18 सितंबर, 2016 को उभरती अभिनेत्री सुरवीन चावला ने यह खुलासा कर सनसनी फैलाने की कोशिश की थी कि जब वे फिल्मों में काम करने के लिए हाथपांव मार रही थीं तब कई डायरैक्टर काम देने के एवज में उन्हें अपने साथ सोने को कहते थे. सुरवीन का यह खुलासा चौंकाने वाला नहीं था, क्योंकि लोग जानतेसमझते हैं कि यह कोई नई बात नहीं, अकसर फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा ही होता है कि फिल्में हथियाने के लिए नवोदित अभिनेत्रियों को ऐसे समझौते करने पड़ते हैं जिन में शीर्ष पर पहुंचने के लिए खुद की देह को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करना पड़ता है. सनी लियोनी, शर्लिन चोपड़ा और श्वेता प्रसाद जैसी पोर्न अभिनेत्रियां अब बेहतर मुकाम पर हैं. उन के पास नाम भी है और पैसा भी. इन तीनों ने अलगअलग समय में एक बात स्वीकारी थी कि निर्मातानिर्देशकों को खुश करने के लिए और अपनी पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए उन्होंने उन का बिस्तर भी गरम किया है.

यह ठीक है कि ये तीनों एक इमेज में बंध कर रह गई हैं लेकिन तरक्की तो इन्होंने की है. फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाने हेतु लाखों युवतियां संघर्ष करती हैं, लेकिन कामयाब कुछ ही हो पाती हैं. इन कुछ में से भी कुछ में गजब की अभिनय प्रतिभा होती है, जिस के दम पर ये पहचान बना लेती हैं पर कइयों में अभिनय प्रतिभा होते हुए भी उन्हें वह सब यानी सैक्स करना पड़ता है.

हर क्षेत्र में होता है ऐसा

यह सोचना गलत है कि ऐसा सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में ही होता है जहां युवतियां तरक्की के लिए अपने शरीर का इस्तेमाल करती हैं, बल्कि ऐसा हर जगह होता है. आएदिन ऐसे मामले दोनों पक्षों में मतभेद के चलते या दूसरी किसी वजह से उजागर होते रहते हैं. अगस्त, 2016 में हमेशा सुर्खियों में रहने वाले दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से खबर आई थी कि कैंपस में छात्राएं देर रात तक प्रोफैसर्स के साथ मौजमस्ती और पार्टियां करती हैं तथा उन्हें देह सुख देती हैं.

ऐसा क्यों? जाहिर है इन छात्राओं को समझ आ गया था कि अगर अच्छे अंक चाहिए और दूसरी उपलब्धियां व सहूलतें हासिल करनी हैं तो प्रोफैसर्स को तो खुश करना ही पड़ेगा, जो इन्होंने किया अर्थात अपने कैरियर के आगे सैक्स या दूसरी वर्जनाओं या संस्कारों का रोना रोने के बजाय उन्होंने बहुत व्यावहारिक रास्ता चुना जिसे गलत या सही ठहराने का कोई पैमाना किसी के पास नहीं है. यह कतई नई या हैरत की बात नहीं है कि युवतियां तरक्की के लिए सैक्स का रास्ता चुनें, फर्क इतना है कि कुछ हमेशा ऐसा करती हैं तो कुछ कभीकभी जरूरत के मुताबिक. जो नहीं कर पातीं वे एक उपलब्धि हाथ से खो देती हैं, पर यह कोई नियम या सिद्धांत नहीं है कि सभी जगह ऐसा होता हो बल्कि अधिकांश युवतियां जो पुरुष मानसिकता को समझती हैं वे सैक्स को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं.

