सामाजिक

आसाराम : संत के चोले में ऐयाशी

By बुशरा | 4 January 2017

साल 2013. साधु सुंतों और महात्माओं के देश भारत के उत्तर प्रदेश का जिला शाहजहांपुर, जो क्रांतिकारी शहीदों की जन्मभूमि, खूबसूरत कालीनों की निर्माणस्थली और चीनी मिलों की मिठास के लिए जाना जाता है, आजकल कथावाचक आसाराम द्वारा तथाकथित यौन उत्पीड़न की शिकार हुई उस नाबालिग लड़की के लिए चर्चा में है जिस के पिता आसाराम को अपना ‘भगवान’ मानते थे. शहर में चारों ओर आसाराम को ले कर हंगामा बरपा हुआ है. एक तरफ आसाराम के समर्थक शहर में प्रदर्शन कर रहे हैं तो दूसरी ओर शहर के आम लोग आसाराम का पुतला फूंक कर अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं. 

पीडि़त परिवार को आसाराम के समर्थकों द्वारा धमकियां मिल रही हैं. युवती के घर को पुलिस सुरक्षा मुहैया करवा दी गई है. घर के मुख्य गेट पर 2 कौंस्टेबलों को और घर के भीतर 1 दारोगा व 2 महिला कौंस्टेबलों को तैनात किया गया है जो चौबीसों घंटे उन के घर पर मौजूद रहते हैं. मीडियाकर्मियों का उन के घर आनाजाना लगा हुआ है. कुछ दिन पहले एक महिला ने पत्रकार के भेष में कई दिनों तक उन के घर में प्रवेश करने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उसे भीतर नहीं जाने दिया. इसी कारण मीडियाकर्मियों को काफी छानबीन के बाद ही घर के भीतर जाने की इजाजत दी जा रही थी. जब हम पीडि़ता के घर उस के पिता से मिलने पहुंचे तो हमें मुख्य गेट पर बैठे 2 कौंस्टेबलों ने रोक लिया. उन में से 1 क ौंस्टेबल हमारा प्रैस कार्ड ले कर भीतर मौजूद दारोगा के पास गया. कुछ समय बाद आ कर उस ने हमें इंतजार करने को कहा.

सुबह के 11 बज चुके थे और धूप तेज होती जा रही थी. हम घर के बाहर बैठे रहे. 20 मिनट के बाद भीतर से दारोगा साहब ने हमें ऊपर बैठाने का संदेश कौंस्टेबल के जरिए भेजा. हम घर की पहली मंजिल पर पहुंचे. दारोगा ने बताया कि किशोरी के पिता पूजापाठ कर रहे हैं, कुछ समय लगेगा. हम बरामदे में पड़े नए डिजाइन की लकड़ी की कुरसी पर बैठ गए.

पिता की नादानी

मुख्य सड़क पर स्थित पीडि़त किशोरी के घर का यह वह हिस्सा था जिस में पीडि़ता के पिता ने आसाराम व उन के साधकों के लिए हर तरह की सुखसुविधाओं से भरपूर कमरे बनवाए थे. एसी लगवा कर और बढि़या रंगरोगन करवा कर एक कमरे में एक बैड और अच्छा फर्नीचर डलवाया था. इसी कमरे में अकसर सत्संग किया जाता था और साधक आ कर ठहरते थे.

ग्राउंड फ्लोर पर पीडि़ता के पिता व 21 वर्षीय भाई ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं. इसी फ्लोर से साथ वाले मकान में एक खिड़कीनुमा दरवाजा निकाला गया है. दोनों घरों में भीतर से ही आवाजाही के लिए शायद इस दरवाजे को खोला गया था हमें दारोगा ने उस कमरे में इंतजार करने को बैठा दिया जहां आसाराम का बेटा नारायण साईं एक बार आ कर रुका था और वहीं पड़े बैड पर सोया था. उन के इस घर में आसाराम के चरण भी पड़ चुके हैं. कुछ देर बाद पीडि़ता के पिता उसी दरवाजे से होते हुए कमरे में आ कर बैठ गए.

कभी आसाराम को अपना भगवान मानने वाले इस शख्स क ो आज आसाराम के नाम से ही घृणा है. वे अपनी बेटी के इस गुनाहगार को सख्त से सख्त सजा दिलाना चाहते हैं. युवती के पिता एक साधारण जाट परिवार से हैं जिन का कद लगभग 6 फुट के आसपास होगा. बातचीत के दौरान उन की आवाज में रुदन था. रुदन एक तरफ विश्वास के चकनाचूर हो जाने का तो दूसरी तरफ उन की नादानी की सजा बेटी को भुगतने का. वे कहते हैंकि मीडिया ने उन्हें काफी सहयोग दिया है. इस के लिए वे उस के आभारी हैं. उन के द्वारा सुनाई गई आपबीती को बयां करने से पहले हम पाठकों को उस घटना के बारे में बता रहे हैं जिस के आरोप में आसाराम सलाखों के पीछे हैं.

गत 16 दिसंबर को दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर आसाराम ने जब पीडि़ता को भी बराबर का जिम्मेदार ठहराते हुए बलात्कारियों का बचाव किया और कहा कि गलती एक तरफ से नहीं होती, तभी आसाराम की बलात्कारी सोच दुनिया के सामने उजागर हो गई थी.

