समय के साथ बदलाव आना स्वाभाविक है. 1966 में एफ सी मेहरा निर्मित तथा लेख टंडन निर्देशित सफलतम फिल्म ‘‘आम्रपाली’’ के सभी गीतों को संगीतकार शंकर जयकिशन के निर्देशन में लता मंगेशकर ने गाया था. अब पूरे 50 साल बाद उसी फिल्म ‘‘आम्रपाली’’ का रीमेक ‘‘श्री लाजलक्ष्मी प्रोडक्शन’’ के बैनर तले बलदेव सिंह बेदी करने जा रहे हैं. यह नए जमाने की ऐतिहासिक फिल्म होगी. जिसमें संगीतकार राबी बादल के निर्देशन में सभी गीत मधुश्री गा रही हैं.

हाल ही में महबूब लिखित दो गानों को मधुश्री ने अपनी आवाज में रिकार्ड भी किया, जिसमें से एक गाना मधुश्री ने उस्ताद राशिद खान के साथ स्वरबद्ध किया है. इस शास्त्रीय गीत में आम्रपाली के बचपन से एक खूबसूरत औरत बनने तक की यात्रा का चित्रण है. जबकि दूसरा गाना हल्दी सेरेमनी के समय का है.

मूलतः बंगाली मधुश्री क्लासिकल संगीत की ट्रेनिंग लेने के बाद संगीतकार ए आर रहमान से प्रेरित होकर मुंबई आयी थी. मधुश्री ने पहली बार 2001 में संगीतकार राजेष रोशन के निर्देशन में फिल्म ‘‘मोक्ष’’ का गीत ‘‘मोहब्बत जिंदगी है’’ गाया था. उसके बाद से उन्हे पीछे मुड़कर देखने की जरुरत नहीं पड़ी. पंद्रह साल के अपने गायन करियर में मधुश्री ने ‘साथिया’, ‘कुछ न कहो’, ‘कल हो ना हो’, ‘स्वदेश’, ‘युवा’, ‘रंग दे बसंती’, व ‘रांझणा’ जैसी कई सफलतम फिल्मों में अपनी आवाज व अपनी गायन शैली का जादू बिखेर चुकी हैं.

अब मधुश्री फिल्म ‘‘आम्रपाली’’ के सभी गीतो को स्वरबद्ध करते हुए काफी उत्साहित हैं. वह कहती हैं-‘‘मशहूर ऐतिहासिक पात्र व राजशाही वेश्या आम्रपाली की आवाज बनकर में काफी उत्साहित हूं. मैंने 1966 में बनी फिल्म भी देखी है और इस फिल्म में लता मंगेशकर द्वारा स्वरबद्ध सभी गाने मैने बडे़ ध्यान से सुने हैं. मैं तो लता जी की बहुत बड़ी प्रशंसक हं. उन्होने इस फिल्म के गीतों को बहुत बेहतरीन ढंग से गाया था. यदि मैं उनके गायन के कुछ करीब भी पहुंच गयी, तो यह मेरे लिए आशीर्वाद ही होगा. इसलिए इस फिल्म के गीतों को अपनी आवाज देना मेरे लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. इस फिल्म की नृत्य निर्देशक सरोज खान जी ने तो मेरे द्वारा अब तक स्वरबद्ध किए गए दोनो गानों की काफी तारीफ की है.’’