क्या है पुरुष मानसिकता

खूबसूरत युवतियां और वर्जना रहित सैक्स हर पुरुष की चाहत होती है, लेकिन जरूरी नहीं कि वे ही इसे व्यक्त करें. कई बार युवतियां खुद उन्हें इस का आमंत्रण देती हैं और कई पुरुष ऐसे हालात पैदा कर देते हैं कि उन की मुराद बैठेबैठाए ही पूरी हो जाती है. हर क्षेत्र में पुरुषों का दबदबा कायम है यानी वे शीर्ष पर हैं तो यह सिस्टम या सामाजिक वजहों से हो सकता है, लेकिन एक समझदार युवती युवक की इस कमजोर नब्ज सैक्स को पहचानती है. प्राइवेट कंपनियों में तो युवतियां तरक्की पाने या सहूलतों के लिए ऐसे लटकेझटके दिखाती हैं कि अच्छेअच्छे उन के आगे पानी भरते नजर आते हैं.

ऐसी ही एक कर्मचारी मोना (बदला हुआ नाम) की मानें तो जब भी उसे छुट्टी या दूसरी सुविधाएं चाहिए होती हैं तो वह बौस के पास जाने से पहले होमवर्क करती है और बौस के चैंबर में दाखिल होते ही पूरी शिष्टता दिखाती है. उस दिन वह ऐसे कपड़े पहन कर आती है कि उभार दिखें. कुरती ढीली बड़े गले वाली हो. बस, थोड़ा सा झुक कर बात करना ही काफी है और बौस पैन उठा कर ऐप्लिकेशन पर दस्तखत करने में देर नहीं करता.

यह तो हुई छुट्टी या सहूलत की बात, लेकिन जब जल्द प्रमोशन चाहिए तो जाहिर है इस से आगे जाना पड़ता है और फिर वांछित पदोन्नति मिल जाती है, जिस के लिए आम कर्मचारी को सालों इंतजार करना पड़ता है. ऐसा सिर्फ प्राइवेट सैक्टर में ही नहीं होता बल्कि सरकारी नौकरियों में भी होता है. आएदिन ऐसी खबरें सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन ऐसा तब होता है जब सबकुछ लुटाने के बाद भी मनोरथ पूरा नहीं होता.

1997 की बात है. भोपाल के नजदीक एक नवोदय विद्यालय में प्रिंसिपल ने अनुबंध पर नौकरी कर रही एक टीचर माया (बदला हुआ नाम) से वादा किया कि वह उस की नौकरी पक्की करवा देगा. इस के लिए उसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिल्ली चलना पड़ेगा. जरूरत की मारी माया तैयार हो गई और कई बार प्रिंसिपल के साथ दिल्ली गई. उस ने दूर की सोच कर अधेड़ प्रिंसिपल को अपने साथ सैक्स करने दिया, लेकिन बावजूद इस के उस की नौकरी पक्की नहीं हुई तो वह परेशान हो गई, क्योंकि उन के संबंध अब स्टाफ के अलावा कसबे में भी चर्चा का विषय बन चुके थे.

परेशानियां भी कम नहीं

माया बताती है कि उस प्रिंसिपल की कोशिशों में कमी नहीं थी, लेकिन अब दिक्कत यह थी कि उस की शादी तय हो गई थी और प्रिंसिपल संबंध बनाए रखने का दबाव बनाने लगा था. माया इस दबाव में नहीं आई और उस ने अपने घर वालों की मरजी के अनुसार शादी कर ली. प्रिंसिपल ने शादी के बाद भी उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की पर वह समझ गई थी कि प्रिंसिपल की नीयत में खोट आ चुका है इसलिए जैसेतैसे पति से बात छिपा कर वह उस से निबट पाई. हालांकि आज 19 साल बाद भी वह डरती है कि कहीं वह प्रिंसिपल उस के पति के सामने न आ खड़ा हो.

