सरिता विशेष

राकेश ओम प्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म ‘मिर्जिया’ का बॉक्स ऑफिस पर जो हश्र हुआ, उसने बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं. ‘मिर्जिया’ से उषा किरण की पोती सैयामी खेर के साथ अनिल कपूर के बेटे व सोनम कपूर के भाई हर्षवर्धन कपूर ने बौलीवुड में अपने अभिनय करियर की शुरूआत की है.

हजारों वर्ष पुरानी मशहूर प्रेम कथा ‘मिर्जा साहिबां’ पर आधारित फिल्म ‘मिर्जिया’ भी प्रेम कहानी ही है, मगर इस फिल्म की दो कमजोर कड़ियां रहीं हर्षवर्धन कपूर और फिल्म के लेखक व गीतकार गुलजार.

फिल्म ‘मिर्जिया’ को सफल बनाने के लिए हर्षवर्धन कपूर के पूरे परिवार के  साथ साथ आधे से ज्यादा बौलीवुड ने एड़ी चोटी का जोर लगाते हुए डेढ़ दो माह तक सोशल मीडिया पर हर्षवर्धन की तारीफों के पुल बांधते रहे. कपूर खानदान ने हर्षवर्धन कपूर को स्टार साबित करने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी.

अमिताभ बच्चन से लेकर लगभग हर दिग्गज कलाकार ने सोशल मीडिया पर हर्षवर्धन के अभिनय की तारीफ करते हुए बहुत कुछ पोस्ट किया. अनिल कपूर ने मीडिया के सामने दावा किया था कि बौलीवुड में हर्षवर्धन कपूर जैसा कलाकार अब तक नहीं आया है और अनिल कपूर का यह भी दावा था कि हर्षवर्धन कपूर बहुत बड़ा स्टार कलाकार है. पर उनके दावे की पोल खुल चुकी है.

पर जब फिल्म प्रदर्शित हुई, तो बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने पानी भी नहीं मांगा. मजेदार बात यह है कि शुक्रवार यानी कि प्रदर्शन के पहले दिन इस फिल्म ने दो करोड़ बीस लाख जुटाए. जबकि दूसरे दिन यानी कि शनिवार को छुट्टी का दिन होते हुए भी यह फिल्म दो करोड़ दस लाख ही कमा पायी. जबकि अमूमन होता यह है कि पहले दिन की बनिस्बत दूसरे व तीसरे दिन हर फिल्म ज्यादा कमाती है.

इससे यह बात साफ तौर पर उभरती है कि पहले दिन जिन लोगों ने फिल्म देखकर अपनी राय अपनी मित्र मंडली तक पहुंचायी, उससे दर्शक इस फिल्म से दूर होते गए. परिणामतः दूसरे दिन छुट्टी होने के बावजूद फिल्म का हाल बुरा हुआ. इतना ही नहीं हर्षवर्धन कपूर तो अपनी बहन सोनम के सामने भी नहीं ठहर पाए. सोनम कपूर की पहली असफल फिल्म ‘सांवरिया’ ने पहले दिन चार करोड़ रूपए से अधिक कमाए थे.

राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने फिल्म ‘मिर्जिया’ काफी भव्य स्तर पर बनाया है. फिल्म का एक एक दृष्य आंखों को भाता है. मगर फिल्म की कहानी इतनी लचर है कि वह दर्शक को बांध नहीं पायी. बतौर निर्देशक राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने हर दृष्य को बहुत बेहतरीन तरीके से फिल्माया है. मगर गुलजार की लेखनी इस बार कमाल नहीं दिखा पायी.

हर किसी का मानना है कि गुलजार की पटकथा बहुत कमजोर है. जिसके चलते निर्देशक कुछ नहीं कर पाया. बौलीवुड के कुछ सूत्र कहते है कि पिछले सत्रह वर्षों से गुलजार ने पटकथा लिखने से तोबा कर ली थी. तो अचानक जब वह लिखेंगे, तो वह धार कहां से आएगी? इसके अलावा कुछ लोग पूरी पटकथा को पीढ़ी के अंतर के रूप में भी देख रहे हैं.

वास्तव में इस आधुनिक युग में नई पीढ़ी का प्यार कॉफी डे से शुरू होकर कॉफी डे पर ही खत्म हो जाता है. गुलजार ने जब सुचि व आदिल या मोसीन की प्रेमकथा लिखी तो वह वर्तमान पीढ़ी की इस सोच को नजरंदाज कर गए. इसी वजह से वर्तमान युवा पीढ़ी इस प्रेम कहानी के संग रिलेट नही कर पा रही है.

वर्तमान युवा पीढ़ी के गले यह बात नहीं उतर रही है कि विदेश में पली सुचि जब राजकुमार करण से प्यार करती है और वह करण से शादी करने को भी तैयार है, फिर भी वह अपने बचपन के प्यार को नहीं भूली और अचानक वह बचपन के प्रेमी से मिलते ही उसकी तरफ हो जाती है.

