हकीकी और रोमानी जिंदगी के फर्क को समझते हुए प्यार करना बुरी बात नहीं है लेकिन प्यार के चक्कर में अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करना समझदारी नहीं है. प्यार करने का मतलब जिंदगी संवारना है न कि तबाही का रास्ता अख्तियार करना. पढि़ए कुशला पाठक का लेख.

टैलीविजन के न्यूज चैनलों और समाचारपत्रों में अकसर सुर्खियां बनती रहती हैं, जिन में किसी नवयुवक ने एकतरफा प्यार के चक्कर में किसी लड़की को चाकू मार दिया या उस के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया. एकतरफा प्यार के चक्कर में पागलपन की सीमा तक दीवाने लड़के किसी लड़की का जीवन बरबाद करने तक में नहीं झिझकते. सालछह महीने की सजा काट कर वे फिर से स्वतंत्र घूमने लगते हैं.

आइए, इसी साल घटी कुछ घटनाओं पर नजर डालें :

31 अगस्त को बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में एक व्यक्ति ने एक महिला के घर में घुस कर धारदार हथियार से हमला कर दिया. हमले में 50 वर्षीय महिला, उस का बेटा व बेटी गंभीर रूप से घायल हो गए. तहकीकात के बाद पुलिस ने हमलावर का नाम सोनू बताया है. सोनू उस महिला की बेटी से एकतरफा प्यार करता था जिस पर लड़की के परिवार वालों ने आपत्ति जताई थी.

27 अगस्त को एक युवक ने एकतरफा प्यार में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बीटेक थर्ड ईयर की छात्रा को कर्नलगंज चौराहे पर पैट्रोल छिड़क कर जिंदा जलाने की कोशिश की. आरोपी ने पुलिस को बताया कि उस छात्रा से उस की पुरानी दोस्ती थी. जब लड़की ने उस के प्यार को ठुकरा दिया तो आरोपी से बरदाश्त नहीं हुआ, उस ने छात्रा को जला कर मार देना चाहा.

6 अगस्त को एकतरफा प्यार में उत्तर प्रदेश के देवपुर स्थित बिंदेश्वरी जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक प्रमोद ने गंगोत्तरी आदर्श इंटर कालेज, महरामऊ में पढ़ने वाली 18 वर्षीय छात्रा सारिका को सिर्फ इस बात पर गोली मार दी क्योंकि उस ने शिक्षक के साथ बाइक पर बैठने से मना कर दिया था.

देशभर में ऐसी न जाने कितनी लड़कियों को एकतरफा प्यार के फेर में जान से हाथ धोना पड़ता है. एकतरफा इश्क में कुछ नवयुवक इतने दीवाने हो जाते हैं कि मासूम लड़कियों पर तेजाब तक फेंक देते हैं जिन का वास्तव में कोई कुसूर नहीं होता.

नवयुवकों के अपराध के पीछे कई कमजोरियां भी सामने आती हैं. अपराधी मौके से फरार हो जाता है. इस बीच अपराधी लड़की और उस के परिवार को धमकी दे कर अपने को बचा लेता है. ऐसे मामलों पर कोर्ट का फैसला आने में भी सालों लग जाते हैं जिस में लड़की के मातापिता कोर्ट और थाने के चक्कर काटतेकाटते परेशान हो जाते हैं.

सामाजिक व्यवस्था के कारण लड़की के मातापिता लड़की के अपमान के डर से शांत रहना ही पसंद करते हैं. समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो लड़की को ही दोषी ठहराते हैं और सिरफिरे लड़कों को कुछ नहीं कहते. ऐसे में जब किसी लड़के को किसी का डर नहीं होता तो वह अपराध करने के लिए स्वतंत्र हो जाता है.

एकतरफा प्यार के चक्कर में नवयुवकों का कुछ बिगड़े या न बिगड़े, लड़कियों का भविष्य जरूर अंधकारमय हो जाता है. ऐसी ही दर्दभरी दास्तां नंदिनी की भी है. नंदिनी मेरे कालेज में सैकंड ईयर में पढ़ती थी. नंदिनी बैडमिंटन की बहुत अच्छी खिलाड़ी थी. उस ने कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और मैडल्स भी जीते. इस बीच कालेज का एक सिरफिरा लड़का उस के पीछे दीवाना हो गया. नंदिनी को वह कालेज आतेजाते तंग करता था. परेशान हो कर नंदिनी ने कालेज जाना बंद कर दिया. तब वह लड़का उस के घर के आसपास चक्कर काटने लगा.

