सरिता विशेष

दुनियाभर के धर्म अपने झंडाबरदारों की काम- पिपासा से परेशान हैं. भारत में हिंदू पंडेपुजारियों, गुरुओं, साधुसंतों की सैक्स लीलाएं आएदिन सुर्खियों में रहती हैं तो कैथोलिक चर्च सैक्स स्कैंडलों की बदनामी झेल रहे हैं. समूचे यूरोप और अमेरिका सहित अनेक देशों में पादरियों के सैक्स किस्से लोगों की जबान पर हैं. भारत में कभी स्वामी नित्यानंद, कभी चित्रकूट वाले बाबा भीमानंद तो कभी आसाराम बापू तो कभी उस के बेटे नारायण साईं तो कभी कोई मंदिर, मठ, आश्रम का पुजारी, साधुसंत सैक्स चर्चाओं में रहते हैं और अब एक और नया नाम बाराबंकी जिले का तथाकथित बाबा परमानंद का जुड़ गया है.

उत्तर प्रदेश का 32 लाख की जनसंख्या वाला बाराबंकी जिला 4,402 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. जिले में 15 विकास खंड हैं. यहां के करीब 65 फीसदी लोग साक्षर हैं. 1 लोकसभा और 6 विधानसभा सीटों वाले बाराबंकी जिले में परमानंद के कुछ वीडियो व्हाट्सऐप पर दिखने लगे. देखते ही देखते ये वीडियो पूरे देश में लोगों के मोबाइल पर पहुंच गए. वीडियो में परमानंद औरतों के साथ सैक्स करते दिख रहा था. 5 मिनट से ले कर 13 मिनट तक के ये वीडियो परमानंद की पोल खोल रहे थे. परमानंद बाराबंकी जिले के हर्रइ गांव में आश्रम बना कर रहता था. 26 बीघा जमीन में फैले इस आश्रम को उस के भक्त ‘हर्रइ धाम’ कहते थे. 65 साल के परमानंद के कई नाम भक्तों के बीच मशहूर थे. इन में शक्ति बाबा, कल्याणी गुरु सब से ज्यादा मशहूर थे. परमानंद को उस के भक्तों ने मठाधीश की उपाधि दे दी थी.

बाबा परमानंद को काली देवी का पुजारी माना जाता था. शनिवार से मंगलवार तक विशेष पूजा चलती थी. इस के अलावा नवरात्रि, गुरुपूर्णिमा और शरदपूर्णिमा में परमानंद विशेष दीक्षा देने का काम करता था. गुरुपूर्णिमा पर विशेष दीक्षा लेने वाले भक्त उस को देवता सरीखा मानते थे. वे अपने घरों के पूजास्थल पर उस की फोटो लगा कर पूजा करते थे. शुरुआत में परमानंद ढोलक और हारमोनियम धुन व रामायण की तर्ज पर भजन गा कर लोगों को अपने आश्रम में बुलाता था. समय के साथसाथ उस का आश्रम हाईटेक होता गया. परमानंद ने सुखशांति और मनोकामना की पूर्ति के लिए कई तरह की संगीत थैरेपी शुरू कीं. इन में कई थैरेपी तो ऐसी थीं जिन के नाम तक लोगों ने कभी नहीं सुने थे. हर थैरेपी के लिए अलग फीस वसूल की जाती थी. परमानंद के आश्रम में इन थैरेपी को परमानंद साधना सिद्धि संगीत थैरेपी, प्राइमेल थैरेपी और संतान थैरेपी कहते थे. इन सभी की अलगअलग फीस देनी पड़ती थी. आश्रम में इन थैरेपी की आड़ में तमाम तरह के घिनौने काम होते थे. आश्रम के वीडियो सामने आने के बाद उन के भक्त भी अपने को ठगा और शर्मिंदा महसूस करने लगे. समाज में उन की मानसम्मान और प्रतिष्ठा पर असर पड़ा.

