व्हाट्सऐप, फेसबुक, अखबारों के साथसाथ कई टीवी चैनल, जैसे ‘आस्था’, ‘संस्कार’, ‘दिव्य’, ‘दिशा’, ‘साधना’, ‘गौड’ आदि पोंगापंथी फैलाने में किसी न किसी तरह से लिप्त हैं.

फेसबुक, व्हाट्सऐप पर दिनों के अनुसार देवीदेवताओं की तसवीरें व संदेश आते हैं, जैसे सोमवार को शंकर, मंगलवार को हनुमान आदि. बस, एक बार ‘जय’ लिखो अधूरे काम पूरे होंगे. हजारों की संख्या में लोग, ‘जय,’ ‘प्रणाम,’ ‘जयकारा’ आदि फटाफट लिख भेजते हैं.  इसी तरह हजारों की संख्या में लोग लाइक और शेयर करते हैं.

एक और तरीका–7 जगह इस संदेश को भेजो तो 4 दिनों के भीतर आप के पास धनागम होगा. स्वयं मुझे एक परिचित ने ऐसे मैसेज के साथ फोन किया कि तुम भी जल्दी से 7 मिनट के अंदर 7 जगह इस मैसेज को भेजो, फिर देखो इस का कमाल.

एक और बानगी व्हाट्सऐप पर–‘हनुमान’ के इन 12 नामों को 12 लोगों को भेजें. 3 दिनों में मनोकामना पूर्ण होगी. इनकार करेंगे तो 12 वर्ष तक कोई भी काम नहीं बनेगा. धर्मभीरू लोगों को डराने का यह एक सहज तरीका है. इसी तरह, राम के नाम हजार बार लिखो और 15 लोगों को भेजो, रात तक खुशखबरी मिलेगी.

फेसबुक पर — मानते हो तो दिल से लाइक करें-‘ओम साईं राम.’ पोस्ट करते ही 94,339 लाइक, 1,550 शेयर आ गए फेसबुक पर.

नवग्रह मंदिर, खरगौन, मध्य प्रदेश का संदेश फेसबुक पर, ‘‘अपने दुश्मनों से छुटकारा पाने, अपने जीवन के हर क्षेत्र में विजयी होने, कोर्ट केस जीतने, प्रतियोगिता में जीतने के लिए पूजा कराएं.’’

इन संदेशों के बारे में जितना कहा जाए, उतना कम है. आजकल व्हाट्सऐप पर एक औडियो मैसेज आता है कि यदि देश के दुश्मन कोई अफवाह फैलाना चाहें या देश में आतंकी खबर फैलाना चाहें तो कितनी जल्दी सोशल मीडिया द्वारा फैला सकते हैं. मास मैसेज भेजने वाले इस बात का अनुमान लगा रहे हैं, इसलिए, बिना सोचेसमझे कोई भी मैसेज आगे, न बढ़ाएं.

पोंगापंथी फैलाने में समाचारपत्रों की भी भूमिका है. हर दिन राशिफल प्रकाशित किया जाता है. राशिफल पढ़ कर लोग बिगड़े काम बनाने की गांरटी लेने वाले गुरुओं की शरण में पहुंचते हैं. ऐसे गुरु खूब वसूली करते हैं. इस तरह लोग मूर्ख बनते हैं औैर दुख की बात है कि बनते ही रहेंगे.

अकर्मण्यता का प्रचार

‘रंक से राजा बनाने वाले राशि और भाग्यरत्न, भाग्योदय, रोगमुक्त और धनदौलत, संपन्नता पाने का रामबाण उपाय…’ ऐसे विज्ञापन अंधविश्वास ही फैलाते हैं.

सोशल मीडिया में कीर्तन, कथा व पांडित्य प्रवचनों का काफी चलन है. शिक्षित वर्ग में भी यह अंधविश्वास तेजी से फैल रहा है कि इन मार्गों द्वारा मन और विचारों की शुद्धि होने के साथसाथ अगला जीवन सुधरेगा.

