फिल्म ‘‘अलीगढ़’’ में होमोसेक्सुअल/‘गे’ प्रोफेसर सिरास का किरदार निभा चुके अभिनेता मनोज बाजपेयी को यह पसंद नही कि वह किसी भी ‘गे’ इंसान को होमो सेक्सुअल कहे. खुद मनोज बाजपेयी कहते हैं-‘‘बचपन से भी मेरे कई समलैंगिक/ गे मेरे दोस्त रहे हैं. मैंने कभी भी ऐसे लोगों को अपने से अलग नहीं माना. सच कहूं तो मुझे होमोसेक्सुअल बोलते हुए भी परेशानी होती है. मेरी राय में हम सभी एक ही समाज में रहने वाले हैं. पर हमारी चाहते अलग अलग हैं. हमारे दुख अलग अलग हैं. अफसोस की बात यह है कि ‘गे’ लोगों के प्रति हर सरकार का रवैया एक जैसा ही रहा है. प्रजातंत्र में सबसे बड़ी गलत बात यह है कि हम वोट की राजनीति करते हैं. हम न्याय की राजनीति कभी नहीं करते. इसके अलावा हमारे देश में ‘होमोसेक्सुआलिटी’ को लेकर जो टैबू बना हुआ है, वह गलत है.

समलैंगिकता को लेकर जो भरतीय समाज मे जो ‘टैबू’ बना हुआ है,उसके लिए वह समाज को दोषी ठहराते हुए कहते हैं-‘‘पूरी तरह से समाज दोषी है. अब सती प्रथा के लिए कौन दोषी था? बाद में लोगों ने माना कि सती प्रता गलत थी. धीरे धीरे लोग समलैंगिकता को भी स्वीकार करने लगे हैं. अब ‘गे’ लोगों के समर्थन में लोग इकट्ठा हो रहे हैं. हम सभी अलग तरह के लोग हैं. मेरे कई समलैंगिक/होमोसेक्सुअल दोस्त हैं. आपके भी हो सकते हैं और हम इन दोस्तों के साथ बैठकर पार्टियां भी करते हैं. हमारे कई शिक्षक समलैंगिक रहे हैं, जिनसे हमने बहुत कुछ सीखा है. मैंने तो उनसे अभिनय के बहुत बडे़ गुण सीखे हैं. इनके साथ समाज में जब भेदभाव होता है, तो मुझे बहुत तकलीफ होती है.’

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