इतना ही नहीं गुलजार की लेखनी की कमी कहें या हषवर्धन कपूर के अभिनय की कमी कहें,सुचि व आदिल के बीच रोमांस की केमिस्ट्री उभर ही नहीं पाती है. शायद इस बात को हर्षवर्धन कपूर समझ चुके थे, इसीलिए हमसे बात करते हुए हर्षवर्धन कपूर ने सैयामी के साथ अपनी केमिस्ट्री की चर्चा करते हुए कहा था, ‘‘सैयामी मेरी तरह मुंबई जैसे बड़े शहर की लड़की नहीं है, वह नासिक से है, तो इसका असर पड़ता है. मेरी व उनकी परवरिश में बहुत बड़ा अंतर है.

हम शहरी युवक बंदिश वाली जिंदगी जीते हैं. हमारे पास आउटडोर गतिविधियों के लिए कोई जगह या साधन नहीं है. जबकि नासिक में यह सब बहुत उपलब्ध है. काश, मुझे भी सयामी जैसे अवसर मिलते. देखिए एक दृष्य के लिए हम दोनों मेहनत करते हैं, पर हम दोनों के मेहनत करने का तरीका अलग है. मुझे दृष्य के साथ बैठना पडता. मेरी तरह वह मैथड अभिनय को नही अपनाती. वह जो अहसास करती है,उसे ही परफार्म करती है. वह बहुत ही ज्यादा स्पॉन्टेनियस कलाकार है. जबकि मैं हर सीन पर बहुत सोचता हूं.’’

अफसोस की बात यह है कि हर्षवर्धन कपूर ही कमजोर कड़ी साबित हुए. उनकी चार वर्ष की अमरीका की फिल्म पटकथा लेखन व अभिनय की पढ़ाई के अलावा उन्हे तैयार करने के लिए राकेष ओम प्रकाश मेहरा द्वारा उठाए गए सारे कदम धराषशाही हो गए.

उधर आज राकेश ओम प्रकाश मेहरा उन लोगों को कोस रहे होंगे, जिन्होंने ‘मिर्जिया’ को लेकर सोशल मीडिया पर तारीफों के पुल बांधे थे. राकेश ओम प्रकाश मेहरा सोशल मीडिया के पक्षधर नही है. पिछले दिनों एक मुलाकात के दौरान राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने सोशल मीडिया की चर्चा करते हुए कहा था, ‘‘सोषल मीडिया से जुड़ाव बढ़ाकर लोगो ने बंदर के हाथ में उस्तरा थमा दिया है, जो कि अपना ही गला काटेगा. समाचार पत्र से बेहतर कोई साधन नहीं. पर ज्यादातर अखबार अब मीडियानेट हो गए हैं. मीडिया नेट वही खरीद पाता है,जिनके पास पैसा हो. फिर चाहे वह कलाकार हो या फिल्मकार हो. जिनके पास पैसा नहीं है, वह सोशल मीडिया पर ही प्रचार कर रहे हैं. पैसा देकर कलाकार या कुछ निर्माता निर्देशक हर दिन अपने बारे में,खबरें छपवा रहा है. कुछ लोग सोशल मीडिया पर अपनी फिल्म को लेकर सब कुछ बक रहे हैं. यह लोग भूल गए कि सिनेमा, सिनेमा के लिए बना है. उपन्यास पढ़कर ही मजा आएगा. इसलिए सस्पेंस खत्म न करें, पर लोग अपने सिनेमा का सस्पेंस खत्म करने पर आमादा हैं. सोशल मीडिया पर कभी भी कुछ भी कमेंट कर देता है. मैंने अपने कलाकारों पर पाबंदी लगा दी है. सेलेब्रिटी को सोशल मीडिया पर नहीं आना चाहिए. पर वह खुद ही सोशल मीडिया पर अपने आपको सेलीब्रेट कर रहे हैं.’’

राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने सोशल मीडिया को लेकर जो कुछ कहा था,वह बात कुछ हद तक हर्षवर्धन कपूर के संदर्भ में एकदम खरी उतरती है.

बहरहाल, अब बॉलीवुड का एक तबका मान रहा है कि फिल्म ‘मिर्जिया’ व हर्षवर्धन कपूर की तारीफों के पुल सोशल मीडिया पर बांधने वालों ने हर्षवर्धन के करियर में कील ठोंकने का काम किया है.

जबकि बौलीवुड का एक तबका मानकर चल रहा है कि सोषल मीडिया पर हर्षवर्धन की अभिनय क्षमता के कसीदें पढ़ने वालों ने तो अनिल कपूर या सोनम कपूर के साथ अपने संबंध ही निभाए हैं. इसी के साथ बौलीवुड में यह चर्चा गर्म है कि अब बौलीवुड को समझ लेना चाहिए कि सोशल मीडिया पर अपनी पीठ थपथपाने या अपने गाल पर थप्पड़ मार कर गाल लाल कर लेने से आप महान नहीं बन सकते और न ही खुशियां पा सकते हैं.