आज का आकर्षण टैलीविजन और इस में कदम बढ़ाते भक्ति चैनलों पर प्रवचन देती, कथा सुनाती सुंदर व युवा नारियों की वाणी की प्रखरता दर्शकों के जनसमूह को सम्मोहित कर लेती है. जयजयकार के साथ धनधान्य व सम्मान से विभूषित होती इन युवतियों की संख्या बढ़ती जा रही है. कुछ समय पूर्व तक इस क्षेत्र में पुरुषवर्ग का वर्चस्व था लेकिन अब कथा क्षेत्र, कीर्तन, वास्तुज्ञान में भी महिलावर्ग की उपस्थिति बढ़ रही है.

ऐसे स्थानों पर हजारों लोग घंटों बैठ कर प्रवचन सुनते हैं. अपना घरबार, कामकाज छोड़ बस ईश्वर भरोसे अपने कार्यसिद्धि, जीवनसुधार की कामना लिए आते हैं. विश्वास के साथ वे कहते हैं, ‘हम तो भगवान भरोसे हैं, वे ही सब संभालेंगे.’ ऐसे विचार अकर्मण्यता बढ़ाते हैं जबकि कर्मठता घटाते हैं. इस संदर्भ में एक सूफी कहानी है- एक सूफी गुरु ने अपने शिष्य को अपने ऊंट की जिम्मेदारी सौंपी औैर वह सोने चला गया. नींद आने पर शिष्य ने ऊंट की जिम्मेदारी अल्लाह मियां को सौंपी और वह सो गया. सुबह ऊंट नदारद था. पूछे जाने पर शिष्य का जवाब था कि यह तो अल्लाह मियां की गलती है. आप ही तो कहते हो कि अल्लाह पर पूरा विश्वास करो.

चैनलों पर पोंगापंथी

‘दिशा’ चैनल पर ‘भाग्यदर्पण’ के तहत ‘लाल वट तेल’ बेचने का अनोखा तरीका यों दिखाया जा रहा है — आप लाल रंग का दीपक जलाओगे तो शक्ति प्रसन्न होगी. इस से शत्रु का नाश होगा, भूतप्रेत का असर समाप्त होगा. फिर धोखाधड़ी से बचने की सलाह देते हुए औनलाइन खरीदने पर जोर दिया जाता हैं.  इस के लिए डब्लूडब्लूडब्लू डौट लाल वट डौट कौम पर और्डर करें, तेल

सरिता विशेष

आप के द्वार पहुंच जाएगा. स्पष्ट है कि दुकानदारी चलाई जा रही है और अंधविश्वास फैलाया जा रहा है.

‘दिव्य’ चैनल पर ‘यस आइ कैन चेंज’ के तहत विज्ञापन ‘कौन सी समस्या के लिए कौन सा नग चाहिए,’ इस के लिए डब्लूडब्लूडब्लू डौट रत्नअमृत डौट कौम पर विजिट करें.

हमारे कौल सैंटर में फोन द्वारा अपने कष्ट दूर करने के लिए हम से परामर्श लें और नग धारण कर कष्टों से मुक्त हों.

‘गौड’ चैनल पर जीसस के प्रचार में कहा जाता है जो भी तुम्हारे द्वारा पाप किए गए हैं, उन्हें जीसस अपने ऊपर ले लेते हैं.’ इस का आशय है कि गलत कार्य करने से डरने की बात नहीं.

एक और भ्रमित करने वाला विज्ञापन साधना चैनल पर आता है. इस में कहा जाता है कि ‘इंद्रकवच’ धारण करें और हर संकट, बाधा से मुक्ति पाएं. तुरंत फोन करें.

सत्य सेवाधाम, वृंदावन-21,000 रुपए दें, 200 ब्राह्मणों को भोजन कराएं, दक्षिणा दें ताकि उन के आशीर्वाद से आप के सारे कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सकें.

