सरिता विशेष

दिनांक 4 जुलाई, 2016, स्थान हरियाणा का वल्लभगढ़.

मामला लिवइन रिलेशनशिप का, जहां लिवइन में रह रही लड़की प्रैग्नैंट हो गई तो उस ने लड़के पर शादी के लिए दबाव डाला. दबाव में आ कर लड़के ने लड़की से शादी भी कर ली. लेकिन लड़के ने उस के साथ एक और चाल चली, उस ने लड़की को पहले तो गर्भनिरोधक दवा खिला कर उस का गर्भपात करा दिया और फिर खुद फरार हो गया.

27 जून, 2016, स्थान मध्य प्रदेश का मंदसौर इलाका. पहले तो 25 वर्षीय एक लड़की ने लड़के के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहना शुरू किया, फिर जब वह प्रैग्नैंट हो गई तो उस ने अपने प्रेमी की जम कर फजीहत की. उस ने अपने प्रेमी को न सिर्फ सड़क के बीचोंबीच जम कर पीटा बल्कि उस के खिलाफ थाने में रेप केस भी दर्ज करवा दिया. ऐसे एक नहीं कई मामले हैं.

शादी की पुरानी मान्यता को दरकिनार करते हुए फाइनैंशियल जिम्मेदारियों की साझेदारी, जिम्मेदारियों का अकेले बोझ उठाने का झंझट नहीं, अपनी मरजी की जिंदगी, इन्हीं सब आकर्षणों के चलते युवकयुवतियों को लिवइन रिलेशनशिप खासा भा रहा है लेकिन बिना नाम के इस रिश्ते का परिणाम उपरोक्त खबरों में साफसाफ दिखाई दे रहा है. लिवइन रिलेशनशिप को यदि साफ शब्दों में कहें तो इस में बिना विवाह किए लड़का और लड़की एक घर में एकसाथ रहने का निर्णय लेते हैं. इस रिलेशनशिप में एकदूसरे के प्रति विवाह जैसी जिम्मेदारियां नहीं होतीं.

कच्चा रिश्ता है यह

देखने में यह रिलेशनशिप अच्छी और लुभावनी लगती है. जो प्रेमी युवकयुवतियां स्वतंत्र खयाल के होते हैं और आत्मनिर्भर होते हैं, वे इस रिलेशनशिप में अधिक यकीन रखते हैं. उन का मानना है कि जब उन में प्यार है तो उस के लिए विवाह जैसे बंधन की क्या आवश्यकता है. वे साथसाथ रह कर आपसी प्यार व एहसास शेयर करते हैं. सुबह तैयार हो कर अपनेअपने काम पर निकल जाते हैं. ऐसे में युवक या युवती की यह जिम्मेदारी नहीं कि कौन सुबह नाश्ता बनाएगा या ले जाने का लंच तैयार करेगा या कपड़े धोएगा. आपसी सुविधानुसार वे अपनेअपने कार्य अकसर स्वयं करते हैं या नौकरनौकरानी रख लेते हैं या विवाह की स्थिति की भांति लड़की सारे कार्य करती है. फिर भी यदि चाहें तो एकदूसरे की मदद कर सकते हैं. विवाहित जीवन की भांति एकदूसरे का खयाल रखना अनिवार्यता या मजबूरी नहीं होती. इसी कारण एकदूसरे से शिकायत करने का हक भी नहीं रहता कि कौन कब रात को देर से आया या किसी पार्टी में ड्रिंक ज्यादा कर के आया वगैरा.

लिवइन रिलेशनशिप का पीरियड प्यार की गहराई पर निर्भर करता है. इस में विवाह के अतिरिक्त सभी कुछ विवाहित जीवन जैसा रहता है, जैसे साथ में रहना, खाना, सोना, सैक्स, प्यार, लड़ाईझगड़ा आदि लेकिन विवाह जैसा कानूनी बंधन नहीं होता. अलग या आजाद होने के लिए कोर्ट से तलाक लेने की आवश्यकता नहीं रहती. जब तक साथ अच्छा लगता है, खुशी से साथ रहो. जिस दिन यह रिश्ता बोझ लगने लगे, अलग रहने लगो. लिवइन रिलेशनशिप में रह कर युवतियों को जहां विवाह पूर्व सैक्स का आनंद प्राप्त होता है वहीं यदि गर्भावस्था की स्थिति हो जाए तो उसे स्वयं ही भुगतना पड़ता है. यदि आपसी प्रेम इस हद तक गहरा है कि युवक अपने होने वाले बच्चे की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हो तो यह रिलेशनशिप शादी में तबदील हो जाती है. हालांकि कुछ समय पूर्व कोर्ट ने इस रिलेशनशिप में भी विवाह जैसी जिम्मेदारियों की बात की है तथा पुरुष को अनेक आवश्यक जिम्मेदारी उठाने पर जोर दिया है.

