आमिर खान की फिल्म ‘‘लगान’’ सहित अन्य कई फिल्मों के मशहूर नृत्य निर्देशक व नृत्य के रियालिटी शो ‘‘डांस इंडिया डांस’’ के जज,  रियालिटी शो ‘‘खतरों के खिलाड़ी’’ में प्रतियोगी रह चुके और लघु फिल्म ‘‘द गुड गर्ल’’ में अभिनय कर शोहरत बटोर रहे टेरेंस लुईस मूलतः अंग्रेजी भाषी हैं. उनकी मातृभाषा अंग्रेजी है. उनकी शिक्षा दीक्षा अंग्रेजी माध्यम यानि कि कांवेंट स्कूल में हुई है. वह स्कूल के दिनो में फ्रेंच भाषा के साथ, विद्यालय नियम के मुताबिक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ते थे.

लेकिन जब टेरेंस लुईस टीवी चैनल पर बात करते हैं या पत्रकारों से मिलते हैं, तो एकदम साफ उच्चारण वाली क्लिष्ट हिंदी में ही बात करते हैं. टेरेंस लुईस के हिंदी उच्चारण में कहीं भी अंग्रेजी वाला एक्सेंट नहीं नजर आता. उन्हे हिंदी में बात करते हुए देखकर यह मानना मुश्किल हो जाता है कि टेरेंस लुईस की मातृभाषा अंग्रेजी है. बल्कि लोग सोचने लगते हैं कि इनकी मातृभाषा हिंदी ही है और वे मुंबई की बजाय उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद, कानपुर या लखनऊ शहर में पले बढ़े हैं.

इसी के चलते हाल ही में जब टेरेंस लुईस से उनके मुंबई स्थित दफ्तर में हमारी मुलाकात हुई, तो उनके मुंह से शुद्ध हिंदी उच्चारण को सुनकर हमने उनसे पूछ ही लिया कि उन्होंने इतनी साफ हिंदी बोलना कहां से सीखा? इस पर ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिव बात करते हुए टेरेंस लुईस ने कहा- ‘‘यॅूं तो मैं हर किसी से कह देता हूं कि मजबूरी ने हिंदी सिखा दी, मगर आज पहली बार आपको व आपकी पत्रिका ‘सरिता’ को सच बताना चाहूंगा. यह सच है कि मेरी मातृभाषा अंग्रेजी है पर स्कूल मे मैंने फ्रेंच भी पढ़ी है. स्कूल व कालेज के दिनों में मैं अंग्रेजी भाषण प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता था और जीतकर आता था और हिंदी वाला हर बार हारकर आता था. उस भाषा में मुझे जोश व कहने का लजहा नहीं था जिससे कि मैं विजेता बनता, पर शिक्षकों ने मुझे भेजने का निर्णय लिया. उस वक्त तक मेरी हिंदी अच्छी नहीं थी".

