तुम ने मुझे छुआ तो बदन जगमगा गया

कोई जला चराग, सहन जगमगा गया

ये फूल कौन सा तेरे माथे पे खिल गया

गुजरे इधर से तुम जो, चमन महमहा गया

इस दर पे तेरा नाम हवाओं ने लिखा था

खुशबू के बोझ से ये बदन थरथरा गया

इतनी थी आरजू कि मेरे दर पे वो रुकें

आए जो मुकाबिल तो कदम डगमगा गया

चलते हो धूप में कभी साए में बैठ लो

देखो तो किस तरह ये बदन तमतमा गया

हम ने तो उस परी से कोई बात भी न की

किस के ये बोल थे कि बदन गुनगुना गया.

 

- राकेश भ्रमर

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