वीडियो को देखने के बाद बाराबंकी जिले के एसपी अब्दुल हमीद ने एसपी सिटी विशाल विक्रम सिंह और इंस्पैक्टर जावेद खान को इस मामले की जांच का काम सौंप दिया. वीडियो की जांच के बाद पुलिस ने परमानंद पर मुकदमा दायर कर मामले की छानबीन शुरू कर दी. परमानंद औरतों के बांझपन को दूर करने के साथ ही भक्तों के तमाम दूसरे दुखों को भी दूर करने का दावा करता था. उस का दावा होता था कि उस के आशीर्वाद से केवल बेटा ही होता है. इस के लिए चुनी गई औरतों को मासिकधर्म के बाद मिलने के लिए बुलाया जाता था. संतान के लिए आने वाली औरतों को पहले परमानंद पसंद करता था. इस के बाद ही उन का इलाज शुरू किया जाता था. इलाज के नाम पर औरतों को मानसिक रूप से बाबा के साथ सैक्स करने को तैयार किया जाता था. वीडियो को देखने से साफ पता चलता है कि औरतों के साथ परमानंद जोरजबरदस्ती नहीं करता था. औरतें खुद से ही बाबा के साथ सैक्स करने की पहल करती थीं. बाबा कम उम्र की ही औरतों को अपने लिए पसंद करता था.

परमानंद का असली नाम रामशंकर तिवारी है. उस के आश्रम में बच्चे पैदा करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं की लाइन लगी रहती थी. आश्रम में कई राज्यों से महिलाएं आती थीं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार से आने वाली महिलाएं ज्यादा होती थीं. उस के चेले इस बात का प्रचार करते थे कि आश्रम में आशीर्वाद पाने और पूजा करवाने वाली सभी महिलाओं को बेटा होता है. आश्रम में आने वाली औरतें सब से पहले एक जगह पर अपना रजिस्ट्रेशन कराती थीं. इस के लिए 500 रुपए की फीस ली जाती थी. यहां पर आश्रम में काम करने वाली महिलाएं संतान के लिए आने वाली औरतों से बातचीत कर के उन का पूरा विवरण हासिल कर लेती थीं. परमानंद की पूजा देर रात तक चलती रहती थी. इस दौरान कमरे में बाबा और महिला के अलावा कोई नहीं रहता था. परमानंद शरीर से दुबलापतला है. वह अपने को मोटा दिखाने के लिए ऐसे कपड़े पहनता था कि वह मोटा दिखे. वह अपने खाने में पौष्टिक आहार लेता था, जिन में चना, मक्का, काजू और बादाम जैसी चीजों के अलावा सैक्स बढ़ाने वाली चीजें शामिल होती थीं. वह पहले बाराबंकी के स्टेशन रोड पर लोगों की झाड़फूंक करता था. धीरेधीरे जब उस का प्रचारप्रसार हो गया तो उस ने गांव में ही आश्रम बना लिया. कुछ सालों में उस के पास अकूत संपत्ति आ गई. उस के दरबार में पुलिस के कई अफसर भी आनेजाने लगे जिस से उस का इलाके में रुतबा बढ़ गया. उस के पास कई मोटरसाइकिल, स्कौर्पियो, मारुति वैन, औल्टो, ट्रक, ट्रैक्टर के साथ सीमेंटसरिया की एक दुकान भी बताई जाती है. 1989 से ले कर साल 2008 के बीच परमानंद पर तमाम तरह के 9 मुकदमे दर्ज हुए. लेकिन जब उस का कद बढ़ गया तो इन मुकदमों से उस का कुछ बिगड़ा नहीं.

12 मई को बाबा के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी ऐक्ट (अश्लीलता फैलाने) के तहत केस दर्ज हुआ. बाबा का एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिस में वह एक महिला का दैहिक शोषण करता दिख रहा था. इस के बाद कई और लोग सामने आए जिन्होंने परमानंद द्वारा ठगे जाने का आरोप लगाया. 16 मई, सोमवार को एक महिला ने परमानंद के खिलाफ रेप के प्रयास, धोखाधड़ी और मारपीट जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया. इस के बाद बाराबंकी पुलिस ने उस तथाकथित बाबा को पकड़ने का प्रयास शुरू किया तो वह अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट चला गया. हाईकोर्ट ने बाराबंकी पुलिस को परमानंद की गिरफ्तारी करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और सीआरपीसी की धारा 41 ए के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए. 25 मई को बाराबंकी पुलिस ने पाखंडी बाबा रामशंकर तिवारी उर्फ स्वामी परमानंद और उस के ड्राइवर अरविंद पाठक को गिरफ्तार कर लिया है. इस दौरान उस ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है. परमानंद की बात में सचाई है या उस के खिलाफ शिकायत करने वालों में, यह अदालत तय करेगी. यह जरूर सामने आ गया कि बांझपन दूर करने के लिए आज भी औरतें इस तरह के बाबाओं के झांसे में आ जाती हैं, जिस के चलते उन के शोषण का रास्ता साफ हो जाता है.

