कुछ ऐसा तुम बोलो प्रिये

पतझड़ भी मुसकराएं

डालें गलबहियां पुष्प पुष्प को

कांटे झुका नजर शरमाएं

भावों से छू लो भावों को

दिल से दिल का संगम हो

नजरों से जब मिले नजर

रगरग में स्पंदन हो

बिना कहे ही कहो कुछ ऐसा

उथलपुथल मच जाए

गठरी मन की खोलो प्रिये

पलपल का हिसाब करो

अगलेपिछले सारे शिकवे

एकएक कर साफ करो

यों पुकारो प्यार से मुझ को

मन लहरलहर लहराए

डाले गलबहियां पुष्प पुष्प को

कांटे झुका नजर शरमाएं.

       

– सपना मांगलिक