सवाल
मैं 28 साल की विवाहित महिला हूं. लगभग 6 साल पहले मुझे सीजेरियन से बेटा हुआ था. अब जब भी पति के साथ शारीरिक संबंध बनाती हूं, तो उस समय मुझे अपने जननांग में काफी दर्द होता है जो शारीरिक संबंध बनाने के लंबे समय बाद तक मुझे परेशान करता रहता है. इस के पीछे क्या कारण हो सकता है? मुझे इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब
आप ही की तरह और बहुत सी महिलाएं मां बनने के बाद कष्टपूर्ण सहवास की परेशानी से गुजरती हैं. ऐसी महिलाएं जिन की संतानें प्राकृतिक रूप से योनिमार्ग से जन्म लेती हैं और जिन में योनि का रास्ता चौड़ा करने के लिए डाक्टर प्रसव के समय ऐपीसिओरोमी का चीरा लगाते हैं, उन में 17 से 45% महिलाएं मां बनने के बाद इस पीड़ा से गुजरती हैं, जबकि सीजेरियन से मां बनने वाली 2 से 19% महिलाएं यह परेशानी बताती हैं.

मतलब यह कि सीजेरियन के बाद कष्टपूर्ण सहवास की परेशानी कम देखी जाती है, लेकिन हो सकती है. इस के पीछे ठीकठीक कारण क्या है, इस पर मात्र अटकलें ही लगाई जा सकी हैं. समझा यह जाता है कि कुछ महिलाओं में सीजेरियन से गुजरने की मानसिक उद्वेलना आगे चल कर उन के मन में इतनी तीव्र दुश्चिंता पैदा कर देती है कि उन्हें सहवास से ही डर लगने लगता है. उन का अवचेतन यह सोचने लगता है कि कहीं फिर से गर्भवती हुईं तो फिर से सीजेरियन से गुजरना पड़ेगा और इसी मानसिक उद्वेलन में उन का मन सैक्स के प्रति नकारात्मक रवैया बना लेता है.

दूसरे मनोवैज्ञानिक कारण भी परेशानी दे सकते हैं. हाल ही में मां बनी महिला को यदि रात में पूरी नींद न मिले, ठीक से आराम न मिल पाए, उचित पोषण न मिले, आमोदप्रमोद का समय और अवसर न मिले तथा उस का मन पति के साथ सहवास को न करे तो यह मनोस्थिति पैदा होनी स्वाभाविक है.

सीजेरियन के बाद टांकों में यदि मवाद पड़ जाए तो बाद में उन के भरने के बाद भी सतही टिशू में आए दुष्परिवर्तनों में महिला दर्द महसूस कर सकती है. कुछ महिलाओं में समस्या हारमोनल भी होती है. ऐस्ट्रोजन हारमोन की कमी होने से योनि की प्राकृतिक स्निग्धता घट जाती है. नतीजतन सहवास कष्टपूर्ण हो जाता है.

कुछ शारीरिक समस्याएं जैसे योनिद्वार में आई सूजन, मूत्रनली में आई सूजन, उस पर उपजी मांस की गांठ, योनिद्वार से सटी बार्थोलिन ग्लैंड में आई सूजन या गुदाद्वार में फिशर बनने पर भी सहवास क्रीड़ा के समय कष्ट होना स्वाभाविक है. इसी तरह गर्भाशयग्रीवा की सूजन और ऐंडोमिट्रिओसिस जैसे रोग भी परेशानी दे सकते हैं.

फिर समस्या यह भी है कि एक बार शुरू में दर्द उठने पर आगे मन में शारीरिक मिलन को ले कर दुश्चिंताएं अपने से बलवती हो उठती हैं. मात्र स्पर्श से ही श्रोणि प्रदेश की पेशियां संकुचित हो उठती हैं, योनि संकुचित हो जाती है और सहवास कठिन हो जाता है. समस्या के एक बार शुरू होने पर आगे प्राय: एक चक्रव्यूह सा बन जाता है. जबजब पतिपत्नी मिलन में बंधना चाहते हैं, पत्नी पीड़ा से भर उठती है.

उचित यही होगा कि पहले आप किसी योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञा से मिल कर अपनी अंदरूनी जांच करा लें. बहुत संभव है कि इसी से समस्या का मूल कारण स्पष्ट हो जाए और आप समस्या का उपयुक्त उपचार ले कर उस से उबर जाएं.

यदि अंदर कोई विकार नहीं मिलता तो वाजिब यह होगा कि आप और आप के पति दोनों दांपत्य मनोविज्ञान में निपुण किसी विशेषज्ञ की सलाह लें. आपस में प्रेम का सेतु रहे, तो सभी परेशानियां देरसबेर दूर हो जाती हैं. सहवास से पहले प्रणय क्रीड़ा में समय देना भी लाभ दे सकता है. उस से योनि की प्राकृतिक स्निग्धता बढ़ जाती है, जिस से सहवास आसान हो जाता है.

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