों की वजह से ही पुलिस के सामने आते हैं. ज्यादातर मामलों में होटलों के आसपास रहने वाले लोग ही पुलिस से शिकायत करते हैं. कई बार विरोधी होटल वाले भी शिकायत कर देते हैं. पुलिस को ये बातें पहले से ही पता होती हैं. इस तरह की शिकायतों के बाद कुछ दिनों तक होटल यह धंधा बंद कर देते हैं.

धीरेधीरे वे फिर धंधा शुरू कर देते हैं. इस तरह की शिकायतों से पुलिस को मिलने वाली रिश्वत बढ़ जाती है. पहली बार जब नेहा पुलिस छापे में पकड़ी गई थी तो उसे इस बात का डर सता रहा था कि उस के घर वालों को सच्चाई का पता चल जाएगा. लेकिन पकड़े जाने पर संचालकों ने नेहा के घर वालों को बताया था कि वह टूर पर गई है. 3 दिन उस का मोबाइल बंद रहेगा. यही नहीं, संचालकों ने अदालत में जमानत के समय नेहा का नाम और पता सब फरजी लिखवाया था. इस से किसी को नेहा के सच का पता नहीं चला.

संचालक कोर्ट और पुलिस के कामों में होने वाले खर्च की रकम को लड़कियों से ही वसूल करते हैं. लड़कियों को यह पैसा किस्तों में अदा करना होता है. असल में ये लड़कियां किसी रोजगार से जुड़ी नहीं होतीं. घर के लोग रोजगार या कामधंधे से बाहर जाते हैं. वे इतना पैसा नहीं कमा पाते कि परिवार चला सकें. ऐसे में लड़कियां रोजगार के लिए देहधंधे का सरल रास्ता चुनती हैं.

उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में रोजगार के साधन उस तरह से नहीं बन पाए, जैसी उम्मीद की जा रही थी. ऐसे में गरीबी में परेशान लोग कई तरह के बुरे कामों में फंस गए हैं. गांवों और शहरों में रहने वाली लड़कियां मैदानी इलाकों के बड़े शहरों में नौकरी के लिए जाती हैं. जाती तो वे नौकरी के लिए हैं, पर उन में से तमाम देहधंधे में फंस जाती हैं.

वहां से आने वाली लड़कियां रामपुर, बरेली और दिल्ली तक जाती हैं. एक साल में केवल रामपुर में ही ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिन में वहां से आई लड़कियां देह धंधा करती पकड़ी गई हैं. लेकिन ये किसी बड़े रैकेट का हिस्सा नहीं होतीं. होटल के संचालकों से ये सीधा संपर्क रखती हैं. जरूरत पड़ने पर होटल के संचालक इन्हें बुला लेते हैं.

ये लड़कियां 6 से 8 के ग्रुप में होती हैं. कई बार 3 से 4 लड़कियां भी अपना ग्रुप बना लेती हैं. ऐसी लड़कियां ज्यादातर दिन में देह कारोबार करती हैं. प्रति ग्राहक ये 5 सौ रुपए लेती हैं. होटल मालिक ग्राहक से कमरे के हिसाब से पैसा वसूल करता है, जो आमतौर पर डेढ़ से 2 हजार रुपए के बीच होता है.

अगर लड़की को रात में रोकना होता है तो उस का रेट अलग होता है. मैदानी इलाकों के मुकाबले पहाड़ी इलाकों के शहरों और होटलों में देहधंधा कम होता है. क्योंकि वहां के होटलों में इस तरह के काम करना आसान नहीं है.

ऐसे में पहाड़ घूमने आने वाले पर्यटक पहाड़ से लगे मैदानी इलाकों में रुकते हैं. यहां उन्हें कई तरह की सुविधाएं मिल जाती हैं. कई पर्यटक तो मैदानी इलाकों के शहरों में ही रुकते हैं और वहां से कार से पहाड़ घूमने जाते हैं. यहां के होटल पहाड़ के होटलों के मुकाबले सस्ते होते हैं और यहां इस तरह की सुविधाएं भी मिल जाती हैं.

मैदानी इलाकों के होटलों में पुलिस का खतरा कम होता है. मैदानी इलाकों में देहधंधा करने वाली लड़कियां पहाड़ों से आती हैं. पहाड़ पर एक तो ऐसे काम मुश्किल से होते हैं, दूसरे वहां पहचान होने का खतरा होता है. ऐसे में मैदानी इलाकों के होटल इन के लिए ज्यादा सुरक्षित होते हैं. पहाड़ों की ये लड़कियां अपने शहरों से बहुत दूर नहीं जाती हैं.