भगवान कृष्ण का किरदार निभाने के 25 साल बाद फिल्म ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ में दुर्जन नामक किसान के किरदार में नजर आए अभिनेता नितीश भारद्वाज हमेशा भगवान कृष्ण की ही तरह बातें करते नजर आते हैं. इन दिनों उन्हे भी भारत देश के विकास की चिंता सता रही है. उनका मानना है कि जातिवाद का खात्मा किए बगैर देश का सही विकास नहीं हो सकता.

एक खास मुलाकात में नितीश भारद्वाज ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से कहा-‘‘देश के विकास के लिए जातिवाद को मिटाना बहुत जरुरी है. देश को मैरिट के आधार पर आगे ले जाना पड़ेगा. अब जरूरत इस बात की है कि लोगों को धर्म या जाति पर नहीं बल्कि आर्थिक स्थितियों के आधार पर आरक्षण दिया जाए. हर उस पिछडे़ हुए की मदद दी जाए, जिसका आधार जाति ना हो. वर्तमान समय मे समाज में आपको दलित भी अमीर और मध्यमवर्गीय मिल जाएंगे. अब देश को आजाद हुए सत्तर वर्ष हो गए. इसलिए अब कौन पिछड़ा है, यह तय करने की ज्यादा जरुरत है. पहले हमारे यहां किसी की जाति जन्म से तय नहीं होती थी, कर्म से होती थी.

पुराणों में लिखा है कि जन्म से हर इंसान शूद्र होता है. पर कर्म से वह ब्राम्हण या क्षत्रिय बनता है. उस वक्त जो धर्म के आधार पर लोगों को अलग अलग बांटा गया, उसका मकसद किसी को पीड़ा पहुंचाना नहीं था. शूद्र का मतलब सेवा भावी इंसान होता था. इसी के चलते महर्षि वेदव्यास ब्राम्हण हुए. शास्त्र में सारे आधार हैं, तो फिर हम उन मूल आधार से दूर क्यों जा रहे हैं?

जाति के आधार पर आरक्षण क्यों दिया जा रहा है. समाज को आगे बढ़ाना है, तो पिछडे़ को हर सुविधा उपलब्ध कराना सरकार का काम है. सिर्फ आर्थिक आधार पर. जातिवाद तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक आप हर इंसान को आर्थिक रूप से मजबूत नही करेंगे. भारत से नीची जाति के लोग जब इंग्लैंड या अमेरिका जाते हैं, तो वहां उन्हें आरक्षण की जरूरत क्यों महसूस नहीं होती? इसके लिए उन्हें राजनीतिक पार्टी गठित करने की जरूरत क्यों नहीं होती? हमारे देश में तो शिक्षा व्यापार हो गया है, जिसके लिए हर सरकार दोषी हैं.’’