पुलिस ने रामशंकर तिवारी उर्फ बाबा परमानंद को 3 दिन की रिमांड पर ले कर पूछताछ की तो पता चला कि बाबा के पास करोड़ों रुपयों की जायदाद है. उस के आश्रम में 25 बीघा जमीन है. लखनऊ में उस के पास 2 आलीशान फ्लैट हैं. उस का मामला जहां पहले सामान्य नजर आ रहा था, अब उस पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है.

पंडेपादरियों के कुकर्म

इधर विश्व में सब से बड़े ईसाई कैथोलिक चर्च अपने पादरियों के यौन दुराचार मामलों के चलते बदनाम हो रहे हैं. तमाम प्रयासों के बावजूद पादरियों के कुकर्मों की पोल खुलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. रोमन कैथोलिक पादरियों के सैक्स स्कैंडल की बातें उजागर होते देख कर धर्मराज्य वैटिकन हैरानपरेशान है. चर्च को अपनी चूलें हिलती दिख रही हैं क्योंकि अब आम जनता के नैतिकता के पैमाने बदल गए हैं.

चर्च को अपने पादरियों के इंद्रियनिग्रह की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. 16वें पोप बेनेडिक्ट जगहजगह जा कर प्रार्थना करने के बजाय अपने लंपट पादरियों के कुकर्मों के लिए माफी मांगते नजर आ रहे हैं, पीडि़त लोगों से मिल रहे हैं और बेहद शर्मिंदगी व दुख जता रहे हैं. सदियों तक जो बात ढकी रहती थी, अब छिपाए छिप नहीं पा रही और चर्च के सुख का मुख्य सुख यौनसुख अब संकट में है. उधर, गे अधिकार संगठन, एथेइस्ट कार्यकर्ता और प्रोटेस्टैंट नेता रोमन कैथोलिक चर्च के पीछे पड़े हुए हैं. ये संगठन अपने पादरियों के यौन अपराध के लिए चर्च को कुसूरवार बता रहे हैं और पोप को गिरफ्तार करने तक की बातें कर रहे हैं. आयरलैंड, बैल्जियम, अमेरिका पादरियों के सैक्स स्कैंडल के कारण ‘वर्स्ट हिट’ देश माने जाते हैं. अमेरिका की यात्रा के दौरान पोप बेनेडिक्ट ने स्वीकार किया था कि अमेरिकी चर्च को बरबाद कर देने वाले पादरी सैक्स स्कैंडल से वे बेहद शर्मिदा हैं. पोप ने औपचारिक तौर पर पीडि़तों से माफी मांगी थी. पीडि़तों से क्षमा करने को भी कहा तथा आरोपी पादरियों से पश्चात्ताप करने की अपील की थी.

जुलाई 2008 में पोप बेनेडिक्ट ने आस्ट्रेलिया दौरे में पादरियों द्वारा यौनाचार किए जाने के मामलों के लिए भी माफी मांगी थी. उस समय वहां 107 अभियोग सामने थे. पोप माल्टा में दुराचार के शिकार लोगों से मिले तथा माफी मांगी. उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया तथा युवाओं को भविष्य में पादरियों की सैक्स हवस से बचाने के लिए प्रभावी तरीके लागू किए जाने का आश्वासन दिया था. बेनेडिक्ट वहां 8 पीडि़तों और उन के परिवारों से मिले थे. पीडि़त लोगों से मिल कर पोप रो पड़े थे. वहां 850 में से 45 पादरी दोषी पाए गए. पोप के अलावा आर्कबिशप भी पादरियों के सताए लोगों से माफी मांग रहे हैं. मेलबर्न के कैथोलिक आर्कबिशप डेनिस हार्ट ने पीडि़तों से क्षमायाचना की थी. आर्कबिशप ने इसे चर्च के लिए दुखद और शर्मनाक बताया था. उन्होंने कहा था कि यह मेरे 43 साल के पादरी जीवन का सब से दुखद समय है.