विलासक सैक्स तरक्की की सीढ़ी है पर यह सीढ़ी कभी भी जमीन से लड़खड़ा सकती है. राजनीति में आएदिन ऐसे किस्से सुने जा सकते हैं कि फलां राजनेत्री जल्द तरक्की करेगी, क्योंकि वह पार्टी के फलां शीर्ष नेता का बिस्तर गरम करती है या उसे खुश करती है. मध्य प्रदेश की चर्चित कांगे्रसी नेत्री सरला मिश्रा हत्याकांड के समय ऐसी बातें खूब उठी थीं. उत्तर प्रदेश का अमरमणिमधुमति प्रसंग भी इस का अपवाद नहीं था. साहित्य के क्षेत्र में भी युवतियां शिखर पर पहुंचने के लिए देह की सीढ़ी का सहारा लेती हैं. नवोदित कवयित्रियों की देश में भरमार है जो बड़ेबड़े कवि सम्मेलनों में शिरकत करने हेतु बड़े कवि या साहित्यकार की शिष्या बन जाती हैं और मंच हथियाने में कामयाब हो जाती हैं.

यही हाल खेलों का भी है. कई दफा खेल संघों और आकाओं पर खिलाडि़यों के शोषण के आरोप लग चुके हैं, लेकिन इन आरोपों का दूसरा पहलू बहुत बारीकी से फिल्म ‘चक दे इंडिया’ में दिखाया गया था, जिस में कोच बना शाहरुख खान एक जूनियर खिलाड़ी को कैप्टन बना देता है तो इस पर एक सीनियर खिलाड़ी तिलमिला उठती है. एक मैच के दौरान वह बाथरूम में शाहरुख खान से एक सैक्सी अदा से यह पूछती है कि आखिर उस में ऐसा क्या था जो मुझ में नहीं यानी सैक्स से कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है. युवतियां प्रगति के लिए सैक्स से परहेज नहीं करतीं, यह बात कितने हर्ज की है और कितनी नहीं, लेकिन यह बहस बेमानी है, क्योंकि अब अदालतें भी मानने लगी हैं कि औरत के शरीर पर पहला हक खुद उस का है. इसे अपने मुताबिक इस्तेमाल से उसे रोका नहीं जा सकता.

एहतियात जरूरी

लेकिन ये सब इतना आसान नहीं है जितना देखनेसुनने में लगता है. अगर संबंध उजागर हो जाते हैं तो विवाद, फसाद भी खूब होते हैं और आखिर में पुरुष प्रधान समाज महिला को ही दोषी ठहराने में कायमाब भी हो जाता है.

कई दफा तो नौबत मारपीट और हत्या तक की आ जाती है पर ऐसा तब होता है जब पुरुष सैक्स को अपना हक समझने लगता है और ऐच्छिक अनुबंध तोड़ अपनी पर उतारू हो जाता है. ऐसे मामले उजागर होने पर बदनामी महिला की ही होती है इसलिए उसे कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए. सावधानियां ये हैं कि सैक्स से तरक्की मिल जाए तो उस का राग सहकर्मियों के बीच या कहीं और नहीं अलापना चाहिए.

दूसरा, संबंध बनाने की कोशिश तभी करनी चाहिए जब काम हो जाए. बौस या संबंधित पुरुष की पारिवारिक पृष्ठभूमि देख लेनी चाहिए आमतौर पर घरगृहस्थी के बंधन में बंधे पुरुष भी नहीं चाहते कि ये सब उजागर हो. इसलिए उन पर हलका सा दबाव बना कर रखना चाहिए. मिसाल माया की लें तो उस ने सबकुछ जल्दबाजी में किया था इसलिए धोखा खा गई. संबंध बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि युवक रिकौर्डिंग या वीडियो फिल्म न बना रहा हो. ऐसी चीजें आखिर में युवती के लिए ही नुकसानदेह साबित होती हैं. इसी तरह संबंध बनाने की जगह भी अहम होती है. युवक की प्राथमिकता शहर या शहर से बाहर की हो या फिर उस का घर या दफ्तर, इस का ध्यान रखा जाना चाहिए. इस से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस की मनशा क्या है.

आमतौर पर घर या दफ्तर में संबंध बनाने वाले युवक कम धोखेबाज होते हैं और डरपोक भी इसलिए उन से ज्यादा खतरा नहीं रहता.                

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