सवाल
मैं 44 साल की महिला हूं. मुझे हर महीने पीरियड्स होने के कुछ दिन पहले स्तनों में भारीपन और दर्द महसूस होने लगता है. मुझे डर है कि कहीं यह ब्रैस्ट कैंसर का लक्षण तो नहीं? मेरी मौसी को भी यह रोग हुआ था और वे इस कारण कम उम्र में ही चल बसी थीं. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
ब्रैस्ट कैंसर से मौसी के चल बसने के कारण आप के भीतर उस रोग का डर बैठना अस्वाभाविक नहीं है. लेकिन जिस प्रकार के मासिकचक्र के साथ उठने वाले चक्रनुमा दर्द की आप बात कर रही हैं वह फाइब्रोयडिनोसिस या फाइब्रोसिस्टिक ब्रैस्ट डिजीज का क्लासीकल लक्षण है. यह दर्द मासिकधर्म से 3-4 दिन पहले शुरू होता है और स्राव के शुरू होने पर थम जाता है. स्तनों के हिलनेडुलने पर यह दर्द बढ़ जाता है. यह शरीर में मासिकचक्र के साथ होने वाले यौन हारमोनों में आए परिवर्तनों से उत्प्रेरित होता है. इस का ब्रैस्ट कैंसर से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई संबंध नहीं होता.

इस दर्द से आराम पाने के लिए आप कुछ छोटेछोटे उपाय कर सकती हैं. सब से आसान यह है कि उन दिनों चौबीसों घंटे दिनरात ब्रेजियर पहन कर रखें ताकि स्तनों को पूरा आवलंबन मिलता रहे.

फिर भी दर्द महसूस हो तो कोई साधारण दर्दनिवारक दवा जैसे पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन लें. इस से भी बात न बने तो एक बार किसी सर्जन से मिल लें. जरूरी होने पर विटामिन ई और कुछ हारमोनल दवाएं दे कर भी आराम दिलाया जा सकता है.

चूंकि आप की मौसी को ब्रैस्ट कैंसर हुआ था, इसलिए आप का भी उस के प्रति चौकस रहना अच्छा होगा. वाजिब होगा कि आप हर माह ब्रैस्ट सैल्फ ऐग्जामिनेशन का नियम बना लें. बिस्तर पर लेट कर और शीशे के सामने खड़े हो कर दोनों स्तनों में गांठ, त्वचीय परिवर्तन और ब्रैस्ट निपल परिवर्तन के लिए विधि अनुसार जांच लें. जरा भी शक हो तो तुरंत किसी सर्जन से जांच करवाएं. इसे टालें नहीं. आजकल समय से इलाज लेने से बहुत से मामलों में ब्रैस्ट कैंसर जड़ से खत्म किया जा सकता है.

अपना शारीरिक वजन सीमा में और आहार सदा संतुलित रखें. मोटापा, अधिक वसीय भोजन जैसे जंक फूड, तले व्यंजन, मांसाहार आदि ब्रैस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ावा देते हैं. आप के साथ एक रिस्क फैक्टर पहले से ही है कि आप की फैमिली में यह रोग रहा है. अत: इस रिस्क को और अधिक न बढ़ने देने में ही समझदारी है.

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