कविता

चैन न मिले

16 November 2016

अगर तन मिले मगर मन न मिले

जैसे बिछौना मिले, नींद न मिले

अगर सुख मिले मगर चैन न मिले

जैसे दर्द मिले, हमदर्द न मिले

अगर आवाज मिले मगर शब्द न मिले

जैसे जिंदगी मिले मगर प्यार न मिले

अगर दो जिस्म मिलें मगर जां न मिले

जैसे इंसान मिले, इंसानियत न मिले.

- अमित सक्सेना

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