सरिता विशेष

जिस हिन्दू युवा वाहिनी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ताकत माना जाता है वहीं से उनको चुनौती मिल रही है. 2017 के विधानसभा चुनावों के पहले हिन्दू युवा वाहिनी ने प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह को संगठन से बाहर निकाल दिया था. सुनील सिंह पर आरोप लगा कि उन्होंने संगठन के लोगों को चुनाव मैदान में उतार कर आदेश की अवहेलना की थी. हिन्दू युवा वाहिनी को योगी आदित्यनाथ के नाम से ही जाना जाता था. पहले सुनील सिंह उसके प्रदेश अध्यक्ष और योगी आदित्यनाथ उसके सरंक्षक थे.

सुनील सिंह अपने निष्कासन को गलत मानते हैं. उनका कहना है कि योगी जी उनके गुरू है. भाजपा ने उनको गुमराह किया है. सुनील सिंह ने अपनी बात रखने के लिये लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस में आनन फानन में एक बैठक का आयोजन किया और खुद को हिन्दू युवा वाहिनी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया.

योगी सरकार को यह काम सही नहीं लगा. बिना अनुमति के बैठक करने के आरोप में सरकार ने गेस्ट हाउस के व्यवस्थाधिकारी आरपी सिंह को निलंबित कर दिया. सुनील सिंह कहते है हिन्दू युवा वाहिनी का मैं प्रदेश अध्यक्ष हूं. मैं अपने संगठन का विस्तार करना चाहता हूं. इसलिये अब इसका राष्ट्रीय स्तर पर गठन किये जाने की जरूरत पर बल दिया और खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया. हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश महामंत्री पीके मल्ल का कहना है कि जो आदमी संगठन से पहले ही निकाला जा चुका है उसके दावों का कोई मतलब नहीं रह जाता है.बै ठक के बाद से सुनील ही पर्दे से गायब हैं.

sunil singh declares himself as national president of hindu yuva vahini

योगी भले ही सुनील सिंह को अपने संगठन से निकाल चुके हों, पर सुनील सिंह आज भी योगी को ही अपना गुरु मानते हैं. उनका कहना है योगी जी मेरे लिये राम की तरह हैं. मैं उनका सेवक हनुमान हूं. भाजपा के कुछ लोग उनको लड़ाना चाहते हैं. जिस दिन योगी जी भाजपा के काले जादू से बाहर आयेंगे उस दिन उनको गले लगायेंगे. सुनील सिंह कहते हैं मैं भाजपा से अपने गुरु के अपमान का बदला लूंगा. भाजपा आज हमारे गुरु को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर दे तो वह भाजपा कार्यालय में चाय पिलाना मंजूर कर लेंगे. सुनील सिंह खुद को हनुमान बताते कहते हैं कि हनुमान ने लंका में आग लगाने के लिये राम से इजाजत नहीं ली थी. मेरे लिये भी भाजपा लंका की ही तरह है.

भाजपा और हिन्दू युवा वाहिनी के लोग सुनील सिंह के कामों को विरोधी गतिविधियां मानते हुये विपक्षी दलों की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं. दूसरी ओर राजनीति के जानकार यह मान रहे हैं कि हिन्दू युवा वाहिनी के विवाद को भड़का कर योगी को कमजोर करने की कोशिश में भाजपा के कुछ लोग भी लगे हैं. उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह चर्चा का विषय है कि भाजपा में योगी का भविष्य 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम पर निर्भर करेगा. ऐसे में अगर योगी ताकतवर रहेंगे तो उनके खिलाफ मनमानी करना आसान नहीं होगा. ऐसे में अगर हिन्दू युवा वाहिनी कमजोर रहेगी, तो योगी आदित्यनाथ पार्टी के हर फैसले को मान लेंगे.