सरिता विशेष

सवाल
मैं 53 वर्षीय विवाहित व्यक्ति हूं. सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हूं. मेरा स्थानांतरण ऐसे शहर में हुआ जहां कोई परिचित न होने के कारण मैं खुद को अकेला फील करता हूं. खाली समय में मोबाइल, इंटरनैट व टीवी पर बिताता हूं. मुझे पोर्न देखने व हस्तमैथुन की लत लग गई है. क्या करूं?

जवाब
पोर्न को बेवजह का हौआ न बनाएं क्योंकि जब इंसान अकेला होता है तो खुद की इच्छाओं को पूरा करने के लिए वह इन माध्यमों का सहारा लेता है और एक सीमा तक इन का प्रयोग बुराई भी नहीं है. जहां तक हस्तमैथुन का सवाल है, आप परेशान न हों क्योंकि यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि आप पार्टनर की कमी को पूरा करने के लिए ऐसा कर रहे हैं. संभव हो तो परिवार को अपने साथ ले आएं या फिर पत्नी से जल्दीजल्दी मिलते रहिए ताकि आप को पार्टनर की कमी महसूस न हो.

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अगर आप भी सबसे छिपकर देखते हैं पोर्न, तो ये खबर आपके लिए है

पोर्न फिल्म का जिक्र आते ही युवाओं का दिल मचलने लगता है और उन के चेहरे पर एक खुशी की लहर दौड़ जाती है. कुछ लोगों का मानना है कि पोर्न फिल्में देखने में कोई हर्ज नहीं है. यही वजह है कि युवाओं में पोर्न फिल्में देखने का चलन बहुत बढ़ गया है. उन्हें सैक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती और जब वे इस तरह की मूवी देखते हैं तो उन्हें लगता है कि यही सैक्स है. लेकिन सच तो यह है कि पोर्न असली जिंदगी के सैक्स की तरह नहीं है और न ही यह सैक्स और अंतरंगता के बारे में जानने का सर्वोत्तम तरीका है बल्कि यह तो पैसा कमाने का एक जरिया है.

एक सीमा तक तो ठीक है, लेकिन जब पोर्न देखना आदत में शुमार हो जाता है तो इस से परेशानियां पैदा होने लगती हैं. इसलिए पोर्न देखना अच्छी बात नहीं है और अगर देखना भी है तो इस की एक लिमिट आप को खुद ही तय करनी होगी ताकि यह आप की पर्सनल लाइफ को प्रभावित न करने लगे. आइए, पोर्न के बारे में जानें कुछ जरूरी बातें :

पोर्न नशा कैसे है

पोर्न देखने की आदत जब इस हद तक बढ़ जाए कि उस से हमारी पर्सनल और प्रोफैशनल लाइफ प्रभावित होने लगे तो वह पोर्न का नशा बन जाता है. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि पोर्न देखने वाला शौकीन व्यक्ति हर वक्त पोर्न देखने की फिराक में रहता है, उसे अकेलापन अच्छा लगने लगता है, वह कभी भी कहीं भी पोर्न देखने के मौके को छोड़ना नहीं चाहता और इसलिए धीरेधीरे दोस्तों से भी दूरी बना लेता है, क्योंकि ज्यादा टाइम उसे पोर्न देखने में बिताना होता है. पोर्न देखने के लिए वह बहाने बनाना भी शुरू कर देता है. इस तरह पोर्न एक ऐसा नशा है जो लत बन जाता है.

इस बारे में मनोचिकित्सक स्मिता देशपांडे का कहना है कि हमारे शरीर में डोपामाइन व सेरोटोनिन नामक हारमोंस होते हैं, जिन्हें ‘हैप्पीनैस हारमोंस’ भी कहा जाता है. इन्हीं हारमोंस की वजह से हमें कुछ भी करने में खुशी मिलती है. अमूमन जब हमें कुछ अच्छा लगता है या खुशी देता है तब 5-10 यूनिट हारमोंस रिलीज होते हैं. पोर्न के केस में यह रिऐक्शन अलग तरह से होता है. पोर्न देखते ही दिमाग को कुछ ऐसा मिलता है जो उस ने पहले अनुभव नहीं किया होता. ऐसा होने पर कई बार 1 हजार यूनिट तक डोपामाइन रिलीज होते हैं. डोपामाइन की यह तगड़ी लहर फीलगुड तो ले कर आती ही है साथ ही ऐसी प्यास भी जगा देती है जिस का कोई अंत नहीं. यही पोर्न के नशे का कारण बनता है.