आखिर में परेशान हो कर नंदिनी के परिवार वालों ने इस बात की शिकायत पुलिस थाने में कर दी. परिवार वालों की शिकायत पर उस सिरफिरे को पुलिस पकड़ कर तो ले गई पर 2-3 दिन बाद वह सिरफिरा फिर से नंदिनी के घर के बाहर दिखाई देने लगा. नंदिनी के परिवार को समझ में आ गया कि पुलिस ने उस के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं लिया है. आखिरकार, नंदिनी के परिवार वालों को वह घर छोड़ कर कहीं और जाना पड़ा. कुछ दिन बाद पता चला कि नंदिनी के मातापिता ने डर कर नंदिनी की शादी कर दी.

इस तरह नंदिनी का स्पोर्ट्स का कैरियर उस सिरफिरे लड़के के कारण बरबाद हो गया. नंदिनी की तरह न जाने कितनी ऐसी लड़कियों का कैरियर चौपट हो गया है. कोई कालेज जाना बंद कर देती है तो कोई उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाती तो किसी की शादी कर दी जाती है. कुल मिला कर उन के अरमानों पर पानी फिर जाता है. कई बार तो ऐसे दीवाने किसी दिन लड़की के ससुराल तक पहुंच जाते हैं. बात जब ससुराल तक पहुंचती है तो भला समाज या फिर ससुराल वाले लड़की को कहां जीने देते हैं. उस लड़की पर न जाने क्याक्या लांछन लगाए जाते हैं. कई बार नौबत तलाक तक पहुंच जाती है.

प्रशासन की तरफ से तो समयसमय पर पत्रपत्रिकाओं या अन्य दूसरे माध्यमों से सूचना दी जाती है कि यदि कोई आप को बारबार फोन कर के आप से अभद्र व्यवहार करता है, अश्लील बातें करता है तो आप पुलिस के एक विशेष नंबर पर शिकायत कर सकते हैं लेकिन प्यार में पागल ये सिरफिरे पीसीओ से फोन करते हैं जहां पर उन लड़कों को पकड़ना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. शहरों में तो फिर भी पुलिस सर्विलांस के जरिए उन्हें पकड़ लेती है लेकिन गांवकसबे या छोटे शहरों में ऐसे लड़कों को पकड़ना मुश्किल होता है.

एकतरफा प्यार के लिए फिल्में भी कम जिम्मेदार नहीं हैं. फिल्मों में अकसर दिखाया जाता है कि एक फक्कड़, आवारा, मवाली लड़का स्कूल या कालेज में किसी धनी परिवार की लड़की से प्यार का चक्कर चलाता है और वह सफल हो जाता है लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा संभव नहीं होता क्योंकि हकीकत और फिल्मों में बहुत अंतर है.

मनोचिकित्सक के मुताबिक ऐसे नवयुवक किसी भी वस्तु या प्राणी पर बेवजह आधिपत्य दिखाता है और उसे हर हालत में हासिल करने को तत्पर रहता है. वे सोचनेसमझने की क्षमता खो बैठते हैं और कोई भी अपराध, कुकृत्य करने को तैयार रहते हैं. समाज में दिनोंदिन इस तरह की विकृति फैलती जा रही है. ऐसा लड़का न सिर्फ खुद को बरबाद करता है बल्कि अपने परिवार के साथसाथ उस लड़की और उस के घरवाले या फिर उस के ससुराल वालों का भी घर बरबाद कर देता है.

बहरहाल, प्यार पर कोई जोर नहीं लेकिन प्यार किसी पर थोपा नहीं जा सकता और न ही जबरदस्ती प्यार करवाया जा सकता है. यह तो मन की बात है कि किसे कौन अच्छा लगता है और दूसरा उसे प्यार करता है या नहीं. वहीं, एकतरफा प्यार पर कोई कानून, समाज या परिवार रोक नहीं लगा सकता.

एकतरफा प्यार से जुड़ी वारदात के लिए प्यार करने वाला व्यक्ति काफी हद तक खुद जिम्मेदार होता है. दीवानगी की हद पार करने वाले इंसान को यह सोचना चाहिए कि जिस के लिए वह यह सब कर रहा है, यदि वह यह सब नहीं चाहती या चाहता तो बेवजह की कोशिशें कर अपना व परिवार का तमाशा बना कर समाज में स्वयं को क्यों बेइज्जत किया जाए?