अमेरिका, आयरलैंड, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा तथा अन्य देशों में सैक्स स्कैंडलों पर राष्ट्रव्यापी जांच चल रही है. चर्च अपने पादरियों की नाजायज संतानों की समस्या को भी झेल रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड, जरमनी, फ्रांस, इटली और आस्ट्रेलिया में कई औरतें पादरियों से गर्भवती हो कर उन के अवैध बच्चों को पालने पर मजबूर हैं. कई चर्चों से इन औरतों से समझौते पर साइन करवा कर मुआवजे दे दिए गए हैं. चर्च के सैक्स स्कैंडलों की बदनामी से वैटिकन बारबार मीडिया की आलोचना भी करता रहा है लेकिन वैटिकन इन मामलों को रोक नहीं पा रहा है. चर्चों के सैक्स किस्से घटने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं. मार्च 2010 में न्यूयार्क टाइम्स की सैक्स स्कैंडलों पर कवरेज के लिए आलोचना की गई थी. अखबार ने 200 बहरे बच्चों के साथ दुराचार की खबरें प्रकाशित की थीं.

चर्च पर अपने इंद्रियनिग्रह का नियम भारी पड़ रहा है. दोषियों और पीडि़तों के बीच सौदेसमझौते कराए जा रहे हैं. पैसे दे कर मामलों को खत्म किया जा रहा है. कहीं मामले बाहर तो कहीं अदालतों में निबटाए जा रहे हैं. पीडि़तों को मोटे मुआवजों के भुगतान के चलते कई आर्कडायोसिस, डायोसिस, चर्च दिवालिए हो गए हैं क्योंकि मुआवजे चुकाने के लिए उन्हें अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ीं. चर्च के सैक्स अपराध का अगर कोई रिकौर्ड आंका जाता तो निश्चित ही वह अन्य किसी भी अपराध से अधिक ही होता. शायद इसीलिए चर्च पर सांगठनिक यौन अपराध के आरोप लगते रहे हैं. बैल्जियम पुलिस ने ब्रुसेल्स के कैथोलिक हैडक्वार्टर पर छापा मार कर बाल यौनाचार पर चर्च कमीशन जांच रिकौर्ड व एक कंप्यूटर जब्त किया तो बवाल मच गया. वहां पादरियों पर सैकड़ों आरोप लगे थे. पुलिस द्वारा जब्त रिपोर्ट के बारे में कहा जा रहा है कि वह पादरी द्वारा एक व्यक्ति के यौनशोषण किए जाने की गुप्त रिपोर्ट थी. जौन हर्टगन नामक व्यक्ति ने चर्च के पैनल को अपने शोषण की कहानी इस शर्त पर बताई थी कि वह गुप्त रखी जाए. उस व्यक्ति ने पुलिस के छापे से बात उजागर होने के बाद कहा कि पुलिस ने कैथोलिक चर्च कार्यालयों और एक तहखाने में छापा मार कर उस की निजता पर हमला किया है. इस मामले में चर्च और सरकार आमनेसामने आ गए. छापे का वैटिकन ने भी विरोध जताया. पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि छापा खेदजनक है. हर्टगन चाहते हैं कि वे सभी 475 पुरुष और बच्चे यौनाचार के आरोपों को ले कर पैनल से संपर्क करें और पीडि़त पार्टी के तौर पर ब्रुसेल्स के प्रोसीक्यूटर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं.