स्वतंत्र युवकयुवतियां लिवइन रिलेशनशिप में रह कर एकदूसरे को भलीभांति समझ पाते हैं, ऐसा वे दावा करते हैं. यदि उन्हें लगता है कि वे एकदूसरे की आदतें पसंद करने लगे हैं और विवाह के बाद उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी तो वे इसे विवाहबंधन में परिवर्तित करने का निर्णय लेते हैं. लेकिन यदि कुछ समय साथ रह कर बातबात पर तूतू मैंमैं की नौबत आ जाए तो उन्हें महसूस होने लगता है कि उन का रिश्ता सफल नहीं होगा और वे अलगअलग रास्ते पर चले जाते हैं.

भावी रिश्तों पर असर

लिवइन वर्तमान रिश्तों के अलावा भावी रिश्तों यानी वैवाहिक रिश्तों पर भी अपना खासा असर डालता है. एक शोध के अनुसार, वे महिलाएं जो विवाह से पूर्व लिवइन में थीं उन में से केवल 60 प्रतिशत महिलाओं ने ही विवाह के बाद अपने लाइफपार्टनर के साथ वफादारी निभाई जबकि वे महिलाएं जो विवाह पूर्व लिवइन में नहीं थीं उन में से 90 प्रतिशत महिलाएं अपने बैटरहाफ के प्रति वफादार रहीं. अगर बेवफाई के मामले में पुरुषों की बात की जाए तो वे महिलाओं से एक कदम और आगे निकले. जहां 90 प्रतिशत विवाहित पुरुष अपनी पत्नी के प्रति वफादार रहे वहीं लिवइन में रहे केवल 43 प्रतिशत पुरुषों ने अपनी पत्नी के प्रति वफादारी निभाई. यह साबित करता है कि महिला या पुरुष जो भी विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों में लिप्त रहता है उस के विवाह के बाद भी अतिरिक्त वैवाहिक संबंधों में होने की संभावना अधिक रहती है. इसलिए अगर आप विवाह के बाद अपने संबंधों को लंबे समय तक निभाना चाहते हैं तो लिवइन के झमेले में न पड़ना ही आप के लिए समझदारी होगी.

वैसे भी अगर देखा जाए तो समाज कितना ही प्रगतिवादी क्यों न हो जाए, इस के मापदंड महिलाओं तथा पुरुषों के लिए हमेशा अलग रहे हैं. महिलाओं को ऐसी रिलेशनशिप स्वीकार करने के पहले गहराई से सोचविचार कर निर्णय लेना चाहिए वरना उन का भविष्य कुछ नहीं रह जाता. कहींकहीं तो वे तनावग्रस्त हो कर आत्महत्या तक की स्थिति में पहुंच जाती हैं. यदि कोई महिला लिवइन रिलेशनशिप को स्वीकार करती है तो उसे सोच कर निर्णय लेना चाहिए कि कहीं वह प्रेमी पुरुष की बदनीयती का शिकार तो नहीं हो रही या कहीं वह अपने प्रेमी के प्रैशर में आ कर इस रिलेशनशिप का निर्णय तो नहीं ले रही. कहीं प्रेमी पूर्व विवाहित तो नहीं जो लिवइन रिलेशनशिप का निर्णय करा कर लड़की की जिंदगी से खिलवाड़ करे

बड़े धोखे हैं इस राह में

किसी भी महिला को लिवइन रिलेशनशिप स्वीकार करते समय इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए :

–       कहीं वह फिल्मी सितारों की चमकदमक और लिवइन रिलेशनशिप से प्रभावित हो कर तो ऐसा कदम नहीं उठा रही? फिल्मी कलाकारों की जिंदगी और सामान्यजन की जिंदगी में फर्क होता है. वहां संबंध बनतेबिगड़ते रहते हैं. एक कलाकार के एक के बाद दूसरेतीसरे कितने भी संबंध बन सकते हैं जबकि सामान्य जीवन में एक महिला का एक लिवइन रिलेशनशिप बनने के बाद दूसरा संबंध बनना बहुत मुश्किल होता है.

