सरिता विशेष

आम धारणा यह है कि बौलीवुड की चर्चित अदाकारा स्वरा भास्कर को अभिनय व सिनेमा से जुड़ने की प्रेरणा उनकी मां इला भास्कर से मिली, जो कि जेएनयू में सिनेमा की प्रोफेसर हैं. पर हकीकत इसे जुदा है. जब स्वरा भास्कर ने सिनेमा से जुड़ने का फैसला किया, उस वक्त उनकी मां इला भास्कर अंग्रेजी साहित्य पढ़ाया करती थी और उनके पिता उदय भास्कर नेवी में थे. अपने माता पिता की सिफारिश के बिना कुछ करने के लिए ही स्वरा भास्कर ने अभिनय के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया था.

‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए खुद स्वरा भास्कर कहती हैं-‘‘जब मैं बड़ी हो रही थी, उस वक्त मेरी मां अंग्रेजी साहित्य पढ़ाया करती थी. मेरे पिता उस वक्त नेवी में थे. तो एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में मेरी परवरिश हुई. सिक्स्थ पे कमीशन के बाद हम अपर मिडल क्लास में पहुंच गए. हमने अच्छे स्कूल व कालेज में पढ़ाई की. फिर मैने सोचा कि मैंने जिंदगी में जो शिक्षा पायी है, उसका कैसे उपयोग करूं. मैने सोचा कि मैं ऐसी जगह काम करने का प्रयास करूं, जहां मेरे माता पिता की कोई पहचान न हो, उनकी कोई सिफारिश न चल सके.’’

इस पर जब हमने स्वरा भास्कर से पूछा कि उस वक्त उनकी मां सिनेमा नहीं पढ़ा रही थी, तो फिर उन पर सिनेमा का प्रभाव कहां से पड़ा? इस पर स्वरा भास्कर ने बताया-‘‘मुझे लगता है कि बौलीवुड का प्रभाव जाने अनजाने हर इंसान पर पड़ ही जाता है. हम चाह कर भी नहीं बच पाते हैं. बचपन में हम दूरदर्शन पर ‘चित्रहार’ देखा करते थे. यह कार्यक्रम हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा था. आप कह सकते हैं कि ‘चित्रहार’ ने मेरी जिंदगी खराब कर दी. उन दिनों दिल्ली के ऑटो में पीछे की तरफ प्लास्टिक में फिल्म स्टारों के पोस्टर लगे होते थे. तो मेरे दिमाग में भी आया कि इसी तरह से मेरे भी पोस्टर लगने चाहिए. यही मेरी सफलता का पैमाना था.’’

तो क्या स्वरा भास्कर सफल हो गयी? इस सवाल पर स्वरा ने कहा-‘‘सफल हो गयी हूं. लोग मुझे कलाकार के तौर पर पहचानते हैं. लेकिन दिल्ली के ऑटो में अभी तक मेरी तस्वीर नहीं लगी.’’