ट्रांसजैंडर एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही जानेअनजाने हम अपनी भौंहें चढ़ा लेते हैं. सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्तियों को छोड़ दें तो शेष लोगों के लिए अभी भी यह शब्द और इस का अर्थ एक टैबू है. ट्रांसवूमन को नीची नजरों से देखा जाता है. लोगों की पिछड़ी मानसिकता का नतीजा है कि हम इन लोगों को अकसर इनसान के आधारभूत अधिकारों से भी वंचित कर देते हैं. फिर इन में से कुछ ऐसे होते हैं जो अपने आत्मबल व लगन की बदौलत इस तरह की समस्याओं को पार कर आगे बढ़ते हैं और अपना मकसद पूरा करते हैं. ऐसी ही एक कहानी है, पोनी नाम की ट्रांसजैंडर वूमन की, जिस ने हर तरह के सामाजिक धब्बे को धता बताते हुए अपने डांस के पैशन को एक मुकाम तक पहुंचाया और सामाजिक रूप से बहिष्कृत स्लम के बच्चों को भी इस शिक्षा का अधिकारी बनाया.

टूटिकोरैन में जन्मी पोनी अपने परिवार में सब से छोटी हैं. बचपन से ही डांस उन का पैशन था. शुरू में उन के जैंडर ऐक्सप्रैशन की वजह से उन्हें ट्रेनिंग देने से इनकार कर दिया गया. पोनी ने 20 साल की उम्र में सैक्स रिअसाइनमैंट सर्जरी कराई थी. मैथ्स से बीएससी करने के बाद उन्होंने भरतनाट्यम और डांस में एमए किया. कभी सपना देखना नहीं छोड़ा. फिर एक एनजीओ की ओर से आमंत्रण मिला तो तुरंत उस अवसर को स्वीकार किया. यहां वे शुरू में 20 छात्रों को पढ़ाती थीं. धीरेधीरे समाज द्वारा स्वीकृत न किए जाने का उन का भय लुप्त होता गया. उन्हें छात्रों से बहुत सम्मान मिलता था. इस से उन्हें अपनी डांस क्लासेज शुरू करने की प्रेरणा मिली तो 2006 में चैन्नई में ‘अभिनया नृत्यालया’ की शुरुआत की. इस के लिए सरकार से 1 लाख लोन भी मिला. पोनी का मुख्य मकसद स्लम के बच्चों को पढ़ाना है, क्योंकि जब वे कम उम्र की थीं तब उन्हें एक डांस क्लास में लेने से इसलिए इनकार कर दिया था कि वहां केवल ब्राह्मणों के बच्चों को ही सिखाया जाता है.

आज पोनी की डांस ऐकैडमी में स्लम के बच्चे और कुछ ट्रांसजैंडर्स भी हैं. पोनी इन बच्चों की आंखों को भी सपने देखने का हौसला दे रही हैं. डिस्कवरी चैनल पर आनेवाले शो ‘इंडिया माई वे’ में भी इन की कहानी दिखाई गई.