छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के नेताओं की चहुंबारा है. भाजपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन के नेताओं को प्रचार की कमान सौंप रखी है. योगी कैबिनेट के कई मंत्री यहां पर जनसंपर्क कर रहे हैं. कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजब्बर यहां स्टार प्रचारक हैं. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती अपने दल के सबसे बड़े प्रचारक हैं.

अखिलेश यादव के साथ प्रचार कर रहे सपा नेता राम गोबिंद चौधरी की इसी प्रचार अभियान में तबीयत खराब हो गई और वह अस्पताल में भर्ती हो गये. छत्तीसगढ़ से दूर उत्तर प्रदेश की राजधनी लखनऊ से प्रचार प्रबंध की योजना को तैयार किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ की सीमा भले ही उत्तर प्रदेश से न लगी हो पर यहां के लोगों में उत्तर प्रदेश के नेताओं का बहुत आकर्षण है. भाजपा ने योगी आदित्यनाथ की सभायें हर चुनाव के बाद लगाई हैं. योगी अपने भाषणों में राममंदिर को ही मुख्य मुद्दा बना रहे हैं. जब से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह ने योगी आदित्य नाथ के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया है तब से योगी का प्रभाव वहां बढ़ गया है. योगी का पहनावा और उनके बात करने का अंदाज नेता का भाषण कम और संत का प्रवचन अधिक लगता है. ऐसे में उनकी सभाओं में लोगों की भीड़ जुटने लगी है.

बसपा नेता मायावती ने भले ही छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी से चुनावी गठबंधन किया हो पर भाजपा से नाराज दलित और आदिवासी उनके पक्ष में नहीं खड़ा है. उसे लगता है कि मायावती केवल वोट मांगने के समय ही आती हैं. जब दलितों पर अत्याचार होते है और विरोधी उनको प्रताड़ित करते हैं तो भी बसपा उनके साथ खड़ी नहीं होती है. ऐसे में बसपा का केवल दलित और आदिवासियों को वोटबैंक समझना भारी पड़ रहा है.

अखिलेश यादव का यहां वोटबैंक भले ही नहीं हो पर लोगों में उनका आकर्षण बना हुआ है. छत्तीसगढ़ के चुनाव में उत्तर प्रदेश के लड़ाकू नेता अपने भाषणों से क्या असर जनता पर डाल पाएंगे, यह तो परिणाम ही बतायेगा पर चुनावी सभाओं में यह नेता बाजी मारने में सफल हो रहे हैं.

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