मुम्बई की रहने वाली सोनाली निकम के परिवार में कोई भी एक्टिंग की फील्ड में नहीं था. उनके पिता पुलिस ऑफिसर हैंऔर मम्मी हाउस वाइफ. ऐसे में एक्टिंग की फील्ड में जाना सरल नहीं था. 12वी की पढ़ाई के बाद सोनाली को कुछ विज्ञापन शूट करने का ऑफर मिला. यहां से उसने सोचा की उसे एक्टिंग की फील्ड में जाना चाहिये. सोनाली के लिये सबसे मुश्किल काम अपने पिता को इसके लिये राजी करना था. इस बीच 2009 में जीटीवी पर उसे ‘गोद भराई’ सीरियल में काम मिल गया. इसमें उसकी एक्टिंग और काम को देखकर पिता ने आगे एक्टिंग में करियर बनाने के लिये हां कर दिया. 8 साल के अपने एक्टिंग कैरियर में सोनाली निकम ने पत्नी, बहू और भाभी जैसे हर किस्म के घरेलू किरदार को निभा लिया है. एंड टीवी के फिक्शन शो ‘एक विवाह ऐसा भी’ में सोनाली विधवा बहू का किरदार निभा रही हैं.

8 साल के करियर में सोनाली ने बड़े नाम वाले कम से कम 10 सीरियलों में अलग-अलग तरह के रोल किये पर उसकी वह पहचान अभी भी बननी बाकी है, जिसके लिए एक एक्ट्रैस तरसती है. एक सीधी-साधी भूमिका वाले किरदार ही सोनाली के खातें में आते हैं. इस बारे में सोनाली कहती हैं ‘मेरी पहचान शुरू से ही इस तरह की भूमिकाओं वाली बन गई है. मेरे अपने दर्शक मुझे पहचानते हैं. सबसे अच्छी यह बात है कि जो परिवार मुझे एक्टिंग की फील्ड में भेजना नहीं चाहता था वह अब मेरी एक्टिंग को पसंद कर रहा है. उसे भी अब यह अच्छा लग रहा है.’

सोनाली को डांस करना, गाने गुनगुनाना अच्छा लगता है. उसे खाने पकाने का भी अच्छा शौक है. वह हर फेस्टिवल को बहुत धूमधाम से मनाना चाहती है.

क्या टीवी ने उसको केवल घरेलू भूमिका में टाइप्ड कर दिया है?

इस विषय में सोनाली कहती हैं ‘ऐसा नहीं कह सकते. मैंने अपने हर शो में अलग तरह के किरदार निभाये है. आगे भी मेरा प्रयास है कुछ अलग कर दर्शकों का दिल जीत सके. मुझे फिल्मों के रोल भी ऑफर हुये है. अगर कोई अच्छा किरदार मिला तो मैं जरूर उसे करूगी. मुझे अपने पर भरोसा है. जिस भी तरह का रोल होगा मैं उसके साथ पूरा इंसाफ करूगी.’

विधवा विवाह पर अपनी सोंच जाहिर करते सोनाली कहती है ‘विधवा विवाह को समाज में स्वीकृति मिलनी चाहिये. विधवा होना किसी दुर्घटना सा है. इसमें लड़की की कोई गलती नहीं होती. सजा सबसे अधिक उसे ही मिलती है. उसे उपेक्षा के भाव से देखा जाता है. अगर उसके बच्चे या कुछ और जिम्मेदारियां है तो दूसरी शादी भी मुश्किल हो जाती है. काफी कुछ हलात बदल रहे है. इसके बाद भी अभी विधवा विवाह को लेकर सोच दकियानूसी है. इसे बदलना जरूरी है. इसको लगातार सामने ला कर बदलने की कोशिश जारी करनी पडेगी.’