अपने उक्त बयान के लगभग 8 महीने बाद अब आसाराम अपने एक साधक की 17 वर्षीय बेटी का यौन उत्पीड़न किए जाने के आरोप में खुद सलाखों के पीछे हैं. वैसे अपनी साधिकाओं व अपने पास आने वाली महिलाओं के साथ उन के अवैध संबंधों का खुलासा समयसमय पर होता रहा है लेकिन ऐसे किसी मामले में जेल की हवा वे पहली बार खा रहे हैं.

पीडि़त किशोरी के पिता 10-12 वर्षों से आसाराम बापू के साधक थे. आसाराम की सलाह पर ही उन्होेंने 5-6 वर्ष पूर्व अपनी बेटी का दाखिला आसाराम के मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा स्थित गुरुकुल में 7वीं कक्षा में करवाया था. वर्तमान में वह 12वीं कक्षा की छात्रा थी.

महंगी भक्ति

मामला बीते अगस्त माह में शुरू होता है जब युवती के पिता को छिंदवाड़ा गुरुकुल से फोन द्वारा सूचित किया गया कि उन की बेटी की तबीयत खराब है. गुरुकुल से सूचना पा कर किशोरी के मातापिता तुरंत छिंदवाड़ा आश्रम के लिए रवाना हो गए. वहां उन्हें बताया गया कि फिलहाल उन की बेटी की तबीयत में सुधार है लेकिन, तबीयत पूरी तरह ठीक करने के लिए झाड़फूंक व अनुष्ठान किए जाने की जरूरत है. किशोरी के पिता से कहा गया कि यह अनुष्ठान खुद आसाराम बापू द्वारा किया जाएगा. उन्हें बताया गया कि आसाराम राजस्थान में जोधपुर के पास मणाई गांव में अपने एक शिष्य के आश्रम में ठहरे हुए हैं.

किशोरी के पिता अपनी बेटी को ले कर उक्त आश्रम में पहुंचे. वहां आसाराम ने उन से कहा कि रातभर की पूजा और अनुष्ठान होने पर आप की बेटी हमेशा के लिए ठीक हो जाएगी. अनुष्ठान की तैयारी की गई. आसाराम किशोरी को कमरे में ले गए. फिर वहां से वे उसे एक गुप्त दरवाजे से एक अन्य कमरे में ले गए, जहां आसाराम व उन के 3 शिष्यों ने मिल कर किशोरी के साथ कई घंटे तक यौन उत्पीड़न का नंगा नाच किया.

व्यथा वर्णन

पीडि़त किशोरी के पिता ने आसाराम के प्रति अपनी भक्ति से ले कर उन के राक्षसी रूप के खुलासे तक की पूरी कहानी बयां की. पेश है उन्हीं की जबानी यह कहानी :

मैं ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि आसाराम का साधक बन कर उन की भक्ति करना मुझे इतना महंगा पड़ने वाला है. इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वही व्यक्ति मेरी बेटी को अपनी हवस क ा शिकार बना लेगा जिस की तसवीर के सामने बैठ कर मैं घंटों माला जपता था. पूरेपूरे दिन भूखेप्यासे रह कर उन की साधना करता था.

आसाराम के 60-70 हजार पूर्णव्रतधारी साधकों में मैं भी एक था. ये साधक पूर्णिमा के दिन आसाराम के दर्शन के बिना अन्नजल ग्रहण नहीं क रते हैं. मैं ने जिस दिन से दीक्षा ली थी उसी दिन से यह व्रत ले लिया था. यह व्रत मैं हर माह रखता था और सर्दीगरमीबरसात हर मौसम में, जहां भी आसाराम होते थे वहां जाता था, उन के दर्शन करने के बाद ही अन्नजल ग्रहण करता था. मेरे इस अंधविश्वास के कारण आज मेरे बच्चों की पढ़ाईलिखाई सब बंद है. उन का 1 साल बरबाद हो गया है. हर पल डर के वातावरण में गुजरता है.

किस तरह वे आसाराम के संपर्क में आए और अपना सबकुछ उन पर न्योछावर करने को आतुर रहने लगे, इस बारे में वे यों बताते हैं :

साल 2001 के जनवरी महीने में आसाराम का बरेली में सत्संग था. उस से पहले मेरा भतीजा रोहतक गया था जहां से वह ‘ऋषि प्रसाद’ नामक पत्रिका ले आया जो आसाराम द्वारा प्रकाशित की जाती है. मैं ने पत्रिका पढ़ी तो मुझे बहुत अच्छी लगी. मुझे लगा कि ये बाबा तो बहुत बढि़या बातें बताते हैं, इन से मिलना चाहिए, इन का सत्संग सुनना चाहिए.  इत्तफाक से 2-3 महीने बाद शहर में जगहजगह लगे पोस्टरों के माध्यम से इन के बरेली आगमन की खबर हमें लगी.

आप इस लेख को सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं
INSIDE SARITA
READER'S COMMENTS / अपने विचार पाठकों तक पहुचाएं

Leave comment

  • You may embed videos from the following providers flickr_sets, youtube. Just add the video URL to your textarea in the place where you would like the video to appear, i.e. http://www.youtube.com/watch?v=pw0jmvdh.
  • Use to create page breaks.

More information about formatting options

CAPTCHA
This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions.
Image CAPTCHA
Enter the characters shown in the image.