विद्या बालन एक संजीदा अदाकारा ही नहीं बल्कि संजीदा इंसान भी हैं. आज की तारीख में भले ही उन्हे एक बेहतरीन अदाकारा माना जाता है, मगर उनकी अभिनय जिंदगी की शुरुआत मुंबई के पृथ्वी थिएटर से ही शुरू हुई थी. इन दिनों वह सुज्वाय घोष निर्देशित फिल्म ‘‘कहानी 2-दुर्गा रानी सिंह’’ को लेकर चर्चा में हैं, मगर वह तीन नवंबर को ‘पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल’ में नाटक ‘‘चलती का नाम गाड़ी’’ देखने पहुंची, तो उन्हे आनंद की अनुभूति हुई. विद्या बालन ने बाकायदा ट्वीट कर इस नाटक की प्रशंसा की और लोगों से कहा कि वह भी इस नाटक को जाकर देखे.

मगर बहुत कम लोगों को पता है कि इस बार ‘‘पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल’’ में जाकर उन्होंने उस कमी को पूरी किया, जिसको लेकर उन्हे बड़ा बुरा लगता था. खुद विद्या बालन ने इस बारे में ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए कहा-‘‘हर वर्ष जब भी पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल होता था, तो मैं जा नहीं पाती थी. मुंबई में होते हुए भी शूटिंग की वजह से या अन्य वजह से व्यस्त रहती थी. इस वर्ष मैंने पहले ही निर्णय कर लिया था कि इस बार तीन नवंबर को मैं पृथ्वी थिएटर नाटक देखने जरुर जाऊंगी. मैं पृथ्वी थिएटर से पांच मिनट की दूरी पर रहती हूं, पर नाटक देखने नहीं जा पाती थी, तो मुझे अंदर से बुरा लगता था. इस बार गयी तो आनंद आया. मैंने एक नाटक ‘चलती का नाम गाड़ी’ देखा. नसिरूदद्दीन शाह, नादिरा बब्बर, रत्ना पाठक शाह सहित कई दिग्गज रंगकर्मियों को मंच पर देखा. संजना कपूर से मुलाकात हुई. अच्छा लगा. वास्तव में मैं करियर की बात नहीं कर रही हूं, मगर मेरे अभिनय की जो जिंदगी है, वह पृथ्वी थिएटर से ही शुरू हुई थी. जब मेरी उम्र 15 वर्ष की थी, तब मैंने पहली बार पृथ्वी थिएटर पर एक वर्कशाप किया था. तब से पृथ्वी थिएटर मेरी जिंदगी का एक हिस्सा हैं.’’

जब हमने उनसे पूछा कि यह  अभिनय का वर्कशाप था या..? तो विद्या बालन ने कहा-‘‘यह बच्चों के लिए अभिनय का वर्कशाप था. हम लोग वहां रिहर्सल करते थे. कुछ कसरतें भी कर लेते थे. वर्कशाप के अंत में हम लोगों ने एक नाटक किया था. जिसका मैंने निर्माण किया था, उसमें अभिनय भी किया था. जिसके दो तीन शो हुए थे. चीत्री खानवलकर जी हमारे वर्कशाप के गुरू थे. उसके बाद मैंने थिएटर कभी किया नहीं, पर मैं नाटक देखती रही हूं.’’