एक नामचीन कथाकार चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने 1914 में एक कहानी लिखी थी, जिस का शीर्षक था, ‘उस ने कहा था.’ यह कहानी 100 साल बाद भी रुचि और जिज्ञासा से पढ़ी जाती है. यह एक ऐसी प्रेम कहानी है, जिस में नायक लहना सिंह बचपन की अपनी प्रेमिका के पति और बेटे को बचाने के लिए अपनी जान दे देता है. लहना सिंह कहानी की नायिका सूबेदारनी को 12 साल की उम्र में अमृतसर की गलियों में मिला था और हलवाई की दुकान पर रोजाना 8 साल की लड़की से पूछता था कि तेरी सगाई हो गई कि नहीं, जवाब में लड़की एक शोख अदा से शरमा कर धत कह कर भाग जाती थी. पर एक दिन अप्रत्याशित तरीके से यही सवाल पूछने पर वह लहना सिंह को जवाब देती है कि देखते नहीं शादी का दुपट्टा पहने हुए हूं.

इस जवाब पर लहना सिंह अनमना हो उठता है. फिर अरसे बाद वह सूबेदारनी से उस के पति के कहने पर मिलता है तो वह उसे इस वचन से बांध देती है कि युद्ध में वह पति और बेटे की रक्षा करेगा. यह कहानी विश्वयुद्ध के बाद लिखी गई थी, इसलिए युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है. लड़ाई में स्थिति ऐसी बनती है कि लहना सिंह खुद जान दे कर प्रेमिका के सुहाग और बेटे की जान बचाता है. लहना सिंह खुद शादीशुदा है पर आखिरी सांस लेतेलेते उसे सिर्फ बचपन की अपनी प्रेमिका से ताल्लुक रखती बातें ही याद आती हैं. पूरी कहानी में कहीं लहना सिंह सूबेदारनी से अपने प्यार का इजहार नहीं करता पर प्यार करता है, यह पाठक सहज ही समझ जाता है. इस एक कहानी ने चंद्रधर शर्मा को साहित्य जगत में अमर कर दिया, क्योंकि हिंदी की यह पहली गैर धार्मिक कहानी थी, जो प्लैटोनिक लव पर आधारित थी.

सुरक्षित है यह

प्लैटोनिक लव में प्यार व्यक्त नहीं होता और यह अकसर एकतरफा होता है. दूसरे को इस का एहसास होता है पर यह एहसास प्रतिक्रियाहीन होता है, जिसे इजहार भी समझा जा सकता है और इनकार भी. लेकिन जब कोई औपचारिक प्रस्ताव ही नहीं रखा गया तो क्या प्रतिक्रिया और क्या प्रतिक्रियाहीनता यानी यह शब्दों का मुहताज नहीं बल्कि एक एहसास भर है जो उम्र भर रहता है. जाहिर है प्लैटोनिक लव सुरक्षित है, क्योंकि यह अपने महबूब से कोई अपेक्षा या उम्मीद नहीं रखता. सूफियों की तरह यह प्यार की वह अवस्था भी नहीं है, जिस में साकार और निराकार में भेद खत्म हो गए. आम प्यार करने वालों की तरह इस में भी हाड़मांस के 2 पुतलों और चेतना का होना अनिवार्य है, पर यह अनिवार्यता अपने प्रेमी से कुछ चाहती नहीं है, न ही इस में कुछ देने की शर्त होती है. कोई है जिसे हम प्यार करते हैं, चाहते हैं यह अनुभूति जाहिर है किसी को कोई क्षति नहीं पहुंचाती.

आजकल ही नहीं बल्कि सदियों पहले से ‘आई लव यू’ कह कर ‘आई लव यू टू’ सुनने की आदिम ख्वाहिश के बाद प्यार का जो सिलसिला प्रेमियों के बीच शुरू होता है, वह अकसर किसी फसाद या अप्रिय अलगाव पर जा कर ही खत्म होता है, क्योंकि इस में प्यार के बदले प्यार की चाहत होती है और यह न मिले तो असफल प्रेमी या तो खुदकुशी कर लेता है या फिर जिसे जीजान से चाहने का दावा करता है उस की हत्या तक कर देता है. ऐसे समाचार आएदिन अखबारों में छपते रहते हैं और चैनल्स पर भी दिखाए जाते हैं. लेकिन प्लैटोनिक लव इस का अपवाद है, क्योंकि यह व्यक्त नहीं होता, इसलिए किसी प्रतिदान का सवाल ही इस में नहीं उठता. इस में प्रेमी जिसे चाहता है उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाता और न ही उसे पाने की जिद पाले रखता है. उस के लिए प्रेमी का होना ही काफी होता है.

सुरक्षा या असुरक्षा

तमाम चिंतक, साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक प्यार की व्याख्याएं तरहतरह से करते रहे हैं, हालांकि वे व्यापक हैं पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचतीं या पहुंचातीं.

प्यार आमतौर पर भावनात्मक और सामाजिक सुरक्षा के लिए किया जाता है यानी असुरक्षा की भावना प्यार का जज्बा पैदा करती है और जब प्यार व्यक्त हो जाता है, तो उस में सैक्स भी आ जाता है जो प्रेमियों में पजेसिवनैस पैदा करता है  इस स्थिति से बचना मुश्किल है इसलिए प्यार को कांटो वाली राह बताया जाता है, जिस पर चलने में तो मजा आता है, लेकिन मंजिल पर पहुंचने के बाद चलने के पहले जैसा एक खालीपन का एहसास प्रेमियों को होने लगता है. वे न तो एक हो पाते हैं और न ही एकदूसरे से आसानी से अलग हो पाते हैं. प्लैटोनिक लव सुरक्षा या असुरक्षा की भावना से कोसों दूर होता है. इस में सैक्स तो दूर की बात है कोई इच्छा भी सामने वाले से नहीं होती. एक ऐसा प्यार जिस में कोई कसमेवादे नहीं होते, इसलिए इस में दिल टूटता ही नहीं. एक ऐसा प्यार जो वाकई दिल की गहराइयों से होता है, पर व्यक्त नहीं किया जाता.