पोर्न के पीछे इंसान ऐसे चल पड़ता है जैसे सूखे रेगिस्तान में पानी मिलने की आस में प्यासा व्यक्ति कोसों चलता है. लेकिन हर पोर्न देखने वाले का नजरिया अलग होता है जैसे कि कुछ को शराब से ही नशा हो जाता है तो कुछ को उस के साथ ड्रग्स ले कर. इसी तरह कुछ को पोर्न तसवीरें देखने में मजा आता है तो कुछ को पोर्न फिल्में और कुछ को वाइल्ड सैक्स देखने में. इस तरह यह नशा एक तरफ तो फीलगुड का ऊंचा लैवल सैट कर देता है और दूसरी तरफ उस हिस्से को भी ऐक्टिव कर देता है जिस में कुछ और नया देखने और ज्यादा आनंद लेने की इच्छा जाग्रत होती है. इस तरह पोर्न देखने का शौकीन न तो इस के बिना रह पाता है और न ही जल्दी से इस से संतुष्ट हो पाता है. इस का नतीजा होता है कि इस से व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है और उस की सोचने की शक्ति भी कम हो जाती है. वहीं उस के दिमाग में बस, पोर्न ही घूमता रहता है. इस से उस का स्वास्थ्य भी खराब होता है.

पोर्न के शौकीन हैं तो इन बातों का रखें खयाल :

पोर्न का शौक इंसान के मन में कामुक विचार पैदा करता है. सैक्स के विचार युवाओं से ले कर हर वर्ग के व्यक्ति को गंदी फिल्में, गंदी कहानियां पढ़ने को मजबूर करते हैं. वैसे भी युवावस्था ऐसी उम्र है जिस में युवा सैक्स के बारे में सोचे बिना रह नहीं सकते. अब बात करें व्यक्ति के टेस्ट की तो हर व्यक्ति का टेस्ट सैक्स के बारे में अलगअलग होता है. इस टेस्ट को और भी मजेदार बनाते हैं पोर्न स्टार्स.

हिस्ट्री करें डिलीट

इंटरनैट से उस साइट की हिस्ट्री क्लीन कर दीजिए जहां पर आप ने पोर्न देखा है ताकि अगर कोई आप के कंप्यूटर का इस्तेमाल करे तो वह यह न देख पाए कि आप ने कौन सी साइट देखी है. आप ऐसा ‘इन प्राइवेट ब्राउजिंग’ पर जा कर कर सकते हैं, जोकि इंटरनैट ऐक्सप्लोरर और फायरफौक्स दोनों पर आप को मिलेगी. लेकिन अगर कोई फाइल आप ने डाउनलोड की है तो वह कंप्यूटर पर रहेगी. इसलिए जो फाइल आप ने डाउनलोड की है उसे खोलने के लिए पासवर्ड का इस्तेमाल करें, ताकि कोई और यह फाइल न खोल पाए और आप को किसी के सामने शर्मिंदा भी न होना पड़े.

प्रतिबंधित साइट्स न देखें

भारत सरकार और टैलीकौम डिपार्टमैंट ने कुछ पोर्नोग्राफी साइट्स पर प्रतिबंध लगाने की काफी कोशिश की है, क्योंकि पोर्न फिल्में बनाना गैरकानूनी है. इसलिए ध्यान रखें कि प्रतिबंधित साइट्स न देखें. साथ ही बच्चों के साथ जिन साइट्स पर शारीरिक शोषण होते हुए दिखाया जाता है उन्हें भी देखने की कोशिश न करें.

पोर्न रियल लाइफ नहीं है

अधिकतर पोर्न फिल्में काल्पनिक दुनिया को दर्शाती हैं, जोकि असल जिंदगी में नहीं होती. असल जिंदगी में लोग वैसे नहीं दिखते जैसे पोर्न फिल्मों में दिखाया जाता है और न ही वैसी हरकतें करते हैं जैसी उन में दिखाई जाती हैं. इसलिए पोर्न देख कर अपनी रियल लाइफ में अपने साथी से या अपने सैक्स अनुभवों से पोर्न फिल्मों जैसी अपेक्षा रखना सही नहीं है. इसलिए रियल लाइफ में पोर्न स्टार बनने की कोशिश मत कीजिए.

पोर्न देखने से पहले फेसबुक लौगआउट कर दें

अगर आप फेसबुक पर लौगइन करते हुए किसी एडल्ट साइट पर जाते हैं तो संभव है कि आप को टै्रक किया जा रहा हो. यह आशंका तब ज्यादा होती है जब उस पोर्न साइट पर फेसबुक का प्लगइन हो. ऐसा इसलिए कि फेसबुक यह ट्रैक करता है कि आप कौन सी वैबसाइट सर्फ कर रहे हैं. इस तरह से जुटाई गई जानकारी की मदद से बाद में ट्रैक करने वाला आप की पसंद के हिसाब से विज्ञापन दिखाना शुरू कर देता है और आप परेशान होते रहते हैं कि इस तरह की पोस्ट या विज्ञापन आप के फेसबुक पर अचानक कैसे आने लगे.

