‘राजश्री प्रोडक्शन’ की हिंदी फिल्म ‘पायल की झंकार’ में कोमल महुआकर के साथ सेकंड लीड में अभिनय कर अपने करियर की शुरूआत करने वाली बंदिनी मिश्रा अब भोजपुरी फिल्मों में मां के किरदार में नजर आती हैं. जबकि उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा व हेमा मालिनी के साथ ‘‘फांसी के बाद’’, गोविन्दा व मंदाकिनी के साथ ‘प्यार मोहब्बत’ के अलावा ‘आगे की सोच’ और ‘खोल दे मेरी जुबान’’ में दादा कोंडके की नायिका के रूप में अभिनय करने के अलावा हिंदी भाषा की तीन दर्जन से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा विखेरा था.

इसके बाद जब उन्हे हिंदी फिल्मों में हीरोईन के रूप में काम मिलना बंद हो गया, तो बंदिनी मिश्रा ने भोजपुरी फिल्मों की तरफ रूख करते हुए सुजीत कुमार के साथ भोजपुरी फिल्म ‘‘पान खाये सईंया हमार’’ में नायिका बनी, जिसमें रणजीत खलनायक थे तथा इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और रेखा ने अतिथि कलाकार के रूप में काम किया था. पर वह भोजपुरी फिल्मों में भी ज्यादा समय तक हीरोईन के रूप में काम नहीं कर सकी. तो वह मां के किरदार निभाने लगी.

अब तक वह पचास से अधिक फिल्मों में मां की भूमिकाएं निभा चुकी हैं. बहुत जल्द वह बाली की ‘जिद्दी’ और राजकुमार पांडेय की ‘ट्रक डाईवर-2’ में भी मां के किरदार में नजर आएंगी. इस तरह देखा जाए तो बंदिनी ने काफी फिल्में की हैं. पर उन्हे आज भी गम है. अपने इस गम का इजहार करते हुए बंदिनी मिश्रा कहती हैं-‘‘मैंने कत्थक नृत्य में विशारद की उपाधि हासिल करने के बाद फिल्मों में कदम रखा था. मैं फिल्मों मे हीरोईन बनी. मां भी बनी. फिल्म ‘सेनूर’ में मैंने केवल नृत्य किया था. मगर मुझे इस बात का गम हमेशा सताता रहता है कि मेरी नृत्य प्रधान भूमिका करने की लालसा पूरी न हो पायी. मैं चाहती थी कि ‘उमराव जान’, ‘किनारा’या ‘साधना’ जैसी फिल्में करने का अवसर मिले, पर मेरी यह इच्छा कभी पूरी न हो सकी और अब तो कोई उम्मीद ही नही रही.’’