सरिता विशेष

इस हाईटेक और ग्लोबलाइजेशन के युग में फैशन का बोलबाला है. कोई व्यक्ति फैशन को ज्यादा पसंद करता है तो कोई कम, लेकिन करते सब हैं. मान लीजिए अगर आपके फैशन में चार चांद लगाने वाले आपके कपड़ों की लिस्ट में से जींस का नाम हटा दिया जाए तो क्या ये लिस्ट पूरी हो पाएगी. तो जवाब होगा नहीं. दुनिया में हर उम्र और जेंडर के लोगों में जींस के प्रति कुछ खास लगाव है. पर क्या आपने कभी सोचा है कि जींस की शुरूआत कहां से हुई. किसके दिमाग में जींस बनाने का ख्याल आया होगा जो आज तक पुराना नहीं हुआ. तो आज आपको जींस के बारे में हम वो हर बात बताएंगे जिसे जानकर आपको थोड़ी नहीं बहुत हैरानी होगी.

मजदूरों के लिए बनाई गई थी जींस

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि शुरुआत में जींस वर्कर्स द्वारा पहनी जाती थी. भारत में डेनिम से बने ट्राउजर्स डूंगा के नाविक पहना करते थे, जिन्हें डूंगरीज के नाम से जाना जाता था. वहीं, फ्रांस में गेनोइज नेवी के वर्कर जींस को बतौर यूनिफॉर्म पहनते थे. उनके लिए जींस का फैब्रिक उनके काम के मुताबिक परफेक्ट था. जींस को ब्लू कलर में रंगने के लिए इंडिगो डाई का इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि 16 वीं शताब्दी में जींस के चलन ने ज्यादा जोर पकड़ा, लेकिन बाकी देशों तक अपनी पहुंच बनाने में इसे काफी समय लग गया.1850 तक जींस काफी पॉप्युलर हो चुकी थी. इस दौरान एक जर्मन व्यापारी लेवी स्ट्रॉस ने कैलिफोर्निया में जींस पर अपना नाम छापकर बेचना शुरू किया.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका की फैक्टिरियों में काम करने वाले वर्कर्स इसे पहना करते थे. और तो और यह उनकी यूनिफॉर्म में शामिल कर दी गई थी. पुरुषों के लिए बनी जींस में जिप फ्रंट में नीचे की तरफ लगाई जाती थी, वहीं महिलाओं के लिए बनी जींस में इसे साइड में लगाया जाता था. स्पेन और चीन में वहां के कॉउबॉय वर्कर्स जींस कैरी किया करते थे. वक्त के साथ जींस में नए-नए चेंज आने लगे. इसी के तहत अमेरिकन नेवी में बूट कट जींस को वर्कर्स की यूनिफॉर्म बनाया गया.

यह तो रही इसके इतिहास की बात, चलो अब हम आपको बताते हैं कि यह फैशन में किस तरह आई. दरअसल, 1950 में जेम्स डीन ने एक हॉलिवुड फिल्म ‘रेबल विदाउट अ कॉज’ बनाई, जिसमें उन्होंने पहली बार जींस को बतौर फैशन यूज किया. इस फिल्म को देखने के बाद अमेरिका के टीन एजर्स और यूथ में जींस का ट्रेंड काफी पॉप्युलर हो गया. इसकी लोकप्रियता कम करने के लिए अमेरिका में रेस्तरां, थियेटर्स और स्कूल में जींस पहनकर जाने पर बैन भी लगा दिया गया, फिर भी जींस का फैशन यूथ के सिर पर ऐसा चढ़ा की फिर उतरा ही नहीं.

धीरे-धीरे जींस की लोकप्रियता बढ़ने लगी और 1970 में इसे फैशन के तौर पर स्वीकार कर लिया गया. तब से अब तक जींस का क्रेज हर तबके के लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है, फिर चाहे वह अमीर, गरीब, बच्चा, बूढ़ा या फिर जवान कोई भी हो.

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