सरिता विशेष

‘प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है…’ यह आम धारणा है पर यह प्यार नहीं आकर्षण होता है.

आमतौर पर पहली नजर में हमें किसी का चेहरा पसंद आ जाता है, किसी की आंखें पसंद आ जाती हैं या किसी का बात करने का स्टाइल पसंद आ जाता है या फिर किसी का व्यवहार. इसे पहली नजर का प्यार कहते हैं. स्कूल कालेज के दिनों में या कम उम्र में होने वाला यह प्यार ज्यादातर आकर्षण ही होता है.

आकर्षण ज्यादातर एक अस्थायी प्यार होता है, जो एकसाथ कई लोगों से हो सकता है. यह जरूरी नहीं कि हमें जिस के प्रति आकर्षण हो रहा है, उसे भी हमारे अंदर कोई बात पसंद आ जाए या फिर हम से प्यार हो जाए. थोड़ी बातचीत शुरू हो गई तो हम सामने वाले पर अपना हक समझने लगते हैं और यह जाने बिना कि उस की सोच हमारे बारे में क्या है, हम उस पर अधिकार जताते हैं, लेकिन यदि वह हमारी अपेक्षाओं पर खरा न उतरा तो बहुत जल्दी ही यह आकर्षण खत्म भी हो जाता है, या फिर एक जनून और जिद में बदल जाता है, जिस का नतीजा अच्छा नहीं होता. इसलिए यह जरूरी है कि प्यार और आकर्षण के फर्क को समझते हुए ही आगे बढ़ें.  

यह प्यार है या कुछ और : यह उम्र ऐसी होती है जिस में प्रेमीप्रेमिका को यह पता नहीं होता कि वे प्यार में हैं या फिर यह महज आकर्षण ही है. अपने इसी आकर्षण को प्यार मान कर वे आगे बढ़ने लगते हैं, लेकिन फिर जब एक साथी को एहसास हो जाता है कि यह प्यार नहीं था तो दोनों के लिए हजार मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं. इसलिए यह अटकले न लगाएं कि आप प्यार में हैं बल्कि अपने रिश्ते को समय दें और अपना ध्यान सिर्फ अपने कैरियर पर लगाएं.

जीवन भर का साथ नहीं है यह : कई लोग इस तरह की रिलेशनशिप को ले कर बहुत सीरियस हो जाते हैं और सोचने लगते हैं कि आज जो हमारा साथी है वह जीवन भर रहेगा, उम्र बढ़ने के साथसाथ मैच्योरिटी आती है और हमारे विचारों में आई परिपक्वता हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि हमारे लिए क्या सही है और क्या नहीं. इसलिए हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें.

सीरियस न हों : अगर आप अपने साथी को ले कर बहुत ज्यादा गंभीर हैं तो भी क्या कर लेंगे. अभी शादी तो कर नहीं सकते, लेकिन ये बातें सोचसोच कर अपना वक्त जरूर बरबाद कर लेंगे. इसलिए लड़की से दोस्ती हो गई है और वह आप को अच्छी लगने लगी है तो कोई बात नहीं, इस बारे में ज्यादा न सोचें कि कहीं आप उसे प्यार तो नहीं करते आदि बल्कि यह सोचें कि अभी मुझे उस के काबिल बनना है और अपना फोकस प्यार पर न कर के कैरियर पर करना है.

फिजिकल न हों : इस उम्र में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है और फिजिकल आकर्षण के चलते किशोर जानकारी के अभाव में कुछ ऐसे कदम उठा लेते हैं जिस से बाद परेशानी खड़ी हो जाती है.

यह कैरियर बनाने का समय है : प्यार के झंझट में न ही पड़ें तो अच्छा है वरना बेकार की टैंशन तो होगी ही साथ ही घर में किसी को पता चल गया तो एक और बवाल से निबटने के लिए तैयार रहना होगा. 

वैसे भी यह समय कैरियर बनाने का है. ये सब करने के लिए तो पूरी उम्र पड़ी है, लेकिन अगर पढ़ाई में पिछड़े तो सब दोस्तों और भाईबहनों से पीछे रह जाएंगे और जिंदगी भर पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा.   

आकर्षण और प्यार में फर्क समझें

– प्रेम समय के साथ धीरेधीरे आगे बढ़ता है लेकिन आकर्षण अचानक पहली नजर में ही हो जाता है.

– आकर्षण तीव्र मगर थोड़़े समय के लिए होता है लेकिन प्यार होने में समय लगता है. 

– प्रेम में व्यक्ति पार्टनर को गुणअवगुणों के साथ स्वीकारता है लेकिन आकर्षण की स्थिति में उस की आइडियल इमेज दिमाग में रहती है.

– आकर्षण में किशोर अपनी रिलेशनशिप को रियल फीलिंग्स के बजाय कल्पना पर टिकाता है.

– आकर्षण में 2 लोग लवर्स हो सकते हैं लेकिन रियल फ्रैंड्स नहीं, जो एकदूसरे की भावनाओं को अच्छे से समझ सकें.

– आकर्षण में फिजिकल रिलेशनशिप पर ज्यादा जोर रहता है, उन के लिए इस का इंतजार करना मुश्किल ही नहीं असंभव होता है और ऐसे में वे अपनी सीमाएं पार कर जाते हैं.

 आकर्षण हो तो क्या करें

– आकर्षण में इतना न खो जाएं कि बाकी सब भूल जाएं. पढ़ाई और कैरियर की कीमत पर कुछ न करें. 

– अकेले मिलने से बचें. दोस्तों के ग्रुप में मिलें.

– अनजानी जगहों पर एकसाथ जाने से बचें. मिलना भी है तो पब्लिक प्लेस पर मिलें ताकि भावनाओं पर नियंत्रण रखा जा सके.

– दोस्त या पार्टनर की किसी भी गलत मांग या जिद को पूरा न करें.