मोबाइल ऐप्स की दुनिया में ‘पोकेमौन गो’ नाम के नए मोबाइल गेम ने जिस तरह तहलका मचाया है उस से जाहिर है कि जैसेजैसे टैक्नोलौजी आगे बढ़ रही है, मोबाइल और कंप्यूटर पर खेले जाने वाले गेम्स का के्रज भी बढ़ता जा रहा है. स्मार्टफोन पर पिछले कुछ वर्षों में सबवे सर्फर, कैंडी क्रश, टैंपल रन और एंग्री बर्ड्स जैसे गेम्स छाए हुए थे, पर अब पोकेमौन गो के साथ यह दीवानगी और बढ़ती नजर आ रही है.

लेकिन जिस तरह तेज और पहेलीनुमा गेम्स की चाहत बढ़ रही है, उसी तरह इन गेम्स को बनाने वालों की मांग में भी इजाफा हो रहा है.

गेम्स डिजाइनिंग में कैरियर

कैरियर और जौब के लिहाज से कंप्यूटर मोबाइल गेम्स नौकरी देने वाला एक उम्दा क्षेत्र बन गया है. मोबाइल पर जैसेजैसे इनडोर के साथ आउटडोर गेम्स की चाहत बढ़ रही है, वैसेवैसे इन हाईटैक गेम्स को बनाने वालों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं. खासतौर से स्मार्टफोन की संख्या बढ़ने के साथ जिस रफ्तार से मोबाइल गेम्स की मांग बढ़ी है, कहा जा सकता है कि मोबाइल गेम्स डैवलपिंग और डिजाइनिंग में भी नौकरी के बेशुमार मौके पैदा होंगे. मोबाइल गेमिंग की इस दुनिया में अलगअलग तरह के रोजगार हैं, इसलिए इन का चुनाव योग्यता के अलावा अपने रुझान के मुताबिक करना चाहिए. इस का आशय यह है कि अगर किसी का मन नई तरह की डिजाइनिंग में लगता है, तो उसे गेम डिजाइनर बनना चाहिए न कि एनिमेटर. इस फील्ड में सब से ज्यादा मांग ऐसे गेम डैवलपर्स की है, जिसे कंप्यूटर के क्षेत्र में जावा, C, C++, 2डी व 3डी गेम डैवलपिंग तकनीक की अच्छी जानकारी हो. गेमिंग की दुनिया में जो अलगअलग रोजगार उपलब्ध हैं, वे इस प्रकार हैं :

कंप्यूटर गेम प्रोड्यूसर

मोबाइल व कंप्यूटर गेमिंग में सब से ज्यादा अवसर कंप्यूटर या औडियोवीडियो गेम प्रोड्यूसर के रूप में उपलब्ध हैं. इन नौकरियों को हासिल करने के लिए युवाओं को डिजाइनिंग की अच्छी जानकारी के साथसाथ 2डी व 3डी मौड्यूलिंग सौफ्टवेयर का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए. इस सैक्टर में कुछ पद औडियो प्रोड्यूसर इंजीनियर के रूप में उपलब्ध होते हैं, पर इस के लिए युवाओं को विभिन्न कंप्यूटर लैंग्वेज की जानकारी के साथ साउंड इंजीनियरिंग और C++ जैसी कंप्यूटर लैंग्वेज की जानकारी भी होनी चाहिए. डिजाइन आर्ट और गेमकंट्रोल टीम के साथ मिल कर काम करने के मौके भी गेम प्रोड्यूसरों को मिलते हैं, जिस से उन की काबिलीयत साबित होती है.