"मैं मुंबई में अंधेरी व विलेपार्ले के बीच ईर्ला इलाके की पठान चाल में पैदा हुआ हूं, इसलिए हिंदी बोल तो जरुर लेता था, हिंदी समझ लेता था. कभी मेरी हिंदी में अंग्रेजी वाला एक्सेंट नहीं था, क्योंकि मैं जिस चाल में रहता था, उस चाल में सभी हिंदी व उर्दू बोलते थे. उनके बीच बचपन से ही मैं हिंदी में ही बात किया करता था, पर ये हिंदी मुंबईया थी और स्कूल में शुद्ध क्लिष्ट इलाहाबादी हिंदी हमें पढ़ाई जाती है. तब शिक्षकों ने मुझे हिंदी पढ़ना व लिखना सिखाना शुरू कर दिया था. नौंवी व दसवीं कक्षा तक मेरी हिंदी काफी सुधर गयी और हाई स्कूल में मुझे अंग्रेजी की बनिस्बत हिंदी में ज्यादा अच्छे नंबर मिले. कॉलेज में हिंदी से मेरी दूरी बढ़ गयी थी. फिर जब मैं ईर्ला छेाड़कर बांदरा रहने आ गया, तो हिंदी छूटती गयी. सच कहूं तो ‘डांस इंडिया डांस’ के पहले सीजन में जब मैं जज बनकर गया, तो मैं बहुत गलत हिंदी बोलता था. मुझे खुद शर्म आयी. मैं प्रोफेशनल हूं और सब कुछ सही ढंग से करना पसंद करता हूं. मैने ‘डांस इंडिया डांस’ के अपने डीवीडी मंगाकर घर पर बैठकर देखे, अपनी गलतियों पर मुझे जैसे रोना आ गया. फिर मैंने नए सिरे से किताबे मंगाकर हिंदी सीखना शुरू किया. घर पर हिंदी के समाचार पत्र नवभारत टाइम्स वगैरह मंगाना शुरू किया. दिन रात हिंदी के शब्द सीखना शुरू किया. टीवी पर भी सिर्फ समाचार ही देखता व सुनता था. फिर मुझे आठवीं, नौवीं व दसवीं में जो कुछ हिंदी के शब्द सीखे थे, वो सब याद आने शुरू हो गए. मगर मुंबई में रोजमर्रा की जिंदगी में हम अच्छी हिंदी बोलते ही नही हैं. पर ‘महाभारत’ सीरियल में जो हिंदी थी, वह मुझे आकर्षित नहीं करती. मुझे वह हिंदी आकर्षित करती है, जिस तरह की हिंदी अमिताभ बच्चन जी बोलते हैं. जब वह बात करते हैं, तो उनका लहजा, बात करते समय उनका ठहराव, विचार मुझे पसंद आते हैं. मैं भी उन्ही की तरह साफ, शुद्ध हिंदी में बात करना व हिंदी भाषा को सम्मान देने का प्रयास करता हूं. मुझे भिन्न- भिन्न भाषाओं को सीखने का बहुत शौक है और साथ ही लिखावट भी अच्छी होनी चाहिए."

जब हमने उनसे पूछा कि अब वह हिंदी की किताबे पढ़ना पसंद करते हैं अथवा अंग्रेजी की? तो टेरेंस लुईस ने बड़ी साफ गोई के साथ कहा- ‘‘इंसान के अंदर इमानदारी जरुरी है. तभी वह सफलता पाता है. मैने प्रेमचंद की तमाम कहानिंयां पढ़ी हैं, मेरे पास गुलजार की कुछ किताबे हैं, जिन्हें पढ़ता रहता हूं. मैं ज्यादातर हिंदी में लिखी हुई किताबें घर पर लेकर आता हूं और पढ़ता हूं. मैं जब भी पृथ्वी थिएटर जाता हूं, तो वहां से कोई न कोई हिंदी साहित्य या नाटक की किताब लेकर आता ही हूं. मैंने अपने सदगुरू की आध्यात्मिक किताबें भी हिंदी में ली हैं. मेरे लिए आध्यात्मिक किताबों को हिंदी में पढ़ना मुश्किल हो जाता है, पर मैं ऐसा ही करता हूं. मुझे अच्छा लगता है, जब कोई मुझसे साफ शुद्ध या क्लिष्ट हिंदी में बात करता है.’’

टेरेंस लुईस इन दिनों एक फिल्म की पटकथा लिखने में व्यस्त हैं. उन्होने कुछ कतिवाएं भी अंग्रेजी भाषा में लिखी हैं. इसकी चर्चा करते हुए टेरेंस ने कहा- ‘सच कहूं तो मैं अंग्रेजी में ही लिखता रहा हूं, मैं हिंदी में कविताएं नहीं लिखता और अंग्रेजी में बड़ी फूर्ती से कविताएं लिख लेता हूं. सच यह है कि हिंदी में लिखते समय मुझे समय लगता है. हां कुछ कहानियां लिखी हैं. अभी एक टूटे दिल की कहानी लिखी है, पर वह भी अंग्रेजी में लिखी है. एक कविता को लिखने में मुझे एक माह का वक्त लगता है. दिल को छू जाने वाली कविताएं लिखना पसंद करता हूं. मैं व्यंग नहीं लिखता और मैं किसी पर व्यंग करता भी नहीं. मुझे अपने आप पर कोई घमंड नहीं है. मुझे हंसाने वाले या मेरी खिल्ली उड़ाने वाले लोग मुझे पसंद हैं.’