सरिता विशेष

पन्ने तो सब भर गए हैं कहो तो लिख दूं तुम्हारे दिल पर
पहुंचा दूं कुछ संदेश
अपना मौसम भी बतलाना कुछ कलरव हो तो आ जाऊं
धर कर घूंघट वाला वेश

विमानों से हवाओं में उड़ना लुभाता पांव धरती पर रखता तो पता चलता
रोमरोम में बसा सोंधी माटी वाला देश
आ भी जाओ बहुत हो चुका उजियारा मचला है अब बांधूंगा
अंधियारों वाले लंबेलंबे केश

मेरा मन तो सरल, सघन है जी में आए तो कर दूं पल में
चाय के संग चांदसितारे पेश.

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