सरिता विशेष

नेहा अपने कालेज में बहुत मशहूर थी. वह पढ़ाई में ही नहीं बल्कि कालेज में होने वाले सभी इवैंट्स में भी हिस्सा लेती थी. स्मार्ट और चुलबुली नेहा की सब से दोस्ती भी जल्दी हो जाती थी, क्योंकि वह हरदम किसी की भी मदद करने को तैयार रहती थी. नेहा का कालेज कोऐड था. ऐसे में नेहा की दोस्ती युवकों से भी थी.

नेहा की परवरिश कुछ ऐसे माहौल में हुई थी कि वह कभी युवक युवती में भेद भी नहीं समझती थी. नेहा के कालेज में ही निशांत भी पढ़ता था. उस की भी नेहा से बातचीत होती रहती थी. कई बार वह कुछ ज्यादा ही खुल कर हंसीमजाक कर लेता था. नेहा भी उस से अच्छे दोस्त की तरह खुल कर बात करती थी. नेहा के इस अंदाज से निशांत को लगा कि वह नेहा के व्यवहार का लाभ उठा सकता है.

शुरुआत में निशांत ने 1-2 बार नेहा को ऐसा मैसेज किया, जो दोस्ती के दायरे से बाहर था. नेहा ने शुरू में ऐसे मैसेज को अनदेखा किया, जिस से निशांत का साहस और बढ़ गया. उस ने इसे नेहा की सहमति समझ लिया. एक बार तो निशांत ने नेहा को ऐसा सैक्सी मैसेज भेज दिया कि नेहा के लिए उसे सहन करना संभव नहीं रह गया था. वह गुस्सा या परेशान होने के बजाय निशांत से मिली और समझदारी से उसे बताया कि निशांत मैं तुम्हें दोस्त समझती हूं. मैं दोस्ती की सीमाओं को जानती और मानती हूं. मेरे लगाव और प्यार को कभी यह मत मान लेना कि मैं सैक्स के लिए तैयार हूं. निशांत को जिस अंदाज में नेहा ने समझाया उस से निशांत पूरी तरह से सहम गया.

बात केवल नेहा की ही नहीं है. आमतौर पर ऐसा होता है कि खुले दिल से बात करने वाली युवती से युवक सैक्स की अपेक्षा करने लगते हैं. युवकों को लगता है कि जो युवती फैशनेबल है, खुल कर हर मुद्दे पर बात करती है, वह सैक्स के लिए तैयार हो जाएगी. खुलेपन को सैक्स से जोड़ना अच्छी आदत नहीं है. इस तरह की हरकतों से आप अपना अच्छा दोस्त खो देते हैं. टीनएज और कालेज के दिनों में यह बहुत देखा जाता है. जरूरी यह है कि जिन रिश्तों में मुलाकात, प्यार और लगाव हो वहां पर सैक्स की दरकार गैर जरूरी होती है. इस से रिश्ते बनने के बजाय बिगड़ सकते हैं. समाजशास्त्री डाक्टर दीपा राय कहती हैं, ‘‘सहशिक्षा कालेज की ही बात नहीं है. समाज में जहां भी युवकयुवतियां आपस में मिलते हैं वहीं यह धारणा बन गई है. इसे सुधारने की जरूरत है. यह समझने की जरूरत है कि मुलाकात, प्यार और लगाव सैक्स से अलग होता है.’’

न सहें ऐसे हालात

सब से अधिक जरूरी यह है कि ऐसे हालात जब युवतियों के सामने आएं तो वे दबें या डरें नहीं बल्कि खुल कर अपनी बात पूरे तर्क के साथ रखें. जिस से गलत सोच रखने वाले युवक पहली बार में ही समझ जाएं और जब कोई समझाने पर भी न समझे तब उस के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करना भी जरूरी हो जाता है.

कई बार युवतियां इस भय से अपनी बात को सामने नहीं लातीं कि कहीं उन्हें ही गलत न समझ लिया जाए. ऐसे में उन की चुप्पी को लोग मौन सहमति समझ लेते हैं. तब युवकों की हरकतें और बढ़ने लगती हैं. दोस्ती में मुलाकात, प्यार और लगाव अपनी जगह हैं. इस को सैक्स से दूर ही रखा जाए तभी संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है. संबंधों में जब सैक्स आता है तो न केवल संबंध टूटते हैं बल्कि अपराध की भी संभावना  रहती है.