एनिमेटर

एक ओर जहां कंप्यूटर विशेषज्ञ गेम की तकनीक, जरूरतों और बारीकियों को समझते हुए उन के तकनीकी समाधान प्रस्तुत करते हैं, वहीं दूसरी ओर एनिमेटर किसी गेम विशेष के कार्टून कैरेक्टर्स के हर पहलू पर काम करते हैं. एनिमेटर ही किसी गेम के कार्टून कैरेक्टर को विकसित करता है और उसे ऐसा चेहरामुहरा व भावभंगिमाएं प्रदान करता है, जिस से वह कैरेक्टर लोगों में मशहूर हो जाता है. कंप्यूटर प्रोग्रामर और सीनियर आर्टिस्टों के साथ काम करने के इच्छुक एनिमेटर को 2डी व 3डी मौड्यूल्स के साथ कार्टून कैरेक्टर के 2डी व 3डी टैक्स्चर मैप तैयार करने में महारत हासिल होनी चाहिए, तभी वह किसी गेम के पात्रों को सही ढंग से डैवलप कर पाता है.

गेम डिजाइनर

किसी मौलिक कंप्यूटर या मोबाइल गेम की शुरुआती परिकल्पना गेम डिजाइनर ही करता है. वह नए गेम की डिजाइनिंग की कल्पना करता है, उन्हें पेश करने के तौरतरीके सुझाता है, गेम से जुड़े कैरेक्टर क्या और कैसे काम करेंगे और कैसे दिखेंगे, इस की भी तैयारी करता है और कैसे कोई गेम मजेदार हो सकता है, यह भी बताता है. गेम डिजाइनर से अपेक्षा की जाती है कि वह गेम की राइटिंग और डायग्राम का जिम्मा ले, लेकिन इस के लिए जरूरी है कि उसे आधुनिक गेमिंग तकनीक के साथसाथ गेमिंग आर्ट के विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी हो.

ग्राफिक और औडियो प्रोग्रामर

ग्राफिक और औडियो के स्पैशल इफैक्ट के बिना कोई भी कंप्यूटर, मोबाइल गेम अधूरा है. ग्राफिक और औडियो प्रोग्रामर असल में गेम की पृष्ठभूमि में आने वाली विशेष आवाज और संगीत के साथसाथ उन्हें स्क्रीन पर रोचक ढंग से पेश करने का जिम्मा लेते हैं. किसी गेम को ग्राफिक सपोर्ट देने के लिए ग्राफिक प्रोग्रामर को C, C++, डायरैक्ट ऐक्स, ओपन जीएल, विंडो प्रोग्रामिंग, 3डी पैकेज की अच्छी जानकारी होनी चाहिए. इसी तरह औडियो प्रोग्रामर या साउंड इंजीनियर को गेम में आवाज से स्पैशल इफैक्ट पैदा करने वाली तकनीक की जानकारी होनी चाहिए. कुल मिला कर कई तरह के जौब मोबाइल गेमिंग के फील्ड में उपलब्ध हैं जो इस प्रकार हैं : गेम डिजाइनर, सीनियर लैवल डिजाइनर, जूनियर लैवल डिजाइनर, एनिमेटर, गेम प्रोग्रामर, प्रोग्रामर, नैटवर्क प्रोग्रामर, ग्राफिक्स प्रोग्रामर, औडियो प्रोग्रामर, गेम प्रोड्यूसर और क्वालिटी एश्योरैंस.

बेशक डिजिटल गेम्स की दुनिया में रोजगार की असीमित संभावनाएं हैं, पर यहां हर किसी को वह मुकाम नहीं मिल सकता जिस से उस की अलग पहचान बन सके. इस के लिए उस में कई खासीयतों की जरूरत होती है, जैसे इस की पहली योग्यता यह है कि इस फील्ड में पैशन रखने वाला शख्स ही आगे बढ़ सकता है.

शैक्षणिक योग्यताओं के साथसाथ यह भी जरूरी है कि युवा नएनए कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स सीखने व खेलने के शौकीन हो . गेम्स को समझना, उस के सभी लैवल पार करना और उस की पहेलीनुमा जटिलताएं सुलझाना आदि पर गेमिंग वर्ल्ड में उस की कामयाबी तय होती है.

इसी तरह कला की बारीकियां समझना यानी आर्ट स्किल से लैस होना इस फील्ड में बहुत जरूरी है. इन खूबियों के साथ अगर आप में लीडरशिप की क्षमता है और आप का विश्वास टीमवर्क में है, तो गेमिंग की दुनिया में आप का निश्चय ही स्वागत होगा.