स्मार्टफोन पर पोर्न देखने पर है खतरा

आजकल इंटरनैट पर काफी सारे ऐसे फ्री ऐप्स मिलते हैं जो फ्री पोर्न वीडियोज देखने की सुविधा प्रदान करते हैं. ये ऐप्स एंड्रौएड फोन में बड़ी आसानी से इंस्टौल हो जाते हैं. इन ऐप्स के जरिए लोग अपने मनपसंद पोर्न वीडियोज सर्च करते हैं. आप के स्मार्टफोन के लिए सब से बड़ा खतरा यही पोर्न ऐप्स हैं. जब आप इन ऐप्स के जरिए फ्री पोर्न देख रहे होते हैं तो उसी वक्त ये ऐप्स आप के स्मार्टफोन में स्टोर किए गए आप के ईमेल, बैंक अकाउंट डिटेल्स, जरूरी पासवर्ड और दूसरी जानकारी को हैकर्स के पास भेज रहे होते हैं. ये सारा डाटा चोरीछिपे ट्रांसफर भी हो जाता है और आप को पता भी नहीं चलता. इस से आप को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है इसलिए ऐसे फ्री ऐप्स के लालच में न आएं.

पोर्न में मिथ ज्यादा वास्तविकता कम

पोर्न द्वारा यह भ्रम पैदा किया जाता है कि प्रेम, सैक्स और आत्मीयता सब एक ही चीज हैं. पोर्न यह भी सिखाता है कि किसी अनजान व्यक्ति से सैक्स किया जा सकता है, क्योंकि पोर्न में जिस से कामुक संबंध बनते हैं वह अकसर अपरिचित ही होता है. पोर्न यह भी संदेश देता है कि सैक्स में संतुष्टि मिलना ही महत्त्वपूर्ण है चाहे वह किसी के भी शरीर से मिले. पोर्न यह भी मिथ बनाता है कि सैक्स किसी से भी और कहीं भी किया जा सकता है, लेकिन सचाई का इस से कोई लेनादेना नहीं है. कम उम्र के युवा सैक्स के अधकचरे ज्ञान के कारण इसे ही सही मान लेते हैं और गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं जिस कारण उन्हें बाद में पछताना पड़ता है.

–       पोर्न साइट्स पर युवतियों की बहुत खराब छवि को प्रस्तुत किया जाता है. वहां युवतियां सैक्स करने के एक खिलौने की तरह होती हैं जिसे पैसे खर्च कर कोई भी खरीद सकता है और खरीदने के बाद सैक्स करना अपना अधिकार मानता है. इस में दिल और भावनाओं को पूरी तरह नकारा जाता है जबकि यह गलत है.

–       पोर्न में आमतौर पर युवतियों के बारे में गंदी और घटिया भाषा का प्रयोग किया जाता है. पोर्न के जरिए यह भी बताया जाता है कि छोटे बच्चों के साथ भी सैक्स किया जा सकता है. पिता को बेटी के साथ, मां को बेटे के साथ, भाई को बहन के साथ और इंसान को पशु के साथ सैक्स करते हुए दिखाया जाता है, जोकि पूरी तरह अमानवीय है.

बुरा है पोर्नोग्राफी वैबसाइट्स का चसका

इंटरनैशनल सिक्योरिटी सिस्टम लैब के कंप्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञ डा. गिलबर्ट वोंडरेसेक ने अपनी टीम के साथ किए एक परीक्षण में पाया कि ज्यादातर लोग पोर्न साइट्स के चक्कर में फंस जाते हैं. इस नए अध्ययन से पता चला है कि पोर्न साइट्स की सैर करने वाले लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं. डा. वोंडरेसेक के अध्ययन के तहत 2,69,000 वैबसाइट्स का विश्लेषण किया गया. इस से पता चला है कि करीब 3.23त्न साइट्स पर प्रयोक्ताओं की गोपनीय जानकारी इकट्ठा करने वाली स्क्रिप्ट रखी हुई थी.

सेहत पर भी बुरा असर

जब युवा एक बार पोर्न देखना शुरू करते हैं तो उन्हें इस के लिए एकांत की तलाश होती है और इस के लिए रात का समय सब से अच्छा रहता है इसलिए रात भर जाग कर पोर्न फिल्में देखते हैं और सुबह फिर डेली रूटीन के काम में लग जाते हैं. इस कारण नींद पूरी नहीं होती और सेहत बिगड़ने लगती है.

–       पोर्न देखने के बाद लोग कुछ ऐसा करना चाहते हैं जो उन के स्वभाव और प्राकृतिक तौर पर उन के दिमाग का हिस्सा नहीं है. चाहे वह जानवरों के साथ, कई लोगों के साथ हो या फिर कष्टकारी सैक्स ही क्यों न हो, वे सब ट्राई करना चाहते हैं.

–       युवा अपना काफी पैसा पोर्न फिल्में देखने में बरबाद करते हैं जिस से उन्हें आर्थिक रूप से परेशानी होती है.

–       कई बार वर्तमान पार्टनर विजुअल इमेज वाली तसवीर से मेल नहीं खाता, जिस से सैक्स इच्छा घटने लगती है क्योंकि वह साथी से कुछ ऐक्स्ट्रा की उम्मीद करने लगता है.