नौर्वे के कैथोलिक चर्च के एक पूर्व बिशप जौर्ज मूलर ने नौर्वे पुलिस के सामने एक नाबालिग बच्चे के साथ यौनाचार करने की बात स्वीकार की थी. बाद में मूलर को बिशप पद से हटा दिया गया था. इस खबर की प्रतिक्रियास्वरूप ओस्लो के बिशप बेर्नट ईडसविग ने कुबूल किया कि वे  नौर्वे कैथोलिक चर्च के कुल 4 मामलों से वाकिफ थे. पिछले दिनों आस्टे्रलिया के कैनबरा, गौलबर्न, मेलबर्न, बिसवैन, पर्थ, बानबरी और वागावागा सहित 12 शहरों में पादरियों को यौन दुराचार का दोषी पाया गया. 2008 में स्लीगो, काउंटी स्लीगो में 5 फादर यौनाचार के दोषी पाए गए थे. वहां ब्रदर ग्रेगरी (असली नाम मार्टिन मीने) ने एक लड़के से 4 महीने में 20 से 30 बार यौनाचार करने की बात कुबूली थी. उसे 5 मामलों में 2 साल की कैद हुई. 2005 में बैल्जियम में पूर्व पादरी ल्यूक डी और रोजर एच को मानसिक रोगी बच्चों के साथ सैक्स अपराध में बैल्जियम कोर्ट ने सजा सुनाई थी. इस मामले में आयरलैंड सब से अधिक बदनाम है. यहां का एक सब से कुख्यात मामला ब्रैंडन स्मिथ का था जिस ने 1945 और 1989 के बीच बेल्फास्ट, डबलिन और अमेरिका के 20 से अधिक बच्चों के साथ दुराचार किया था. आयरलैंड में 1930 से 1990 तक करीब 35,000 आयरिश अनाथ बच्चे, किशोर और कुंआरी मांओं को चर्च संचालित 250 इंडस्ट्रियल स्कूलों, सुधारगृहों, अनाथालयों और होस्टलों में भेजा गया था. 90 के दशक में चर्च द्वारा संचालित इन संस्थाओं में सिलसिलेवार यौनाचार की खबरें उजागर होने लगी थीं.

वहां के टैलीविजन कार्यक्रमों ‘डियर डौटर’, ‘वाशिंग अवे द स्टेन’ और ‘विटनैस: सैक्स इन द क्लाइमेट ऐंड सिनर्स’ नामक डौक्यूमैंटरी ने भूचाल सा ला दिया था. ब्रिटेन में भी बनी एक बीबीसी डौक्यूमैंटरी ‘सैक्स क्राइम ऐंड वैटिकन’ से भी चर्च की चूलें हिल गई थीं. 90 के दशक में आयरलैंड सरकार ने पिछले दशकों के यौनाचार मामलों के लिए एक कमीशन बना कर जांच शुरू की थी. 2,600 पृष्ठों की आयरिश कमीशन रिपोर्ट के अनुसार, 1930 से 1990 के बीच हजारों बच्चे यौन शोषण के शिकार बनें. रिपोर्ट में कहा गया कि जांच में करीब 2 हजार गवाहों, 250 से ज्यादा चर्च संचालित संस्थाओं के करीब 2 हजार लोगों की गवाही हुई थी. यह बात भी सामने आई कि सरकारी अधिकारी यौन शोषण रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाए. मुआवजा देने पर सहमति बनी थी. इस राशि के लिए ज्यादातर चर्चों को अपनी संपत्ति सरकार को हस्तांतरित करनी पड़ी. रिपोर्ट के अनुसार वहां कुल 1.2 बिलियन डौलर पीडि़तों को दिया जा चुका है.

इसी तरह खुद अमेरिका में रोमन कैथोलिक डायोसिस के सर्वे पर आधारित अमेरिकी कौन्फ्रैंस औफ कैथोलिक बिशप्स द्वारा अधिकृत 2004 की जौन जे रिपोर्ट में हर दोषी पादरी और पीडि़त के नामों की सूचना उपलब्ध है लेकिन यह गुप्त रखी गई है. अमेरिका में ज्यादातर दोषी यजमानी पादरी बताए जाते हैं लेकिन वे डायोसिस के अधीन होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, दोषी पाए गए करीब 40 फीसदी पादरियों को मानसिक इलाज कार्यक्रमों में भेजा गया तो कुछ को साधनागृहों में भी भेजा गया लेकिन इके बावजूद ये लोग बच्चों से निजी संपर्क बनाने के प्रयास में देखे गए. उत्तरी अमेरिका में खासतौर से पादरियों के मनोविकारों के इलाज की कई संस्थाएं हैं. 80 के दशक में क्रिश्चियन ब्रदर्स द्वारा संचालित न्यूफाउंलैंड के माउंट कैशेल औरफनेज का मामला लोग अभी तक भूले नहीं होंगे. इस संस्था के सदस्यों पर शारीरिक व यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे. मामले में सरकार, पुलिस और चर्च ने आरोपों की जांच में रुचि नहीं दिखाई. लेकिन 1989 में सैंट जौंस के ‘सनडे ऐक्सप्रैस’ ने अनाथालय के 300 से ज्यादा पूर्व विद्यार्थियों के आरोपों को ले कर रिपोर्टें प्रकाशित कीं तो हड़कंप मच गया. बाद में कई मुकदमे दर्ज किए गए. मुकदमों, मुआवजों, समझौतों के चलते अंत में अनाथालय दिवालिया हो गया और उसे बंद करना पड़ा.