–       यह आवश्यक नहीं कि महिला लिवइन रिलेशनशिप के आरंभ से ही शारीरिक व सैक्स संबंध बनाए. उसे अपने साथी प्रेमी के प्रेम की गहराई जान कर ही ऐसे संबंध बनाने चाहिए.

–       लिवइन रिलेशनशिप स्वीकार करने के पूर्व महिला को स्वयं सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि क्या उस का पुरुषमित्र इतना भरोसेमंद है? कहीं वह पहले से शादीशुदा तो नहीं? यदि हां तो क्या इस बारे में उस ने स्वयं आप को बताया है? कहीं वह आप से अपने बारे में झूठ तो नहीं बोल रहा?

उस की आर्थिक स्थिति, नौकरी, परिवार, बैकग्राउंड आदि जो भी उस ने बताया है, क्या वह सही है? ऐसी अनेक घटनाएं पढ़ने व सुनने को मिलती हैं कि पुरुष ने अपना नाम, धर्म, आर्थिक स्थिति सबकुछ गलत बताया या इंटरनैट पर दोस्ती कर के रिश्ता बढ़ा लिया. यहां तक कि सैक्स संबंध भी बना लिया. फिर कुछ समय बाद वह छोड़ कर चला गया या असलियत खुलती देख आप से अलग हो गया. इन सभी स्थितियों में महिला ही परेशानी में फंसती है.

–       लिवइन रिलेशनशिप में जाने के पहले आप स्वयं से यह पूछें कि क्या आप अपने प्रेमी के दबाव में आ कर ऐसा तो नहीं कर रहीं. कहीं आप का दोस्त या प्रेमी आप को परिवार के खिलाफ भड़का कर आप को लिवइन रिलेशनशिप के लिए उकसा तो नहीं रहा, जबकि आप मानसिक रूप से इस के लिए तैयार नहीं.

–       ऐसा भी संभव है कि आप का मित्र आप के इस रिलेशनशिप को न मानने की स्थिति में छोड़ जाने की धमकी दे रहा हो और आप उसे खोने के डर से सैक्स संबंध बनाने और लिवइन रिलेशनशिप के लिए राजी हो रही हों? यदि आप के मित्र या प्रेमी का प्यार इतना खोखला है तो सतर्क हो जाएं. जो व्यक्ति आप को ब्लैकमेल कर के आप से सैक्स संबंध बना रहा है, वह जरूर आप को एक दिन अचानक छोड़ जाएगा. सच्चा प्यार ऐसी धमकी या प्रैशर की नीति नहीं अपना सकता. अब यह आप पर निर्भर है कि आप उस की धमकी के आगे कितना झुकती हैं.

–       अपनी गर्भावस्था के प्रति अत्यंत सचेत रहें. हमारे समाज में बिन ब्याही मां को आज भी स्वीकार नहीं किया जाता. संभव हो तो गर्भाधान के लिए तभी सोचें जब आप दोनों विवाह करने की स्थिति में हों और आप को भरोसा हो कि आप का मित्र आप के बच्चे को अपनाएगा और अपना नाम देगा.

शुद्ध देशी इंडिया की रोमांटिक सोच

इस विषय पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं. हाल ही में ‘लव के फंडे’ और ‘शुद्ध देशी रोमांस’ फिल्में इसी कड़ी में शामिल हैं. ‘लव के फंडे’ से पहले यशराज प्रोडक्शंस ने मैक्स मीडिया के साथ मिल कर एक सर्वे कराया था जिस में 68 प्रतिशत युवाओं का मानना था कि लिवइन प्यार नहीं वासना है. 72 फीसदी लोगों ने माना कि इस का अंत ब्रेकअप होता है. 52 प्रतिशत युवाओं ने लिवइन में रहने की इच्छा जताई. 36 प्रतिशत महिलाओं ने इसे ठीक माना. 80 प्रतिशत अभिभावकों ने माना कि लिवइन में रहने वाले लड़केलड़कियों का चरित्र खराब होता है वहीं 89 प्रतिशत अभिभावकों ने माना कि विवाह से पूर्व सैक्स स्वीकार्य नहीं. जबकि 51 प्रतिशत युवाओं ने इसे गलत करार दिया.