सरिता विशेष

पर्यटन रोज़गार का एक बड़ा माध्यम है इससे कई लोगो को काम मिलता है इसी सोच को ध्यान में रखते हुए ‘लैंड ऑफ़ राइजिंग सन’ अर्थात अरुणाचल प्रदेश के टूरिज्म विभाग ने बी ई वायोकॉम 18 के साथ मिलकर इसे पूरे देश-विदेश में फ़ैलाने का संकल्प लिया. उत्तरी पूर्वी प्रान्त का यह भाग अभी भी लोगो की पहुँच से दूर है.

सेवेन सिस्टर्स ऑफ़ इंडिया में अरुणाचल प्रदेश सबसे बड़ा क्षेत्र है. यहाँ की आबादी बहुत कम है हरे-भरे जंगलों से भरा यह राज्य पर्यटन के लिए ख़ास है.अभिनेता जॉन अब्राहम इस अभियान के ब्रांड एम्बेसडर हैं, उनका कहना है कि मुझे प्राकृतिक सुन्दरता बहुत पसंद है, सुदूर प्रान्त की यह खुबसूरती मेरे लिए खास है. इससे जुड़ना मेरे लिए खुशी की बात है.

जॉन अब्राहम नार्थ ईस्ट फुटबाल टीम के ओनर हैं और इससे पहले वे मैराथन ‘रन फॉर नार्थ ईस्ट’ में भी भाग ले चुके हैं. जीवन की आपाधापी से दूर उन्हें ये स्थान बहुत पसंद है. जॉन कहते हैं कि अगर आपने अरुणाचल प्रदेश नहीं देखा है तो आपको हमारे देश की खूबसूरती का पता नहीं चल पायेगा. मुझे बाइकिंग, फोटोग्राफी, राफ्टिंग सब पसंद है. यहां 85 प्रतिशत जंगल है. यहां की आबादी कम है और यही इस क्षेत्र की सबसे अधिक खास बात है. यहां के लोग बहुत साधारण हैं और मेहमान नवाज़ी को तवज्जों देते हैं. जिस तरीके से वे लोगो की आवभगत करते है वह काबिले तारीफ़ है. यहां की ‘जीरो फेस्टिवल’ को मैं एन्जॉय करना चाहता हूँ. जो 22 सितम्बर से 25 सितम्बर तक चलता है. इसके अलावा मेरी कोशिश यह रहेगी कि बॉलीवुड भी इस प्राकृतिक सुन्दरता को फिल्मों में अधिक से अधिक लायें.

अरुणाचल प्रदेश के टूरिज्म सेक्रेटरी जोरम बेडा कहते है कि अरुणाचल एक बहुत ही सुंदर जलवायु वाला प्रदेश है, यहाँ कुछ प्रतिबन्धित क्षेत्र भी हैं. जो विदेशी यहाँ आते हैं, उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है. पहले यहाँ की यातायात की व्यवस्था अच्छी नहीं थी, जो अब काफी अच्छी हो चुकी है. गौहाटी या इटानगर आने पर लैंड परमिट दी जाती है. इसे आसान बनाया गया है ताकि पर्यटक को कोई असुविधा न हो. यहाँ की संस्कृति और खुबसूरती को लोग जानते नहीं है. यहाँ आने से लोग डरते हैं, क्योंकि यहाँ आदिवासी हैं. लेकिन यह राज्य काफी बदल चुका है, यहाँ की मानसिकता बदल चुकी है. वे अब प्रोग्रेसिव विचार रखते हैं. यहाँ की फेस्टिवल काफी कलरफुल है. यह स्थान एथनिक और एक्सोटिक है.