अमेरिका के बोस्टन, मेसाच्यूट्स के कार्डिनल और आर्कबिशप बर्नार्ड फ्रांसिस ला को उन की आर्कडायोसिस में यौनाचार के आरोपी पादरियों को बचाने की बात उजागर होने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था. दिसंबर 2002 में पोप जौन पौल द्वितीय ने उन का इस्तीफा मंजूर कर लिया था. बाद में आर्कबिशप बर्नार्ड ला की जगह आए आर्कबिशप सीन पीओ माले को यौनाचार पीडि़तों के मुआवजे के कारण डायोसिस की संपत्ति बेचनी पड़ी तथा कई चर्चों को बंद करना पड़ा. उन्हें 10 करोड़ 20 लाख डौलर के दावे निबटाने पड़े. अमेरिका में केवल 2007 में ही अपने पादरियों की करतूतों के एवज में 5 करोड़ 15 लाख डौलर खर्च करने पड़े. अमेरिकन डायोसिस 1950 से 2009 तक ढाई हजार लाख से ज्यादा डौलर दे चुका है. 1994 में अर्जेंटीना में 47 पादरियों पर यौनाचार के मामले सामने आए. 1995 में यौनाचार के आरोपों के बाद विएना (आस्ट्रिया) के आर्कबिशप हैंस हरमन ग्रोएर को पद से इस्तीफा देना पड़ा था. 2001 से अब तक जो कुल मामले वैटिकन के पास आए हैं उन में से केवल 20 फीसदी बाकायदा कैनोनिकल ट्रायल के लिए भेजे गए. 60 प्रतिशत मामलों में अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई. कार्यवाही के तहत पादरी का चोगा ले लेना, रिटायर कर देना और उसे औपचारिक रूप से लोगों को संबोधित न करने देना शामिल है. सिर्फ 10 प्रतिशत मामलों में आरोपी पादरियों को पद से हटाया गया.

दरअसल, कैथोलिक परंपरा के मुताबिक, सभी पादरियों और बिशपों को अनिवार्य रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है. 325 ईस्वी में कैथोलिक चर्च की पहली सार्वभौम काउंसिल बनी थी. काउंसिल ने पादरियों के लिए जो अनुशासन संहिता बनाई थी उस के तहत सभी पादरियों और बिशपों को अपनी पत्नी या किसी और औरत के साथ सैक्स संबंधों से अलग रहना जरूरी था. एक शादीशुदा व्यक्ति अगर पादरी बनता है तो उस की पत्नी को भी अपने पति के साथ सैक्स संबंधों से अलग रहने पर सहमत होना होगा. हालांकि कई प्रोटेस्टैंट और ईस्टर्न और्थोडैक्स चर्चों में ऐसा नियम नहीं है. येरूशलम में यहूदी पुरोहितों के लिए भी कथित आध्यात्मिक शुद्धि के लिए इंद्रियनिग्रह आवश्यक था. हिंदू धार्मिक संस्कृति में भी अपने पंडेपुजारियों, साधुसंतों, योगियों के लिए ब्रह्मचर्य पर जोर दिया गया है. फिर भी आएदिन स्वामियों, संतोंसाधुओं की सैक्सलीलाएं जगजाहिर हो रही हैं.

विश्वभर की सेनाएं अपने सैनिकों के साथ वेश्याओं, लड़कों को साथ ले कर चलती थीं ताकि उन के सैनिक युद्ध के वक्त तनावमुक्त रह सकें, लेकिन दुनिया के तकरीबन हर धर्म के फौजियों पर पवित्रता के नाम पर तरहतरह की बंदिशें थोपी गई हैं. इस का नतीजा है कि आज धर्मस्थल सैक्स के सब से बड़े अड्डे बन रहे हैं. आखिर इन ढोंगियों के पास लोग जाते ही क्यों हैं? धर्म के नाम पर पाखंड का यह आवरण क्यों? इस से यह बात तो जाहिर होती ही है कि किसी भी धर्म की ताकत नहीं कि वह अपने लोगों की प्राकृतिक जरूरतों को रोक सके, इसलिए इंद्रियनिग्रह, संयम, ब्रह्मचर्य जैसे ढोंग धर्मों को बंद ही कर देने चाहिए.