राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘‘मिर्जिया’’ से हिंदी फिल्म जगत में कदम रख रही सैयामी खेर का संबंध भी फिल्मी खानदान से ही है. वह पचास के दशक की चर्चित अदाकारा उषा किरण की पोती और अभिनेत्री तन्वी आजमी की भतीजी है. जबकि शबाना आजमी उनकी मौसी हैं.

मशहूर प्रेम कथा ‘‘मिर्जा साहिबान’’ पर आधारित फिल्म ‘‘मिर्जिया’’ में सैयामी खेर ने साहिबान के अलावा वर्तमान समय की लड़की शुचि का भी किरदार निभाया है. शुचि, साहिबान की प्रेरम कहानी सुनकर प्रभावित होती है. यानी कि साहिबान व शुचि दोनों अपने अपने प्रेमी से प्यार करती हैं. कहने का अर्थ यह है कि सैयामी खेर ने फिल्म ‘मिर्जिया’ में रोमांटिक किरदार निभाया है.

साहिबान और शुचि की तरह सैयामी खेर निजी जिंदगी में भी काफी रोमांटिक हैं. इस बात को उन्होने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से खास बातचीत के दौरान स्वीकार करते हुए कहा- ‘‘देखिए, प्यार न हो तो जिंदगी ही नहीं चलती. मैं बहुत रोमांटिक हूं. प्यार कई तरह का होता है. लड़के व लड़की बीच जो प्यार होता है, वह एक टाइप का प्यार होता है. पर प्यार दादी या कुत्ते से भी हो सकता है. आजकल की युवा पीढ़ी को प्यार की परिभाषा समझ में नहीं आ रही है, इसलिए रिश्ते टूट रहे हैं. इनके बीच झगड़े बढ़ गए हैं. अब दया व प्यार का इक्वेशन कम हो रहा है.’’

जब हमने सैयामी खेर से कहा-‘‘यानीकि वर्तमान पीढ़ी प्यार को नहीं समझ पा रही है?’’इस पर सैयामी खेर ने विस्तार से बात करते हुए यह भी बताया कि एक बार शबाना आजमी की मम्मी शौकत आजमी ने उनसे क्या कहा था. सैयामी खेर ने कहा-

‘‘मैं भी आज की पीढ़ी से ही हूं. पर आप सही कहते हैं. अब प्यार की परिभाषा बदल रही है. दस साल पहले जो प्यार होता था, वह अब नहीं रहा. मैं जब शौकत आपा, जो कि शबाना मौसी की मम्मी हैं, उनके साथ में बहुत बात करती थी. मैने उनके जैसा रोमांटिक कवि भी नहीं देखा. मैं उनसे उर्दू भाषा की ट्रेनिंग लेती थी. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे उनके साथ वक्त गुजरने का वक्त मिला. उन्होंने अपनी बायोग्राफी ‘शौकत एंड आई’ लिखी है. जो कि कैफी साहब और उनकी बहुत प्यारी प्रेम कहानी है. उन्होने मुझसे कहा, ‘बेटे आपकी उम्र के बच्चे मोहब्बत करते ही नहीं हैं. वह सिर्फ टिक मार्क देखते हैं कि इसके पास यह है या नहीं. जबकि लोगों को चाहिए कि वह देखें कि मोहब्बत क्या चीज है. इसका हमारी पीढ़ी में अभाव है.’’