सरिता विशेष

काफी समय से चले आ रहे आरक्षण विरोध का असर बुधवार को देखने मिला जब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कोटा समाप्त करने पर अपनी मुहर लगा दी.

बांग्लादेश के प्रधान मंत्री शेख हसीना ने बुधवार को घोषणा की कि वे सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली को समाप्त कर देंगी. यह निर्णय आरक्षण नीति के विरोध में हजारों छात्रों और नौकरी चाहने वालों की जीत के रूप में देखा जा रहा है. यह सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक था, जिसमें हसीना के एक दशक से पुराने शासन के दौरान और इस तरह के पैमाने पर एकजुट जन विरोध प्रदर्शन देश में शायद ही पहले कभी देखा गया होगा.

ढाका में छात्रों की भीड़ ने प्रमुख सड़कों और ढाका विश्वविद्यालय को अवरुद्ध कर दिया था, जिसने 15 लाख की आबादी वाली राजधानी को पूरी तरह से ठप्प कर दिया.

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने ढाका विश्वविद्यालय के कुलपति के परिसर के निवास में प्रवेश किया, जिससे उनके परिवार को छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा. प्रधानमंत्री ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि जिन लोगों ने उन पर हमला किया, उन्हें दंडित किया जाएगा.

प्रदर्शनकारियों को ढाका की सड़कों पर रोकने के लिए, पुलिस ने रबर की गोलियां और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें करीब सौ लोग घायल हो गए.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान जो पाकिस्तान से आज़ादी मिलने के बाद बांग्लादेश के आर्किटेक्ट भी थे ने कोटा ख़त्म करने की अपने समय की सभी मांगों को खारिज कर दिया था.