सरिता विशेष

नास्तिक तो नास्तिक ही सही
मैं जपतप प्रार्थना मंत्र
के नाम पर दूसरों
के शब्द नहीं दुहरा सकता
धर्म के लिए निरीह
प्राणियों को नहीं

काट सकता
मैं निगुरा ही भला
तथाकथित गुरुओं के कहने पर
जाति विशेष पर प्रहार
नहीं कर सकता
भले ही मुझे सौ नरकों
की यातना सहनी पड़े
पर नहीं जा सकता
मैं ईश्वर की चमचागीरी
करने मांग पत्र ले कर

मैं नहीं जा सकता
मंदिरोंमसजिदों में
जहां चढ़ावादक्षिणा
की कीमत होती हो
ओ ईश्वर
चाहे मुझे जो सजा दे
मुझ से नहीं होगा
तेरा घर बनाने के लिए

दूसरों के घर को मिटाना
मैं नहीं खींच सकता
धर्म की रक्षा के लिए कटार
ईश्वर आप हैं मैं नहीं
आप मुझे भले
ही कायर कह दें.
मुझ से नहीं पढ़े जाएंगे

पोथीपुराण में
नाम पर भ्रमित करते
शब्दों के जाल.
धर्मग्रंथों को पढ़ कर
मैं नहीं बनना चाहता
चालाक और निर्दयी
मैं भूखा ही सही
मैं नास्तिक ही भला
नहीं हो सकता मैं
शामिल पंथ महंत
के खेमों में

नहीं कर सकता
भेद मानवमानव में.
मैं ईसा की भांति
सूली पर चढ़ कर
विरोधियों को क्षमा
करना चाहता हूं
मैं गांधी की तरह
गोली खा कर क्षमा सिखाना चाहता हूं
मैं प्राणी मात्र में ईश्वर देखना चाहता हूं
सारे अधर्मी धर्मग्रंथ मुझे क्षमा करें.

– देवेंद्र कुमार मिश्रा