एक दिन टैलीविजन पर समाचार आ रहा था, साईंबाबा के दर्शन महंगे हुए– दर्शन 200 रुपए, आरती 600 रुपए. साईंबाबा के बारे में लिखा गया वर्णन तथा लोगों से सुनते आ रहे विचारों से मालूम यही हुआ कि साईंबाबा फकीर थे, वे खिचड़ी खा कर जीर्णशीर्ण रहे. आज उन्हीं के मंदिरों में बोली लगाई जा रही है. यह फैसला मंदिर के ट्रस्ट ने लिया है. मंदिर में हर वर्ष करोड़ों का चढ़ावा आता है. यानी लूट में भी बढ़ोतरी के लिए मीडिया का उपयोग खुलेआम हो रहा है.

टैलीविजन आज सब से बड़ा सोशल मीडिया है. इस में ‘तेज चैनल’ के ‘किस्मत कनैक्शन’ कार्यक्रम में कहा गया, ‘यह जगत भौतिक है. मृत्योपरांत अच्छा जीव ही सूक्ष्मलोक में जाता है वरना यहीं भौतिकलोक में ही आना पड़ता हैं. इसलिए भगवद्भक्ति में लगिए ताकि पुण्यों का संचय हो सके.’ साथ ही, मृत्यु के बाद किस तरह की योनियों में जाता है व्यक्ति, इस पर लंबी व्याख्या की गई. ये वर्णन पोंगापंथी ही तो हैं. पुराणों, गंरथों में लिखी बातें पढ़ कर, वर्णित कर प्रवाचकों की दुकानें चल रही हैं.

इसी चैनल पर, आप को बताया जाता है कि मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति की मुक्ति नहीं हुई है तो श्रीमद्भगवत का पाठ कराएं और अमावस्या के दिन पूजा कराएं.

इस के अलावा एक और अविश्वसनीय व हास्यास्पद बात कही गई–कोई आप से रूठ गया  है और आप उस से जुड़ना चाहते हैं तो सुबह व शाम उस के नाम की माला 108 बार जपते रहिए. वह रिश्ता बन जाएगा. इस बात से ज्यादा हास्यास्पद या पोंगापंथी वाली बात और क्या हो सकती है भला.

भक्तिमुक्ति के नाम पर प्रचार करने वाले संगठन कई अजीब तरीके अपनाते हैं. मंहगी गाडि़यों, सिल्क वस्त्रों में लिपटे हुए संत प्रवचन द्वारा मोहमाया से दूर रहने की बात करते हैं जबकि स्वयं अकूत धन के मालिक बने रहते हैं.

धंधा है, बिजनैस है – चाहे कपड़ा बेचो, बकरा काटो या मंदिर में बैठ कर दर्शनार्थियों को ठगो, मतलब तो कमाई से ही है. एक पारिवारिक महिला मित्र ने अनुभव सुनाया. मथुरा के एक प्रसिद्घ मंदिर में पुजारी को 501 रुपए दिए जाने पर रुपए वापस करते हुए उस ने कहा, ‘‘आप की पूजा स्वीकृत नहीं होगी. आप में श्रद्धा नहीं है. कम से कम 1,001 रुपए से पूजा होती है ठाकुरजी की.’’ यह वाकेआ सिद्ध करता है कि ठगने वाला व्यक्ति, दूसरे को ढोंगी कह रहा है.

अखबारों में प्रकाशित धार्मिक लेख, टैलीविजन पर दिखाए जाने वाले धार्मिक प्रकरण, प्रवचन, ऊटपटांग उपाय बताए जाने वाले राशियों के फल आदि दर्शकों, पाठकों के विचारों पर प्रभाव डाल उन्हें अपनी ओर खींचते हैं. अंधविश्वास गहरा होता जाता है जब दर्शक, पाठक इन को बारबार देखता और पढ़ता है. इस विधि को मार्केटिंग भाषा में ‘पुश फैक्टर’ कहा जाता है.

पोंगापंथी व अंधविश्वास से बचना लोगों के अपने हाथ में है. किसी भी प्रचार पर विश्वास व अमल करने से पूर्व बुद्धि का प्रयोग करें. पर धर्म के प्रचारक इतने तेज हैं कि वे बुद्धि का इस्तेमाल करने ही नहीं देते. इसलिए हम सब को बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है.    

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