सैक्स से दूर रह कर परेशानियों से बचाव

समय बदल रहा है. सैक्स को ले कर युवतियों की सोच भी बदल रही है. अब सैक्स के बाद आने वाली परेशानियों से बचाव के लिए भी युवतियां तैयार रहती हैं. प्लास्टिक सर्जन के रूप में काम कर रही डाक्टर रिचा सिंह बताती हैं, ‘‘शादी के समय युवतियां हमारे पास आती हैं तो उन का एक ही सवाल होता है कि हम ने शादी से पहले सैक्स किया है, इस बात का पता हमारे होने वाले पति को न चले, इस के लिए क्या करें? युवतियों को जब इस बारे में सही राय दी जाती है तो भी वे मौका लगते ही सैक्स को ऐंजौय करने से नहीं चूकतीं.’’

विदेशों में तो सैक्स को ले कर तमाम तरह के सर्वे होते रहते हैं पर हमारे देश में ऐसे सर्वे कम ही होते हैं. कई बार ऐसे सैंपल सर्वे में युवतियां अपने मन की पूरी बात सामने रखती हैं, जिस से पता चलता है कि सैक्स को ले कर युवतियों में नई सोच जन्म ले चुकी है. डाक्टर रिचा कहती हैं, ‘‘शादी से पहले आई एक युवती की समस्या को एक बार सुलझाया गया तो कुछ दिनों में वह दोबारा आ गई और बोली मैडम एक बार फिर से गलती हो गई.’’

सैक्स रोगों की डाक्टर प्रभा राय बताती हैं, ‘‘हमारे पास ऐसे मामले ले कर कई युवतियां आती रहती हैं. वे जानना चाहती हैं कि इमरजैंसी पिल्स को कितनी बार खाया जा सकता है. कई युवतियां तो बिना किसी तरह की सलाह के इस तरह की गोलियों का प्रयोग करती हैं. कुछ युवतियां तो गर्भ ठहर जाने के बाद मैडिकल स्टोर से गर्भपात की दवा ले कर खा लेती हैं.’’

सैक्स को ले कर बदल रही सोच

सैक्स अब ऐंजौयमैंट का साधन बन गया है. युवकयुवतियां भी खुद को अलगअलग तरह की सैक्स क्रियाओं के साथ जोड़ना चाहते हैं. इंटरनैट के जरिए सैक्स की फैंटेसीज अब चुपचाप बैडरूम तक पहुंच गई हैं. जहां केवल युवकयुवतियां आपस में तमाम तरह की सैक्स फैंटेसीज को करने का प्रयास करते हैं. इंटरनैट के जरिए सैक्स की हसरतें चुपचाप पूरी होती रहती हैं. सोशल मीडिया, फेसबुक और व्हाट्सऐप इस में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. फेसबुक पर युवकयुवतियां दोनों ही अपने निक नेम से फेसबुक अकाउंट खोलते हैं और मनचाही चैटिंग करते हैं. इस में कई बार युवतियां अपना नाम युवकों की तरह रखती हैं. जिस से उन की पहचान न हो सके. चैटिंग करते समय इस बात का खास ध्यान रखती हैं कि उन की सचाई किसी को पता न चल सके. यह बातचीत चैटिंग तक ही सीमित रहती है. बोर होने पर फ्रैंड को अनफ्रैंड कर नए फ्रैंड को जोड़ने का विकल्प हमेशा खुला रहता है.

समाजशास्त्री डाक्टर मधु राय कहती हैं, ‘‘पहले ऐसी बातचीत को मानसिक रोग माना जाता था. समाज भी इस को सही नहीं मानता था पर अब इस तरह की घटनाओं को बदलती सोच के रूप में देखा जा रहा है.’’ फेसबुक एक जैसी रुचियां रखने वाले लोगों को आपस में दोस्त बनाने का काम भी करता है. एक दोस्त दूसरे दोस्त को अपनी फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजता है. इस के बाद दूसरी ओर से रिक्वैस्ट कंफर्म होते ही चैटिंग का यह खेल शुरू हो जाता है. हर कोई अपनीअपनी पसंद के अनुसार चैटिंग करता है.

कुछ युवतियां तो चैटिंग के माध्यम से दोस्ती कर के पैसे तक वसूलने लगी हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि सैक्स को ले कर समझदारी बनाए रखें. उसे मुलाकात, प्यार और लगाव से दूर रखें.