सरिता विशेष

‘पार्टी विद अ डिफरैंस’ की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की तर्ज पर रंगों को ले कर राजनीति कर रही है. भाजपा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश को भगवा रंग में रंगा देखना चाहती है. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार के हर काम में भगवा रंग छाया है.

सरकारी प्रचारप्रसार से ले कर सरकारी बिल्डिंग तक के रंग बदलने लगे हैं. मुख्यमंत्री आवास, मुख्यमंत्री सचिवालय, सूचना विभाग की प्रचार सामग्री से ले कर थाने की इमारत के रंग यहां तक कि परिवहन महकमे की बसों के रंग भी बदले गए हैं.

उत्तर प्रदेश में इस से पहले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी पार्टी के रंग में प्रदेश को रंगने का काम किया था. उस समय भाजपा इस बात की बुराई करती थी. अब वह  खुद पार्टी के भगवा रंग में पूरे प्रदेश को रंग रही है तब उस का कहना यह है कि भगवा ऊर्जा का रंग होता है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत समाज से हैं. वे भगवा कपड़े पहनते हैं. जब वे मुख्यमंत्री बने तो उन के सरकारी आवास को उन के रहनसहन के हिसाब से बनाया जाने लगा. हवनपूजन कर के मुख्यमंत्री आवास ही नहीं, बल्कि उस के सामने की सड़क तक को शुद्ध किया गया. इस के लिए गोरखपुर से खासतौर पर पुजारी बुलाए गए.

योगी आदित्यनाथ संत हैं, ऐसे में यह बात जनता ने स्वीकार कर ली. इस के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय और सरकारी बसों के रंग बदले गए. सरकारी प्रचार और दूसरे आयोजनों की कलर स्कीम बदल दी गई. इस के बाद हर सरकारी काम में भगवा रंग का असर पड़ने लगा. जहां भी नया रंगरोगन शुरू हुआ, भगवा रंग छा गया.

बुराई से बदल गया रंग

उत्तर प्रदेश के विधानसभा भवन के एक तरफ भाजपा का प्रदेश कार्यालय है, जिस की बाहरी दीवार भगवा रंग में रंगी है. बीच में विधानसभा का नया लोकभवन है, जो राजस्थानी पत्थर से बना है. इस के आगे उत्तर प्रदेश हज कमेटी का भवन है, जिस की दीवार सफेद रंग से रंगी थी. 3 जनवरी, 2018 को नए साल में इस की दीवार को भगवा रंग में रंग दिया गया. हज कमेटी का संबंध मुसलिम समाज से है. ऐसे में भगवा रंग रंगने की बुराई होने लगी.

भाजपा के मुसलिम नेताओं ने भी यह कहना शुरू कर दिया कि भगवा रंग ऊर्जा का रंग है. इस में कोई हर्ज नहीं. भाजपा में शामिल तमाम मुसलिम नेता भगवा रंग में रंग चुके हैं. भगवा गमछा और सदरी इन के पहनावे की खास पोशाक बन गई है.

समाज के दूसरे तबके में हज कमेटी के दफ्तर को भगवा रंग में रंगने की बुराई शुरू हो गई. भाजपा के रणनीतिकारों ने भी इस को सही कदम नहीं माना. ऐसे में दूसरे दिन भगवा रंग को वापस सफेद किया गया. सरकार ने इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की. यह कह कर सफाई दी कि रंगरोगन करने वाले ठेकेदार ने गलती से इसे कर दिया था.

यह बात हजम होने वाली नहीं है. लोकसभा चुनाव से ले कर विधानसभा और निकाय चुनाव तक भाजपा को केवल हिंदुत्व का ही साथ काम आया है. यह हिंदुत्व का ही उभार था जिस के दबाव में जनता नोटबंदी, जीएसटी और महंगाई जैसे मुद्दों को छोड़ भाजपा को वोट दे आई. ऐसे में भाजपा पूरे देश में इस भगवा रंग का प्रचार करना चाहती है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनावी प्रचार में उत्तर प्रदेश से बाहर प्रमुखता के साथ बुलाया गया. गुजरात, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में वे पार्टी के स्टारप्रचारक बन गए. योगी सरकार में मुख्यमंत्री के प्रभाव का पूरा देश गवाह है, ऐसे में बिना सरकार की जानकारी में आए हज कमेटी की दीवार सफेद से भगवा कैसे हो सकती है? यह विचार का विषय है.

अलग होती हैं पार्टी और सरकार

इस देश का संविधान पार्टी और सरकार को अलग मानता है. संविधान मानता है कि चुनाव लड़ने के बाद जीत कर सरकार बनाने वाले विधानसभा सदस्य देश और प्रदेश की जनता का खयाल रखने वाले होते हैं. उन के लिए पार्टी और गैरपार्टी का कोई मतलब नहीं होता है. उन को सभी को समान नजर से देखना चाहिए. जनता को भी सरकार पर पूरा हक होता है. यही वजह है कि किसी भी सरकार में उस का रंग अलग होता है.

हाल के कुछ सालों में अलगअलग दलों ने पार्टी के रंग में सरकार को रंगने का प्रयास शुरू किया. उस समय उन सरकारों की भरपूर आलोचना भी हुई. भाजपा भी इस बात की समर्थक थी कि सरकार और पार्टी का रंग अलग होना चाहिए.

उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह की सरकारें रही हैं. उन के समय में सरकार पर कभी भगवा रंग नहीं चढ़ा. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार पर भगवा रंग चढ़ने लगा, जो किसी भी तरह से संविधान के अनुकूल नहीं कहा जा सकता है.

जिस बात के लिए भाजपा कभी सपा व बसपा को गलत बताती थी, आज खुद उसी राह पर है. भाजपा इस बात को समझती है कि देश में केवल एक वर्ग का साथ ले कर वह सरकार कायम नहीं रख पाएगी. इस कारण ही वह मुसलिम कानून में सुधार कर खुद को उदारवादी दिखना चाहती है. तीन तलाक कानून से ले कर मदरसों में शिक्षा के आधुनिकीकरण के पीछे यही सोच साफ दिखती है.

भाजपा एक तरफ हिंदुत्व में पुरानी सनातनी कानून की पक्षधर दिखती है तो दूसरी तरफ मुसलिमों में वह उदारवादी सोच के साथ दिखना पसंद करती है. ये विरोधी काम एकसाथ करना कठिन है. इस को बनाए रखने के लिए ही वह भगवा रंग का सहारा ले रही है, जिस से उसे हिंदुत्व को ले कर कुछ कहना न पड़े और लोगों को भगवा में हिंदुत्व का उभार दिखता रहे.

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