सवाल
मैं कामकाजी महिला हूं और मुझे काम के सिलसिले में ज्यादातर धूप में रहना पड़ता है, जिस से मुझे पिगमैंटेशन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. कृपया बताएं मैं पिगमैंटेशन की रोकथाम कैसे कर सकती हूं?

जवाब
स्किन पिगमैंटेशन के कारणों में सन डेमेज, हारमोनल डिसऔर्डर से ले कर आनुवंशिक कारण तक को शामिल किया जा सकता है. ज्यादातर मामलों में सन ऐक्सपोजर त्वचा पिगमैंटेशन की वजह बनता है. इसलिए इस की रोकथाम के लिए रोजाना 15 या इस से अधिक एसपीएफ सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. आप पीक टाइमिंग के दौरान सन ऐक्सपोजर से बचें. अपने चेहरे और हाथों पर 30 से 40 एसपीएफ वाली सनस्क्रीन लगा कर धूप में निकलें और इसे बाहर निकलने से आधा घंटा पहले लगाएं.

अगर आप की त्वचा रैडिएशन के प्रति ज्यादा सैंसिटिव है तो आप के लिए घर के अंदर भी सनस्क्रीन लगाना उतना ही जरूरी है, जितना कि बाहर जाने से पहले. घर में मौजूद आर्टिफिशियल लाइट भी त्वचा पर असर डालती है, क्योंकि इस में भी कुछ मात्रा में रैडिएशन होता है. आमतौर पर घर में रहने पर एसपीएफ 15 तक का सनस्क्रीन लगाना बेहतर रहता है.

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दमकती त्वचा चाहिए तो जानिए खुद की स्कि‍न टाइप

आपकी त्वचा/स्‍किन किस प्रकार की है अगर आपको इस बात का पता चल जाए तो आप उसकी बेहतर तरीके से देखभाल कर सकेंगी. कई बार ऐसा होता है कि हम स्‍टोर में जाते हैं और देखते हैं कि वहां पर कई प्रकार की क्रीम और लोशन रखे हैं, लेकिन हम उनको देखकर कंफ्यूज हो जाते हैं कि इनमें से कौन सा प्रोडक्‍ट खरीदें जो हमारी त्‍वचा को सूट करे. इसी उलझन को दूर करने के लिये आपकी खुद की त्‍वचा किस प्रकार की है, इसको जानना बहुत जरुरी है. आज हम आपको आपकी स्‍किन टाइप से परिचिति करवाएंगे.

ड्राय : अगर आपकी त्‍वचा बहुत तनी हुई या फैली हुई रहती है तो इसका मतलब आपकी त्‍वचा ड्राय है. इसको पहचानने के लिये, अपनी त्‍वचा पर पूरे दिन किसी भी मौस्‍चराइजर या लोशन का प्रयोग न करें. फिर अगर आपकी त्‍वचा कसी हुई और रुखी लगेगी तो समझ जाइये कि आपकी स्‍किन ड्राय है.

औयली : अगर मुंह धोने के आधे घंटे बाद आपकी त्‍वचा तेलीय हो जाती है, तो इसका मतलब आपकी त्‍वचा औयली है. इसके अलावा अगर आप कोई टिशू पेपर लेकर अपनी त्‍वचा पर प्रेस करेंगी तो उस टिशू पेपर में तेल लग जाएगा, जिससे आप समझ जाइयेगा कि आपकी त्‍वचा औयली है.

संवेदनशील : सेन्‍सिटिव स्‍किन लालिमां लिये हुए होती है. शरीर में हाई हिस्‍टामाइन होने की वजह से स्‍किन सेन्सिटिव हो जाती है और सिरोसिस, रोसेसिआ और एक्‍जिमा होने के बहुत सारे चांस होते हैं.

झुर्रियां : बढ़ती उम्र और पर्यावरणीय कारकों की वजह से त्‍वचा पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं. सूरज की धूप और तनाव का लेवल बढ़ना भी एक कारण होता है. त्वचा पर हल्‍की रेखाएं दिखना पिगमेंटेशन और त्‍वचा का ग्रे हो जाना बताता है कि आप की त्‍वचा पर एजिंग का असर पडने लगा है.

एक्‍ने प्रोन : लार्ज पोर साइज और रिएक्‍टिव स्‍किन होने की वजह से एक्‍ने, पिंपल होने की बहुत संभावना हो जाती है. इस बात का पता कि एक्‍ने बैक्‍टीरियल, हार्मोनल या वंशानुगत है, केवल उसकी जांच से ही पता लगाया जा सकता है. वैसे तो त्‍वचा की साफ-सफाई से इसे कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन अगर या बड़ी समस्‍या में से एक है तो डर्मटालजिस्ट के पास ही जाना सही रहेगा.

 

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