हॉलीवुड फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ में जमाल मलिक का किरदार निभाकर चर्चा में आए बाल कलाकार आयुष महेश खेड़ेकर अब 16 साल का हो गए हैं. अब वह फिल्म में हीरो बन गए हैं. इस बार वह इंसानी सपनों को पूरा करने तथा ‘कभी हार न मानो’ का संदेश देन वाले जिग्नेश के रूप में फिल्म ‘एक था हीरो’ में नजर आने वाले हैं.

सचिन एन धकन, अमित सोनी, पायल मडियार व जयेश मडियार द्वारा निर्मित और योगेश पगारे लिखित व निर्देशित फिल्म एक था हीरो की कहानी जिग्नेश नामक 11 साल के बच्चे की कहानी है, जिसे पूरा गांव हीरो कहता है. जिग्नेश का सपना है कि एक दिन उसकी भी अपनी साईकिल होगी. साईकिल के सपने को पूरा करने के लिए जिग्नेश की राह में कई तरह की मुश्किलें हैं.

उसकी मां के पास इतने पैसे नहीं होते कि वह उसे व उसकी बहन को भरपेट खाना खिला सके. तो दूसरी तरफ जिग्नेश गांव वालों की मदद करते हुए उनका दिल भी जीतते रहना चाहता है.

बांबे पोर्ट में इंजीनियर क रूप में कार्यरत महेश खेड़ेकर के बेटे आयुष खेड़ेकर फिलहाल अपनी पढ़ाई को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. वह इन दिनों ग्यारहवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं. वह कहता हैं, ‘मुझे मोबाइल फोन या कंप्यूटर पर गेम खेलने की बनिस्बत क्रिकेट व फुटबॉल खेलने व पढ़ाई में ज्यादा रूचि है. मेरे पिता थिएटर कलाकार रहे हैं. मैं उनके साथ कई नाटक देखने जा चुका हूं.मैं अपनी पढ़ाई का नुकसान किए बगैर ही अभिनय के लिए समय देता हूं. मेरे पापा के साथ-साथ मुझे भी लगता है कि पढ़ाई पहली जरुरत है. मैं अमिताभ बच्चन के साथ एक विज्ञापन फिल्म के अलावा फिल्म ‘फैमिली’ में भी अभिनय कर चुका हूं.’

आयुष आगे कहते हैं, ‘मैं फिल्म एक था हीरो के माध्यम से हर किसी को यही संदेश देना चाहता हूं कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जितनी विपरीत हों, पर इंसान को हार नहीं माननी चाहिए.’