सरिता विशेष

1975 के आपातकाल की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘‘इंदू सरकार’’ के निर्माता निर्देशक मधुर भंडारकर ने ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ‘सीबीएफसी’ की परीक्षण समिति ने उनकी फिल्म ‘‘इंदू सरकार’’ को लेकर 14 कट्स की सिफारिश की है, जिसके विरोध में वे रीवाइजिंग कमेटी यानी कि पुनःपरीक्षण समिति के पास जाएंगे.

फिल्म ‘‘इंदू सरकार’’ के किरदार तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व.इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी से प्रेरित हैं. 25 जून 1975 को आपातकाल लागू हुआ था और 21 मार्च 1977 को खत्म हुआ था.

सूत्रों के अनुसार सीबीएफसी ने फिल्म में दिखायी गयी ‘नेशनल हेराल्ड’’ समाचार पत्र की एक कटिंग को हटाने के लिए कहा है, जिसमें 1975 के वक्त की खबर के साथ बाजपेयी, मोरारजी और आडवाणी के नाम हैं.

सूत्रों के अनुसार इसके अलावा ‘सीबीएफसी’ ने फिल्म से निम्न पंक्तियां हटाने की सिफारिश की है :

1. अब इस देश में गांधी के मायने बदल चुके हैं.

2. भारत की एक बेटी ने देश को बंदी बनाया हुआ है.

3. और तुम लोग जिंदगी भर मां बेटे की गुलामी करते रहोगे.

4. मैं तो 70 साल का बूढ़ा हूं, मेरी नसबंदी क्यों करवा रहे हो.

‘सीबीएफसी’ने फिल्म से निम्न शब्द हटाने की भी सिफारिश की है :

1. किशोर कुमार,

2. आई बी,

3. पी एम,

4. सेक्शन आफिसर,

5. आर एस एस,

6. अकाली,

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7. कम्यूनिस्ट,

8. जय प्रकाश नारायण

इन कट्स के बावजूद फिल्म में दो डिस्क्लेमर जोड़ने की भी सिफारिश की गयी है. मधुर भंडारकर ने कहा है – ‘‘यह कट्स बेमानी है. इससे हमारी फिल्म प्रभावित होगी. इसलिए हम हर हाल में रिवाइंजिंग कमेटी के पास जाएंगे.’’

यूं तो यह फिल्म शुरू से ही कांग्रेस पार्टी की आंखों में खटक रही थी. मुंबई प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम ने ‘सीबीएफसी’ चेअरमैन पहलाज निहलानी को पत्र लिखकर मांग की थी कि फिल्म को सेंसर प्रमाण पत्र दिए जाने से पहले फिल्म को उन्हें दिखाया जाए. उधर कांग्रेस पार्टी की इंदौर शाखा ने ‘‘सिने सर्किट एसोसिएशन’’ और ‘सिने ग्रह संचालन’ को पत्र लिखकर फिल्म ‘इंदू सरकार’ को सिनेमाघरों में न दिखाने की मांग के साथ धमकी भी दी है.

जबकि मधुर भंडारकर ने दावा किया है कि उनका मकसद अपनी फिल्म के माध्यम से किसी भी विचारधारा का प्रचार करना नहीं है.