कोई भी शख्स अकेले दम पर गेम की डिजाइनिंग, एनिमेशन, आर्ट स्किल और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग आदि सभी काम नहीं कर सकता. अत: उसे टीम के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ेगा. ऐसे में टीम को साथ ले कर चलने वाला व्यक्ति गेमिंग के क्षेत्र में अच्छा रोजगार पा सकता है.

वैसे कंप्यूटर मोबाइल गेमिंग के क्षेत्र में जाने के लिए कुछ खास कोर्स भी मददगार साबित हो सकते हैं, जैसे, बैचलर औफ फाइन आर्ट्स यानी बीएफए. डिजिटल डिजाइन नामक 3 साल का डिग्री कोर्स इस में मददगार साबित होता है. यह कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकता है.

इस के अलावा कुछ और डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स हैं, जिन की सहायता से गेमिंग की दुनिया में कदम रखा जा सकता है. ये कोर्स हैं :

–  प्रोफैशनल डिप्लोमा इन गेम आर्ट, जो कि एक साल का डिप्लोमा कोर्स है –  प्रोफैशनल डिप्लोमा इन डिजिटल आर्ट ऐंड डिजाइन, यह भी एक साल का डिप्लोमा कोर्स है –  प्रोफैशनल डिप्लोमा इन एनिमेशन, इस कोर्स की अवधि भी एक साल है

–  डिप्लोमा इन गेम आर्ट, इस कोर्स की अवधि 9 महीने है

–  सर्टिफिकेट इन 3डी विजुलाइजेशन, यह 4 महीने का कोर्स है –  सर्टिफिकेट इन गेम ऐन्वायरमैंट, यह भी 4 महीने का कोर्स है. इन में से ज्यादातर डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सों के लिए शैक्षिक योग्यता 12वीं पास होना है.                      

यहां हैं रोजगार

वैसे तो गेमिंग ऐक्सपर्ट्स के लिए आज पूरी दुनिया में रोजगार के अवसर पैदा हो गए हैं, लेकिन देश में भी मोबाइल व कंप्यूटर गेम्स बनाने के लिए कुछ संस्थानों में ऐसे अवसर मिल सकते हैं. मोटे तौर पर शुरुआत में ढाई लाख रुपए सालाना की नौकरी देश की इन शीर्ष गेम्स डैवलपर कंपनियों में मिल सकती है, डिजिटल चौकोलेट, बेंगलुरु, इंडिया गेम्स, मुंबई, जंप गेम्स, मुंबई.

विदेशों में गेमिंग कंपनियों में काम करने वाले सीनियर सौफ्टवेयर इंजीनियर/डैवलपर/प्रोग्रामर को 1 लाख 20 हजार डौलर तक की सैलरी मिल जाती है. वहीं डिजाइन स्पैशलिस्ट का सालाना वेतन 108,000 डौलर तक हो सकता है. ग्राफिक आर्टिस्ट भी 88 हजार डौलर सालाना कमा लेते हैं, जबकि शुरुआत में गेम टैस्टर जैसे पद पर काम करने वाले व्यक्ति की सैलरी 44 हजार डौलर सालाना तक होती है. कुछ कंपनियों में गेम टैस्टर को 7 से 10 डौलर प्रति घंटे के हिसाब से सैलरी दी जाती है.

यहां से करें गेमिंग की पढ़ाई

–       डीएसके सुपिन्फोकोम

–       एशियाई इंस्टिट्यूट औफ गेमिंग ऐंड एनिमेशन

–       इंस्टिट्यूट औफ गेमिंग ऐंड एनिमेशन

–       आईसीएटी डेसिंग ऐंड मीडिया कालेज

इन के अलावा गेमिंग से जुड़े पाठ्यक्रमों में अध्ययन की सुविधा इंडस्ट्रियल डिजाइन सैंटर, आईआईटी, पवई (मुंबई) और नैशनल इंस्टिट्यूट औफ डिजाइन, अहमदाबाद में भी