लगभग तीन साल की खामोशी के बाद विद्या बालन की वापसी वाली फिल्म ‘‘कहानी 2’’ ने बाक्स आफिस पर कोई खास करिश्मा नहीं दिखलाया, इससे अब विद्या बालन अपने करियर पर काफी गंभीरता से विचार करने लगी हैं. जिसकी वजह से उन्होंने मलयालम फिल्म ‘‘अमी’’ करने से इंकार कर दिया. फिल्म ‘अमी’ मशहूर विवादास्पद कवि कमलादास की बायोपिक फिल्म है. जिसे करने के लिए विद्या बालन ने अग्रीमेंट भी साइन किया था. उन्होंने इस फिल्म के लिए लुक टेस्ट दिया था. विद्या बालन ने अपनी तरफ से इस फिल्म को लेकर काफी तैयारी कर ली थी. विद्या बालन ने इस फिल्म में अभिनय करने के लिए कमलादास की आटोबायोग्राफी भी पढ़ी है. विद्या बालन के अनुसार कमला दास को लोग सही ढंग से समझ नहीं पाए थे. यानी कि काफी तैयारी करने के बाद भी विद्या बालन इस फिल्म की शूटिंग शुरू करने से हिचकती रही हैं. वह दो बार शूटिंग शिड्यूल बदलवा चुकी हैं. अंततः अब विद्या बालन ने खुद को इस फिल्म से अलग कर लिया है.

सूत्रों के अनुसार इसकी मूल वजह फिल्म निर्देशक कमलुद्दीन मोहम्मद उर्फ कमल के साथ उनके रचनात्मक मतभेद हैं. सूत्र बताते हैं कि विद्या बलान इस फिल्म के कंटेंट को लेकर निर्देशक के साथ कई बैठकें कर विचार विमर्श करना चाहती थीं, पर निर्देशक उतना समय उन्हें नहीं देना चाहते थे, इसलिए विद्या बालन ने फिल्म छोड़ दी.

तो दूसरी तरफ राष्ट्रगीत का सिनेमाघर के अंदर अपमान करने को लेकर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और अब तक 48 फिल्में बना चुके फिल्म के निर्देशक कमल केरला में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर हैं. कुछ दिन पहले केरला राज्य की भाजपा के महासचिप ए एन राधाकृष्णन ने कमल से राष्ट्रगीत का अपमान करने के कारण देश छोड़ने के लिए भी कहा था.

निर्देशक कमलुद्दीन मोहम्मद उर्फ कमल का दावा है कि विद्या बालन ने हिंदू संगठनों से डर कर उनकी फिल्म छोड़ी है. ज्ञातब्य है कि कमलादास ने अपने जीवन के अंतिम चरण में मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था. तो वहीं एक सूत्र का दावा है कि शिवसेना पार्टी से चेतावनी मिलने के बाद विद्या बालन ने इस विवादास्पद फिल्म से  खुद को दूर कर लिया.

विद्या बालन तो चुप हैं. मगर विद्या बालन के प्रवक्ता का दावा है कि रचनात्मक मतभेदों के चलते विद्या बालन ने यह फिल्म छोड़ी है. निर्देशक जिस तरह से इस फिल्म को बनाना चाहते हैं, उससे विद्या बालन सहमत नही हैं. पर निर्देशक कमल का दावा है कि विद्या बालन ने यह निर्णय राष्ट्रीय स्वयं सवेक संघ के दबाव में लिया है.