प्लैटोनिक लव प्रेमियों को अपनी मरजी से जीने का हक देता है, इस के बाद भी खत्म नहीं होता. प्रेमिका की शादी कहीं और हो जाना प्रेमी के लिए कोई तनाव या झंझट वाली बात नहीं होती. वह किसी और से प्यार करे तो कोई चिंता या कुढ़न नहीं होती, क्योंकि इस में कोई किसी पर किसी तरह का हक नहीं जताता.

इसलिए भरोसेमंद भी है

तकनीक के इस दौर में प्यार करने का तरीका और सलीका दोनों बदले हैं, जिन्होंने कई चाहतें और जरूरतें पैदा कर दी हैं, ऐसे में हालांकि प्लैटोनिक लव एक अवधारणा भर लगती है, क्योंकि जिंदगी और दुनिया अब बजाय भावनाओं के पैसे से संचालित होने लगी है. इस दौर में लोग खुद मशीन बन गए हैं, इसलिए उन से प्यार में त्याग, बलिदान और सर्वस्व निछावर करने की उम्मीद रखना, उन के साथ ज्यादती है. प्रेमीयुगल एकदूसरे पर शर्तों पर टिका भरोसा करते हैं, जिस से प्यार की अवधि छोटी हो गई है, इसलिए अकसर वह कई गुत्थियों से भरी होती है. प्यार को बंधन कहने वाले भी गलत नहीं ठहराए जा सकते, लेकिन प्लैटोनिक लव तो आजादी देता है. उस की बुनियाद एक पाकसाफ जज्बे पर टिकी होती है इसलिए वह विश्वसनीय भी है. आजादी कभी शक नहीं करती, पर बांधने वाली बातें प्रेमियों को अविश्वास से भर देती हैं.

अकसर युवक अपनी किसी नजदीकी रिश्तेदार मसलन, भाभी या चाची से प्यार कर बैठते हैं, लेकिन उन से कोई शारीरिक इच्छा नहीं रखते, क्योंकि रिश्तेनातों की मर्यादाएं भी वे जानते हैं और उन का पालन भी करते हैं. उन्हें अपना भाई या चाचा दुश्मन नहीं लगते, क्योंकि प्रेयसी की जिंदगी में उन का रोल वे सहज स्वीकार लेते हैं और वक्त रहते खुद भी शादी कर लेते हैं. अवैध संबंध एक अलग मुद्दा और विषय है पर यह वैध प्यार, जिसे व्यक्त नहीं किया जा सकता, किसी अविश्वास का शिकार नहीं होता. उम्र का आकर्षण भी इसे पूरी तरह नहीं कहा जा सकता और न ही दैहिक दायरों में भावनाओं को बंधा कहा जा सकता है सिर्फ प्लैटोनिक लव होता है जो किसी को किसी से भी हो सकता है.

कमजोर नहीं होते ये

अफलातूनी या परालौकिक प्रेम भी प्लैटोनिक लव को कहा जाता है जिस के बारे में प्यार करने वाले मुंह बिदका कर यह कहने का हक रखते हैं कि जब कुछ चाहा नहीं, लियादिया नहीं तो प्यार किस बात का. यह तो बुजदिलों और पागलों वाली सी बात हुई. दरअसल, प्लैटोनिक लव कायर नहीं होता और न ही उस के पीछे प्यार व्यक्त कर देने पर सामने वाले को हमेशा के लिए खो देने का डर होता है. चूंकि डर होता ही नहीं है इसलिए इस में कायरता के होने का सवाल ही पैदा नहीं होता. प्यार दरअसल, व्यक्त तभी होता है जब उस में कुछ पा लेने या हासिल करने की भावना आ जाती है. जीतहार, बहादुरी और बुजदिली जैसी बातें भी प्यार का जज्बा होने के बाद आती हैं यानी हर प्यार शुरुआत में प्लैटोनिक होता है, लेकिन जल्द ही इच्छाओं से घिर कर प्लैटोनिक नहीं रह जाता.प्लैटोनिक लव की तुलना उस बीज से किया जाना हर्ज की बात नहीं जो जमीन के अंदर है और अंकुरित भी हुआ है पर पेड़ बन कर बाहर नहीं आना चाहता. ऐसा क्यों? इस का जवाब आज तक कोई नहीं दे पाया और न ही दे पाएगा, क्योंकि बीज से वृक्ष बनने की प्रक्रिया बीज को नष्ट कर देती है, लेकिन अंकुरित बीज का अपना एक अलग अस्तित्व होता है.

सीधेसीधे कहा जाए तो प्लैटोनिक लव करने वाले ज्यादा परिपक्व और धैर्य वाले होते हैं जो यह समझते हैं कि पेड़ कभी भी प्राकृतिक या गैर प्राकृतिक वजहों से नष्ट हो सकता है इसलिए प्यार की जो भावनाएं हैं उन्हें अपने तक रखो, इच्छाएं और वासनाएं मत पालो जो अकसर तकलीफ देती हैं. इसलिए प्यार के प्रचलित प्रकार में प्लैटोनिक लव सब से ज्यादा सुरक्षित और विश्वसनीय है.